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आसमान से बरसती रही आग, प्रदेश में होती रही सौगातों की बरसात

रायपुर, 29 मई।

नवतपे के पांचवें दिन आज (मंगलवार) भी सूरज आसमान से आग बरसाता रहा, जबकि छत्तीसगढ़ की धरती पर मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में चल रही विकास यात्रा में आम जनता के लिए सुविधाओं और सौगातों की राहत भरी बारिश होती रही। भीषण गर्मी के बावजूद मुख्यमंत्री की तीनों आमसभाओं और तीनों स्वागत सभाओं में हजारों की संख्या में किसानों, मजदूरों और आम नागरिकों का हुजूम उमड़ता रहा। लोगों में भरपूर उत्साह और जज्बा देखा गया। मुख्यमंत्री ने आज जांजगीर-चांपा जिले के बम्हनीडीह, जिला रायगढ़ के छाल और मुख्यालय रायगढ़ की आमसभाओं में जनता को लगभग 647 करोड़ 43 लाख रुपये के 148 कार्यों का लोकार्पण, भूमिपूजन और शिलान्यास किया। वहीं उन्होंने डॉ. रमन सिंह ने आज की तीनों आमसभाओं में दो जिलों-जांजगीर-चांपा और रायगढ़ के दो लाख 72 हजार 722 किसानों को पिछले खरीफ सीजन के धान पर लगभग 370 करोड़ रुपये का बोनस ऑनलाइन वितरित किया। डॉ. सिंह ने लैपटॉप पर बटन दबाकर इंटरनेट के जरिए यह सम्पूर्ण राशि किसानों के बैंक खातों में हस्तांतरित कर दी।
डॉ. रमन सिंह ने रोड-शो के बाद जिला मुख्यालय रायगढ़ में रात में आयोजित विशाल आमसभा में कहा-प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विगत चार वर्ष में देश के विकास को एक नई गति मिली है और पूरी दुनिया में भारत का मान-सम्मान बढ़ा है। डॉ. रमन सिंह ने आज ही विकासखण्ड-मुख्यालय बम्हनीडीह (जिला-जांजगीर-चांपा) और ग्राम छाल (जिला-रायगढ़) में भी विशाल जनसभाओं को सम्बोधित किया। उन्होंने रायगढ़ की आमसभा में कहा-लोकतंत्र में जनता के आशीर्वाद और सहयोग के बिना विकास का कोई भी संकल्प पूरा नहीं हो सकता। राज्य सरकार द्वारा आयोजित प्रदेश व्यापी विकास यात्रा भी वास्तव में जनता से आशीर्वाद लेने की एक बड़ी तीर्थ यात्रा है।
प्रदेश के आखिरी गांव तक विकास का संदेश और योजनाओं का लाभ पहुंचाना इस यात्रा का उद्देश्य है। उन्होंने कहा-रायगढ़ जिले की जनता के आशीर्वाद से जिले के विकास के लिए हम सबको ताकत मिली है। मुख्यमंत्री ने रायगढ़ जिले की केलो सिंचाई परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि लगभग 920 करोड़ रुपये की लागत से इसका निर्माण किया गया है। बम्हनीडीह की आमसभा में मुख्यमंत्री ने सम्पूर्ण जांजगीर-चांपा जिले को ऋषि संस्कृति और कृषि संस्कृति के साथ औद्योगिक विकास की नई संभावनाओं का संगम स्थल बताया। छाल (जिला-रायगढ़) की आमसभा में मुख्यमंत्री ने कहा-यह विकास यात्रा किसानों और मजदूरों की तकलीफों को दूर करने के लिए निकाली गई है।
मुख्यमंत्री के हाथों बम्हनीडीह की आमसभा में एक लाख 32 हजार किसानों को 200 करोड़ रूपए, छाल की आम सभा में 96 हजार किसानों को 96 करोड़ रूपए और रायगढ़ की आमसभा में 44 हजार 720 किसानों को 73 करोड़ 79 लाख रुपये का धान बोनस मिला। इतना ही नहीं, बल्कि डॉ. रमन सिंह की आज बम्हनीडीह और रायगढ़ की आमसभाओं में एक लाख से ज्यादा परिवारों को आबादी पट्टों का भी वितरण किया। इनमें से दस हजार 369 परिवारों को बम्हनीडीह में और 87 हजार परिवारों को रायगढ़ में आबादी पट्टे प्राप्त हुए।
मुख्यमंत्री ने तीनों आमसभाओं में शासन की विभिन्न योजनाओं के तहत 42 हजार 426 हितग्राहियों को सामग्री और अनुदान राशि आदि का वितरण किया। मुख्यमंत्री आज सरायपाली (जिला-महासमुन्द) से हेलीकॉप्टर द्वारा जांजगीर-चांपा जिले के बम्हनीडीह आए और वहां की आमसभा को सम्बोधित करने के बाद हेलीकॉप्टर से ही छाल (जिला रायगढ़) पहुंचे। छाल की आमसभा के बाद मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से घरघोड़ा आए, जहां उन्होंने स्वागत सभा को सम्बोधित किया और वहां से विकास रथ में आम जनता का अभिवादन करते हुए बंजारी और गेरवानी में स्वागत सभाओं को सम्बोधित करते हुए जिला मुख्यालय रायगढ़ पहुंचे, जहां विशाल रोड-शो में नगरवासियों ने उनका अभूतपूर्व स्वागत किया।
मुख्यमंत्री के साथ रायगढ़ की आमसभा में केन्द्रीय इस्पात राज्य मंत्री विष्णुदेव साय, प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राजेश मूणत, संसदीय सचिव सुनीति राठिया, विधायक सारंगढ़ केराबाई मनहर, औषधीय पादप बोर्ड के अध्यक्ष रामप्रताप सिंह, गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष भूपेन्द्र सवन्नी, अध्यक्ष जिला पंचायत अजेश पुरूषोत्तम अग्रवाल तथा महापौर रायगढ़ नगर निगम मधु बाई सहित अनेक जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
छाल में आयोजित आमसभा में भी केन्द्रीय इस्पात राज्य मंत्री विष्णुदेव साय और लोक निर्माण मंत्री राजेश मूणत सहित कई संस्थाओं के पदाधिकारी और वरिष्ठ जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। दोपहर बम्हनीडीह में आयोजित मुख्यमंत्री की आमसभा में पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री अजय चंद्राकर, लोकसभा सांसद कमला देवी पाटले, संसदीय सचिव और पामगढ़ के और पामगढ़ के विधायक अम्बेश जांगड़े, सक्ती के विधायक डॉ. खिलावन साहू, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष भूपेन्द्र सवन्नी, राज्य अन्त्यावसायी सहकारी विकास निगम के अध्यक्ष निर्मल सिन्हा सहित विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी भी बड़ी संख्या में मौजूद थे।

चौथा खंभा न्यूज़ .com / नसीब सैनी/अभिषेक मेहरा

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कल से शुरू होगा गांव बाबा लदाना में 3 दिवसीय मेला, मेले को लेकर डेरे की तैयारियां पूरी

कल से शुरू होगा गांव बाबा लदाना में 3 दिवसीय मेला, मेले को लेकर डेरे की तैयारियां पूरी

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ब्यूरो चौथा खंभा न्यूज़ कैथल। गांव बाबा लदाना स्थित डेरा बाबा राजपुरी पर 3 दिवसीय मेला शुक्रवार से लगेगा। रावण दहन के बाद मेले में श्रद्धालु पहुंचना शुरू हो जाएंगे। दो साल बाद बाबा राजपुरी पर लगने वाले मेले की तैयारियां जोरों पर हैं। कोरोना संक्रमण के कारण बीते वर्ष इतिहास में पहली बार बाबा राजपुरी पर मेला नहीं लग पाया था। इस बार भी कोरोना संक्रमण के कारण मेले की कोई अधिकारिक घोषणा नहीं है, लेकिन डेरे के प्रति लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के कारण यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचने की उम्मीद है। इसी को देखते हुए तैयारियां भी शुरू हो गई है। मंदिर को लाइटों से सजाया गया है। मेले के लिए झूले लग चुके हैं। इस बार डेरे की ओर से ही भंडारा लगाया जाएगा। भंडारे के लिए देसी घी के लड्डू तैयार किए जा रहे हैं।

रावण दहन के बाद शुरू होता है मेला

डेरा बाबा राजपुरी पर 3 दिवसीय मेले की शुरुआत दशहरे से होती है। रावण दहन के बाद श्रद्धालु मेले में पहुंचना शुरू होते हैं। विजयदशमी, एकादशी व द्वादशी पर डेरे में मेला लगता है। यहां प्रदेशभर के अलावा पंजाब, राजस्थान, यूपी, गुजरात, छत्तीसगढ़ व केरल से भी श्रद्धालु पूजा पाठ के लिए पहुंचते हैं। डेरे में पशुओं की सुख समृद्धि के लिए पूजा की जाती है। श्रद्धालु दूध व घी का दान करते हैं और काफी श्रद्धालु मनोकामना पूरी होने पर पशुओं को भी दान स्वरूप देकर जाते हैं।

तालाब की सफाई करते सफाईकर्मी

3 दिवसीय मेले पर इस बार बाबा राजपुरी डेरे की ओर से ही भंडारा लगाया जा रहा है। जोकि तीन दिन तक चलेगा। इससे पहले श्रद्धालुओं की ओर से ही भंडारा लगाया जाता था संक्रमण को देखते हुए सेनिटाइज की व्यवस्था मंदिर की ओर से की जाएगी।

डेरे में लगी स्वामी विवेकानंद के गुरु रामकृष्ण परमहंस की तस्वीर

स्वामी विवेकानंद से जुड़ा है इतिहास

डेरा बाबा राजपुरी का इतिहास काफी गौरवमयी है। विश्व में प्रसिद्धि हासिल करने वाले आध्यात्मिक गुरु रामकृष्ण परमहंस के गुरु तोतापुरी इसी डेरे के 7वें महंत थे। रामकृष्ण परमहंस ही स्वामी विवेकानंद के गुरु हैं। वर्तमान में बाबा दूजपुरी डेरा के महंत हैं। महंत दूजपुरी ने बताया कि बाबा राजपुरी के देशभर में 365 धुणे हैं। गांव लदाना में बाबा राजपुरी का जन्म 1690 में हुआ था। जिन्होंने करीब 8 वर्ष की उम्र में ही गांव बात्ता जाकर चोला धारण कर लिया और संत सरस्वती पुरी को अपना गुरु बनाया। बाबा राजपुरी 52 शक्तिपीठ में शामिल माता हिंगलाज को काफी मानते थे। इसके बाद गांव बाबा लदाना में डेरा की स्थापना हुई। आज भी ऐसी मान्यता है कि माता हिंगलाज अष्टमी की रात को डेरे में बने मंदिर में आती है और सैकड़ों साल पुराने जाल के पेड़ पर धागा बांधकर जाती है।

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कोल्डड्रिंक की मामूली उधारी को लेकर चायवाले का मर्डर

Chaiwala murdered over meager borrowing of cold drink

कैथल । कैथल के तलाई बाजार में मामूली उधारी के लिए एक मर्डर हो गया। जानकारी के अनुसार रितेश नामक व्यक्ति तलाई बाजार में चाय की दुकान चलाता था और अपने परिवार का पेट पालता था।

जब उधारी मांगने गया चायवाला रितेश तो टेलर राजू  ने किया झगड़ा व पेट मे मारी कैंची, इलाज के दौरान मौत

पास में ही एक राजू नामक टेलर की दुकान है। जब चायवाला रितेश सोमवार शाम को टेलर राजू से कोल्डड्रिंक के रुपये मांगने गया तो उनकी रुपये को लेकर कुछ आपस मे कहा सुनी हो गई जिसके बाद राजू ने रितेश के पेट मे कपड़ा काटने वाली कैंची मार दी। गंभीर रूप से घायल रितेश को अस्पताल में भर्ती करवाया गया जिसकी इलाज के दौरान कुछ देर बाद मौत हो गई।

कोल्डड्रिंक की मामूली उधारी को लेकर चायवाले का मर्डर

पुलिस ने पहले 307 का पर्चा दर्ज किया था लेकिन रितेश की मौत के बाद 302 का मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है।
बता दें कि रितेश के परिवार में उनकी पत्नी व एक बच्चा है जिनका अकेला सहारा मृतक  रितेश ही था।

पहले धारा 307 के तहत मामला दर्ज हुआ था आम मौत के बाद 302 का मामला दर्ज : सुरेंद्र कुमार, एसएचओ सिटी थाना
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इमरान खान की बंदूक और खूनखराबे की भाषा बर्दाश्त नहीं की जा सकतीःसंयुक्त राष्ट्र में भारतीय प्रतिनिधि विदिशा मैत्रा

—भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि इमरान खान की परमाणु तबाही की धमकी राजनेता की भाषा नहीं बल्कि असंतुलित मानसिकता वाले व्यक्ति की भाषा है

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न्यूयॉर्क,(नसीब सैनी)।

संयुक्त राष्ट्र में भारत की राजनयिक विदिशा मैत्रा ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के इस विश्व मंच पर दिए गए भाषण का मुंहतोड़ उत्तर देते हुए कहा कि इमरान घृणा से भरी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं जो 21 वीं सदी नहीं बल्कि मध्ययुग की मानसिकता को दर्शाता है। संयुक्त राष्ट्र में भारतीय मिशन में प्रथम सचिव विदिशा मैत्रा ने उत्तर देने के अधिकार का प्रयोग करते हुए कहा कि शुक्रवार को इमरान खान का घृणा से भरा भाषण विश्व संस्था का दुरुपयोग है । कूटनीति में एक-एक शब्द का अर्थ होता है। इमरान की भाषा इससे एकदम परे रही।

उन्होंने कहा कि  इमरान ने नरसंहार, खूनखराबा, नस्ली दंभ, हथियार उठाने और मरते दम तक लड़ने जैसे शब्दों का  प्रयोग किया जो कबायली कस्बे दर्रा आदम खेल में प्रचलित  बंदूक की भाषा है। ऐसा इस विश्व संस्था  में शायद ही पहले कभी  हुआ हो। भारतीय राजनयिक ने कहा कि एक व्यक्ति जो कभी सज्जनों  का खेल कहे जाने वाले क्रिकेट से जुड़ा रहा हो वह भोंडी भाषा का इस्तेमाल कर रहा है। 

भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि इमरान खान की परमाणु तबाही की धमकी राजनेता की भाषा नहीं बल्कि असंतुलित मानसिकता वाले व्यक्ति की भाषा है। पाकिस्तान में आतंकवाद का पूरा उद्योग फल फूल रहा है और इस पर उसका एकाधिकार जैसा है। इमरान खान पूरी निर्लज्जता से इसकी वकालत कर रहे हैं। 

मैत्रा  ने कहा कि इमरान खान की पूरी भाषा विभाजन पैदा करने वाली है। वह अमीर बनाम गरीब, उत्तर बनाम दक्षिण, विकसित बनाम विकासशील और मुस्लिम बनाम अन्य धर्मावलंबी की विभाजनकारी भाषा का इस्तेमाल विश्व संस्था में कर रहे हैं। यह घृणा फैलाने वाला भाषण (हेट स्पीच) है। 

मैत्रा ने कश्मीरियों की हिमायत में बोलने के पाकिस्तान के दावे को खारिज करते हुए कहा कि भारतीय नागरिकों को किसी वकील की जरूरत नहीं है। खास ऐसे लोग उनकी ओर से नहीं बोल सकते जो आतंकवाद का उद्योग चला रहे हैं और घृणा की विचारधारा में विश्वास रखते हैं। 

उन्होंने कहा कि अब जब कि इमरान खान ने उग्रवादी संगठनों की उनके देश में गैरमौजूदगी की जांच के लिए संयुक्त राष्ट्र पर्यवेक्षक भेजने की पेशकश की है, अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को यह दवाब बनाना चाहिए कि वह अपनी बात पर कायम रहें। 

भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान की पेशकश के संदर्भ में  उसके नेताओं से अनेक सवाल पूछे। उन्होंने पूछा,  क्या यह सही नहीं है कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित 130 आतंकवादी और 25 आतंकवादी संगठन पाकिस्तान में पनाह लिए हुए हैं। क्या पाकिस्तान यह स्वीकार करेगा कि वह दुनिया में एकलौता ऐसा देश है जो आतंकवादी संगठनों अल कायदा और इस्लामिक स्टेट से जुड़े आतंकवादी  को पेंशन देता है। क्या पाकिस्तान इस बात पर सफाई देगा  कि न्यूयॉर्क स्थित पाकिस्तान के हबीब बैंक पर इसलिए ताला  पड़ गया था कि वह आतंकवादियों को धन मुहैया करता था और  उस पर भारी  जुर्माना हुआ था। क्या पाकिस्तान इस बात से इंकार कर सकता है कि आतंकवादियों को धन मुहैया कराये जाने से रोकने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था ने 27 में से 20 मानकों में पाकिस्तान को उल्लंघन करने वाला देश माना है। क्या इमरान खान इस बात से इंकार करेंगे कि वह ओसामा बिन लादेन की खुलकर हिमायत करते रहे हैं। 

भारतीय प्रधिनिधि मैत्रा ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने आतंकवाद और घृणा से भरे भाषण को मुख्यधारा बना दिया है और वह मानवाधिकारों का झूठा कार्ड खेल रहे हैं। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की दुर्दशा का ब्योरा देते हुए मैत्रा  ने कहा कि विभाजन  के समय पाकिस्तान में अल्पसंख्यों की आबादी 23 प्रतिशत थी जो अब घट कर तीन प्रतिशत हो गई है। ईसाइयों, सिखों, अहमदिया लोगों, शियाओं, पश्तूनों, सिंधियों और बलूचियों के खिलाफ ईशनिंदा कानून  के तहत जुल्म किया जा रहा है तथा योजनाबद्ध उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन का सिलसिला जारी है।

विदिशा मैत्रा ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का पूरा नाम  ‘इमरान खान नियाजी’ लेते हुए उन्हें बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में पाकिस्तान के  जुल्मी सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल एए खान नियाजी के कारनामों की याद दिलाई।  उन्होंने कहा कि संगठित नरसंहार किसी जीवंत लोकतंत्र में नहीं होते। अपनी याद्दाश्त ताजा करिये और वर्ष 1971 में पूर्व पाकिस्तान में जनरल नियाजी द्वारा किये गए नृशंस नरसंहार को मत भूलिए। 

भारतीय प्रतिनिधि ने इस संदर्भ में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए गए संबोधन की चर्चा की। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के संबंध में पाकिस्तान की जहरीली प्रतिक्रिया  को खारिज करते हुए मैत्रा  ने कहा कि यह एक कालबाह्य और अस्थाई प्रावधान  था जो राज्य के विकास और शेष भारत के साथ उसके एकीकरण में बाधक था। इस अनुच्छेद को हटाए जाने का विरोध इसलिए किया जा रहा है क्योंकि संघर्ष पर फलने-फूलने वाले लोग शांति की किरण को कभी  बर्दाश्त नहीं करते। 

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद फैलाने और घृणा का वातावरण पैदा  करने का मंसूबा बना रहा है जबकि भारत वहां विकास की गंगा बहाना चाहता है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत की जीवंत और समृद्ध लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा बनाया जा रहा है।  यह लोकतंत्र विविधता, सहिष्णुता और बहुलवाद की सदियों पुरानी विरासत पर आधारित है। 

नसीब सैनी

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