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कर्नाटक चुनाव : स्‍टार अभिनेत्रियों में कांग्रेस भाजपा से आगे

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बेंगलूरु, 26 अप्रैल

दक्षिण के राज्यों में फिल्‍म अभिनेत्रियों के लिए दीवानगी कोई नई बात नहीं है, हर राजनीतिक पार्टी इनका उपयोग चुनाव के दौरान अपने प्रचार के लिए करती देखी गई है। दक्षिणी राज्य तमिलनाडु में अम्‍मा के नाम से विख्‍यात रहीं अभिनेत्री से मुख्यमंत्री बनी जयललिता को आज कोई नहीं भूलता, ऐसी ही दीवानगी अन्‍य फिल्‍म अदाकाराओं के प्रति दक्षिण के अन्‍य राज्‍यों में दिखाई देती है। इस बार भी यहां कर्नाटक में 15वीं विधानसभा के लिए हो रहे चुनावों में अभिनेत्रियों का राजनीति में सीधा ग्‍लैमर दि‍खाई दे रहा है, जिसमें राज्‍य की राजनीति में सबसे अधिक सत्‍ता प्राप्‍त करने की दावेदार कांग्रेस और भाजपा में यह अभिनेत्रियां ज्‍यादा सक्रिय हैं। इसमें स्टार कैंपेनर के रूप में कांग्रेस अभी कर्नाटक में भाजपा से आगे चल रही है। जब भी कोई फिल्‍म अदाकारा कांग्रेस कार्यालय पहुंचती है तो पार्टी कार्यकर्ताओं से ज्‍यादा उसकी एक झलक देखने के लिए दीवानों का हूजूम पहले से वहां मौजूद रहता है।
अपने खुले विचारों और अभिनय के लिए मशहूर अदाकारा खुशबू और नगमा इन दिनों एक बार फिर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनाकर सिद्धरामय्या को मुख्‍यमंत्री बनाने के लिए जी तोड़ मेहनत करती नजर आ रही हैं। कन्नड़ फिल्मों की प्रमुख अभिनेत्रियां रम्या और भावना कांग्रेस की चुनाव अभियान समिति की पूर्व से सदस्य रहती आई हैं। उनके चुनाव प्रचार अभियान में जोर-शोर से शामिल रहती ही है। जबकि भारतीय जनता पार्टी को सांसद हेमामालिनी और हिन्‍दी धारावाहिकों से प्रसिद्ध‍ि के मुकाम तक पहुंची केंद्रीय मंत्री स्‍मृति ईरानी का साथ हैं।
अभिनेत्री खुशबू के बारे में जानें तो यह कांग्रेस में शामिल होने के पहले तमिलनाडु की डीएमके पार्टी से जुड़ी थीं लेकिन वह अपना सामंजस्य बैठाने में वहां नाकामयाब रहीं, उसके बाद खुशबू ने कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की और पार्टी में काम करने की अपनी इच्‍छा जाहिर की, श्रीमती गांधी की तत्‍काल इसके लिए हामी मिली और उसके बाद कांग्रेस की सदस्यता लेकर वे पार्टी में सक्रिय हो उठीं। खुशबू को उनके विवादास्‍पद बयानों के लिए भी जाना जाता है। तमिलनाडु सरकार की तरफ से बेस्ट एक्ट्रेस का अवार्ड पाने वाली खुशबू एक साथ हिंदी, मराठी, अंग्रेजी, तेलुगु, तमिल और कन्नड़ जैसी भाषाएं बोल लेती हैं। अभी जब वे कांग्रेस कार्यालय आती हैं तो उनसे पहले उनके फैन्‍स वहां पहुंच जाते हैं।
इसी प्रकार से कांग्रेस में एक चर्चित नाम यहां अभिनेत्री नगमा का है। हिन्दी, भोजपुरी, दक्षिण भारतीय की तमाम भाषाओं की फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवा चुकी नगमा आज कांग्रेस की स्टार प्रचारक होने के साथ ही अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की महासचिव हैं। वर्ष 1990 में फिल्म ‘बागी’ से उनका फिल्‍मी करियर शुरू हुआ था। यह फिल्म उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में 7वें नंबर पर थी। बॉलीवुड में पहली हिट देने के बाद वे साउथ फिल्म उद्योग में चली गईं और प्रसिद्ध‍ि पाने में सफल रहीं। वह अब तक तमिल, तेलुगू, मलयालम और कन्नड़ की 80 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुकी हैं। नगमा ने कांग्रेस के बैनर तले वर्ष 2014 मेरठ में लोकसभा चुनाव लड़ा था और चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस एमएलए गजराज सिंह ने जनता के बीच उनका हाथ पकड़ लिया था और उन्हें चूमने की कोशिश की थी। जिसके बाद यह मामला सोशल मीडिया में काफी तूल पकड़ा था, इस समय तक जो नहीं जानते थे नगमा को, वह भी उनकी हिम्‍मत को सराह रहे थे।
कांग्रेस की इन दो स्‍टार प्रचारकों के अलावा जो बड़ा नाम इस समय कर्नाटक विधानसभा चुनाव में चर्चा में है वह है भाजपा की ओर से स्‍टार प्रचारक बनाई गई ड्रीम गर्ल के नाम से मशहूर व शोले और क्रांति जैसी सफल फिल्मों की अभिनेत्री हेमा मालिनी का । एक एक्टर के साथ डांसर, निर्माता, निर्देशक तथा भारतीय राजनीति में राजनेताओं के बीच वे आज सफलतम राजनेता हैं। 1999 में हेमा पहली बार राजनैतिक गतिविधि में सक्रीय हुई थीं, जब उन्होंने विनोद खन्ना के चुनाव प्रचार में उनका साथ दिया था, तभी सक्रिय रूप से बीजेपी के संपर्क में आने का मौका भी उन्‍हें मिला, उसके बाद उन्‍होंने भाजपा की सदस्‍यता ले ली थी। हेमा मालिनी 2003 से 2009 तक राज्यसभा की सदस्य रहीं। मार्च 2010 में उन्‍हें बीजेपी का जनरल सेक्रेटरी बना दिया गया। सन् 2014 के आम चुनाव में वे मोदी हवा के रथ पर सवार होकर मथुरा लोकसभा सीट से जनप्रतिनिधि चुनी गईं।
तमिल फिल्म से अपने करियर की शुरुआत करने वाली हेमा मालिनी अभी तक 200 से अधिक फिल्मों में कार्य कर चुकी हैं और उन्हें उनके श्रेष्‍ठ अभिनय के लिए कई अवार्ड मिले हैं। जिसमें कि 2000 में भारत सरकार द्वारा उन्‍हें पद्मश्री अवार्ड दिया गया। 1999, 2003 में लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड वे पा चुकी हैं। 2004 में आइकॉन ऑफ़ दी इयर अवार्ड मिला। उन्‍हें मोस्ट पोपुलर एक्ट्रेस इन इंडिया का ख़िताब 2005 में मिला है। वे अपने क्लासिकल डांस में योगदान देने के लिए भी कई बार भारत और भारत के बाहर बड़े बड़े सम्‍मान पा चुकी हैं। इसके अलावा भी हेमाजी को रजनीकांत लीजेंड अवार्ड, राजीव गाँधी सम्‍मान, पेटा पर्सन ऑफ़ दी इयर जैसे कई पुरस्‍कार और सम्‍मान अभी तक मिल चुके हैं।
भारतीय जनता पार्टी की ओर से दूसरा चर्चित अभिनेत्री का इस चुनाव अभियान में नाम टीवी धारावाहिक क्योंकि सास भी कभी बहू थी से चर्चित हुईं स्मृति इरानी का है। वे गुजरात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध करने से राजनीति में सबसे अधिक तब चर्चा में आई थीं जब मोदी गुजरात के मुख्‍यमंत्री थे। 2004 में स्मृति ने तब नरेंद्र मोदी की बहुत तीखी आलोचना कर गुजरात दंगों के लिए गुनहगार ठहराते हुए इस्तीफे तक की मांग कर डाली थी। उन्‍होंने अपने जीवन में बांद्रा के मैकडॉनल्ड्स में काम करते हुए छोटे-मोटे सीरियलों में काम करना शुरू किया था, फिर वे सौंदर्य प्रसाधनों के प्रचार से लेकर मिस इंडिया प्रतियोगिता की प्रतिभागी भी बनीं। आगे एकता कपूर के सीरियल ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में लीड रोल निभाने पर देश और दुनिया में उन्‍हें एक सफल टीवी कलाकार के रूप में पहचान मिली। समय गुजरने के साथ स्मृति ने टीवी शो भी प्रोड्यूस किया लेकिन उनका का राजनीतिक जीवन सन् 2003 से शुरू होता है, जब वे भारतीय जनता पार्टी की सदस्य बनीं और दिल्ली के चाँदनी चौक लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए उन्‍हें चुना गया। 2004 में महाराष्ट्र यूथ विंग का उपाध्यक्ष बनाई गईं। वर्ष 2011 में राज्यसभा के लिए नामांकित हो सांसद बनी और उसके बाद 2014 के आम चुनाव में कांग्रेस के वर्तमान अध्‍यक्ष राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्‍वास को वे कड़ी टक्‍कर देने में सफल रहीं। हालांकि इस सीट पर जीत कांग्रेस की हुई लेकिन पहले के मुकाबले जीत का अंतर बहुत कम रहा, जिसे देखते हुए भाजपा इस बार फिर यदि राहुल यहां से चुनाव लड़ते हैं तो उनके विरोध में पार्टी से चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रही है।
वास्‍तव में कुल मिलाकर इस तरह देखा जाए तो कर्नाटक में मुख्‍यमंत्री सिद्धरमैय्या के समर्थन में कांग्रेस का प्रचार करते ज्‍यादा अभिनेत्रियां पिछले 2013 की तुलना में चुनावी मैदान में नजर आ रही हैं लेकिन उधर, कहा यह भी जा रहा है कि कांग्रेस की सभी नेत्रियों पर भाजपा की यह दो नेत्रियां बहुत भारी पड़ने वाली हैं।
चौथा खंभा न्यूज़.com

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कल से शुरू होगा गांव बाबा लदाना में 3 दिवसीय मेला, मेले को लेकर डेरे की तैयारियां पूरी

कल से शुरू होगा गांव बाबा लदाना में 3 दिवसीय मेला, मेले को लेकर डेरे की तैयारियां पूरी

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ब्यूरो चौथा खंभा न्यूज़ कैथल। गांव बाबा लदाना स्थित डेरा बाबा राजपुरी पर 3 दिवसीय मेला शुक्रवार से लगेगा। रावण दहन के बाद मेले में श्रद्धालु पहुंचना शुरू हो जाएंगे। दो साल बाद बाबा राजपुरी पर लगने वाले मेले की तैयारियां जोरों पर हैं। कोरोना संक्रमण के कारण बीते वर्ष इतिहास में पहली बार बाबा राजपुरी पर मेला नहीं लग पाया था। इस बार भी कोरोना संक्रमण के कारण मेले की कोई अधिकारिक घोषणा नहीं है, लेकिन डेरे के प्रति लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के कारण यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचने की उम्मीद है। इसी को देखते हुए तैयारियां भी शुरू हो गई है। मंदिर को लाइटों से सजाया गया है। मेले के लिए झूले लग चुके हैं। इस बार डेरे की ओर से ही भंडारा लगाया जाएगा। भंडारे के लिए देसी घी के लड्डू तैयार किए जा रहे हैं।

रावण दहन के बाद शुरू होता है मेला

डेरा बाबा राजपुरी पर 3 दिवसीय मेले की शुरुआत दशहरे से होती है। रावण दहन के बाद श्रद्धालु मेले में पहुंचना शुरू होते हैं। विजयदशमी, एकादशी व द्वादशी पर डेरे में मेला लगता है। यहां प्रदेशभर के अलावा पंजाब, राजस्थान, यूपी, गुजरात, छत्तीसगढ़ व केरल से भी श्रद्धालु पूजा पाठ के लिए पहुंचते हैं। डेरे में पशुओं की सुख समृद्धि के लिए पूजा की जाती है। श्रद्धालु दूध व घी का दान करते हैं और काफी श्रद्धालु मनोकामना पूरी होने पर पशुओं को भी दान स्वरूप देकर जाते हैं।

तालाब की सफाई करते सफाईकर्मी

3 दिवसीय मेले पर इस बार बाबा राजपुरी डेरे की ओर से ही भंडारा लगाया जा रहा है। जोकि तीन दिन तक चलेगा। इससे पहले श्रद्धालुओं की ओर से ही भंडारा लगाया जाता था संक्रमण को देखते हुए सेनिटाइज की व्यवस्था मंदिर की ओर से की जाएगी।

डेरे में लगी स्वामी विवेकानंद के गुरु रामकृष्ण परमहंस की तस्वीर

स्वामी विवेकानंद से जुड़ा है इतिहास

डेरा बाबा राजपुरी का इतिहास काफी गौरवमयी है। विश्व में प्रसिद्धि हासिल करने वाले आध्यात्मिक गुरु रामकृष्ण परमहंस के गुरु तोतापुरी इसी डेरे के 7वें महंत थे। रामकृष्ण परमहंस ही स्वामी विवेकानंद के गुरु हैं। वर्तमान में बाबा दूजपुरी डेरा के महंत हैं। महंत दूजपुरी ने बताया कि बाबा राजपुरी के देशभर में 365 धुणे हैं। गांव लदाना में बाबा राजपुरी का जन्म 1690 में हुआ था। जिन्होंने करीब 8 वर्ष की उम्र में ही गांव बात्ता जाकर चोला धारण कर लिया और संत सरस्वती पुरी को अपना गुरु बनाया। बाबा राजपुरी 52 शक्तिपीठ में शामिल माता हिंगलाज को काफी मानते थे। इसके बाद गांव बाबा लदाना में डेरा की स्थापना हुई। आज भी ऐसी मान्यता है कि माता हिंगलाज अष्टमी की रात को डेरे में बने मंदिर में आती है और सैकड़ों साल पुराने जाल के पेड़ पर धागा बांधकर जाती है।

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कोल्डड्रिंक की मामूली उधारी को लेकर चायवाले का मर्डर

Chaiwala murdered over meager borrowing of cold drink

कैथल । कैथल के तलाई बाजार में मामूली उधारी के लिए एक मर्डर हो गया। जानकारी के अनुसार रितेश नामक व्यक्ति तलाई बाजार में चाय की दुकान चलाता था और अपने परिवार का पेट पालता था।

जब उधारी मांगने गया चायवाला रितेश तो टेलर राजू  ने किया झगड़ा व पेट मे मारी कैंची, इलाज के दौरान मौत

पास में ही एक राजू नामक टेलर की दुकान है। जब चायवाला रितेश सोमवार शाम को टेलर राजू से कोल्डड्रिंक के रुपये मांगने गया तो उनकी रुपये को लेकर कुछ आपस मे कहा सुनी हो गई जिसके बाद राजू ने रितेश के पेट मे कपड़ा काटने वाली कैंची मार दी। गंभीर रूप से घायल रितेश को अस्पताल में भर्ती करवाया गया जिसकी इलाज के दौरान कुछ देर बाद मौत हो गई।

कोल्डड्रिंक की मामूली उधारी को लेकर चायवाले का मर्डर

पुलिस ने पहले 307 का पर्चा दर्ज किया था लेकिन रितेश की मौत के बाद 302 का मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है।
बता दें कि रितेश के परिवार में उनकी पत्नी व एक बच्चा है जिनका अकेला सहारा मृतक  रितेश ही था।

पहले धारा 307 के तहत मामला दर्ज हुआ था आम मौत के बाद 302 का मामला दर्ज : सुरेंद्र कुमार, एसएचओ सिटी थाना
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इमरान खान की बंदूक और खूनखराबे की भाषा बर्दाश्त नहीं की जा सकतीःसंयुक्त राष्ट्र में भारतीय प्रतिनिधि विदिशा मैत्रा

—भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि इमरान खान की परमाणु तबाही की धमकी राजनेता की भाषा नहीं बल्कि असंतुलित मानसिकता वाले व्यक्ति की भाषा है

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न्यूयॉर्क,(नसीब सैनी)।

संयुक्त राष्ट्र में भारत की राजनयिक विदिशा मैत्रा ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के इस विश्व मंच पर दिए गए भाषण का मुंहतोड़ उत्तर देते हुए कहा कि इमरान घृणा से भरी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं जो 21 वीं सदी नहीं बल्कि मध्ययुग की मानसिकता को दर्शाता है। संयुक्त राष्ट्र में भारतीय मिशन में प्रथम सचिव विदिशा मैत्रा ने उत्तर देने के अधिकार का प्रयोग करते हुए कहा कि शुक्रवार को इमरान खान का घृणा से भरा भाषण विश्व संस्था का दुरुपयोग है । कूटनीति में एक-एक शब्द का अर्थ होता है। इमरान की भाषा इससे एकदम परे रही।

उन्होंने कहा कि  इमरान ने नरसंहार, खूनखराबा, नस्ली दंभ, हथियार उठाने और मरते दम तक लड़ने जैसे शब्दों का  प्रयोग किया जो कबायली कस्बे दर्रा आदम खेल में प्रचलित  बंदूक की भाषा है। ऐसा इस विश्व संस्था  में शायद ही पहले कभी  हुआ हो। भारतीय राजनयिक ने कहा कि एक व्यक्ति जो कभी सज्जनों  का खेल कहे जाने वाले क्रिकेट से जुड़ा रहा हो वह भोंडी भाषा का इस्तेमाल कर रहा है। 

भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि इमरान खान की परमाणु तबाही की धमकी राजनेता की भाषा नहीं बल्कि असंतुलित मानसिकता वाले व्यक्ति की भाषा है। पाकिस्तान में आतंकवाद का पूरा उद्योग फल फूल रहा है और इस पर उसका एकाधिकार जैसा है। इमरान खान पूरी निर्लज्जता से इसकी वकालत कर रहे हैं। 

मैत्रा  ने कहा कि इमरान खान की पूरी भाषा विभाजन पैदा करने वाली है। वह अमीर बनाम गरीब, उत्तर बनाम दक्षिण, विकसित बनाम विकासशील और मुस्लिम बनाम अन्य धर्मावलंबी की विभाजनकारी भाषा का इस्तेमाल विश्व संस्था में कर रहे हैं। यह घृणा फैलाने वाला भाषण (हेट स्पीच) है। 

मैत्रा ने कश्मीरियों की हिमायत में बोलने के पाकिस्तान के दावे को खारिज करते हुए कहा कि भारतीय नागरिकों को किसी वकील की जरूरत नहीं है। खास ऐसे लोग उनकी ओर से नहीं बोल सकते जो आतंकवाद का उद्योग चला रहे हैं और घृणा की विचारधारा में विश्वास रखते हैं। 

उन्होंने कहा कि अब जब कि इमरान खान ने उग्रवादी संगठनों की उनके देश में गैरमौजूदगी की जांच के लिए संयुक्त राष्ट्र पर्यवेक्षक भेजने की पेशकश की है, अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को यह दवाब बनाना चाहिए कि वह अपनी बात पर कायम रहें। 

भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान की पेशकश के संदर्भ में  उसके नेताओं से अनेक सवाल पूछे। उन्होंने पूछा,  क्या यह सही नहीं है कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित 130 आतंकवादी और 25 आतंकवादी संगठन पाकिस्तान में पनाह लिए हुए हैं। क्या पाकिस्तान यह स्वीकार करेगा कि वह दुनिया में एकलौता ऐसा देश है जो आतंकवादी संगठनों अल कायदा और इस्लामिक स्टेट से जुड़े आतंकवादी  को पेंशन देता है। क्या पाकिस्तान इस बात पर सफाई देगा  कि न्यूयॉर्क स्थित पाकिस्तान के हबीब बैंक पर इसलिए ताला  पड़ गया था कि वह आतंकवादियों को धन मुहैया करता था और  उस पर भारी  जुर्माना हुआ था। क्या पाकिस्तान इस बात से इंकार कर सकता है कि आतंकवादियों को धन मुहैया कराये जाने से रोकने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था ने 27 में से 20 मानकों में पाकिस्तान को उल्लंघन करने वाला देश माना है। क्या इमरान खान इस बात से इंकार करेंगे कि वह ओसामा बिन लादेन की खुलकर हिमायत करते रहे हैं। 

भारतीय प्रधिनिधि मैत्रा ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने आतंकवाद और घृणा से भरे भाषण को मुख्यधारा बना दिया है और वह मानवाधिकारों का झूठा कार्ड खेल रहे हैं। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की दुर्दशा का ब्योरा देते हुए मैत्रा  ने कहा कि विभाजन  के समय पाकिस्तान में अल्पसंख्यों की आबादी 23 प्रतिशत थी जो अब घट कर तीन प्रतिशत हो गई है। ईसाइयों, सिखों, अहमदिया लोगों, शियाओं, पश्तूनों, सिंधियों और बलूचियों के खिलाफ ईशनिंदा कानून  के तहत जुल्म किया जा रहा है तथा योजनाबद्ध उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन का सिलसिला जारी है।

विदिशा मैत्रा ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का पूरा नाम  ‘इमरान खान नियाजी’ लेते हुए उन्हें बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में पाकिस्तान के  जुल्मी सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल एए खान नियाजी के कारनामों की याद दिलाई।  उन्होंने कहा कि संगठित नरसंहार किसी जीवंत लोकतंत्र में नहीं होते। अपनी याद्दाश्त ताजा करिये और वर्ष 1971 में पूर्व पाकिस्तान में जनरल नियाजी द्वारा किये गए नृशंस नरसंहार को मत भूलिए। 

भारतीय प्रतिनिधि ने इस संदर्भ में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए गए संबोधन की चर्चा की। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के संबंध में पाकिस्तान की जहरीली प्रतिक्रिया  को खारिज करते हुए मैत्रा  ने कहा कि यह एक कालबाह्य और अस्थाई प्रावधान  था जो राज्य के विकास और शेष भारत के साथ उसके एकीकरण में बाधक था। इस अनुच्छेद को हटाए जाने का विरोध इसलिए किया जा रहा है क्योंकि संघर्ष पर फलने-फूलने वाले लोग शांति की किरण को कभी  बर्दाश्त नहीं करते। 

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद फैलाने और घृणा का वातावरण पैदा  करने का मंसूबा बना रहा है जबकि भारत वहां विकास की गंगा बहाना चाहता है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत की जीवंत और समृद्ध लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा बनाया जा रहा है।  यह लोकतंत्र विविधता, सहिष्णुता और बहुलवाद की सदियों पुरानी विरासत पर आधारित है। 

नसीब सैनी

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