22 मई

सेना प्रमुख बिपिन रावत ने सेना में ‘सहायक’ व्यवस्था पर एक ऐसा फैसला लिया है जिसे सालों पहले ही ले लिया जाना चाहिए था. बिपिन रावत ने रिटायर्ड जनरलों के लिए सेना की तरफ से सहायक देने की सुविधा खत्म कर दी है. यह फैसला करते हुए उन्होंने कहा है कि सैनिकों का काम गोल्फ कोर्स में जनरलों का सामान लेकर उनके आसपास घूमना नहीं है बल्कि सेना का मुख्य उद्देश्य है युद्ध के लिए तैयार रहना.

सेना प्रमुख को अब एक कदम और आगे जाना चाहिए और वरिष्ठ अधिकारियों की ‘सहायता’ के लिए तैनात सहायकों की व्यवस्था खत्म कर देनी चाहिए. ऐसे तमाम सहायक सैनिक वरिष्ठ अधिकारियों के अधीन ज्यादातर उनके निजी कामकाज निपटाते हैं. अतीत में इस बारे में कई सैनिक शिकायत कर चुके हैं. कुछ तो ऐसे वीडियो भी सार्वजिनिक कर चुके हैं जिनमें वे अपने वरिष्ठ अधिकारों के लिए साग-सब्जी लाने से लेकर बच्चों को घुमाने और उन्हें स्कूल छोड़ने तक की जिम्मेदारी निभाते दिख रहे हैं     सहायक व्यवस्था पर सेना प्रमुख की राय केंद्र सरकार की राय से अलग है. केंद्र सरकार ने पिछले साल संसद में कहा था कि सहायकों के सैन्य कामकाज स्पष्ट रूप से परिभाषित हैं. सरकार ने यह भी दावा किया था कि सहायक अधिकारियों की मदद करने का अहम काम करते हैं. सरकार के रवैए के बावजूद इस मामले में सेना को नौसेना और वायुसेना से सीख लेने की जरूरत है जो अपने यहां सहायक व्यवस्था खत्म कर चुकी हैं. हालांकि सहायक व्यवस्था सेना के अलावा इस समय अर्धसैन्य बलों में भी मौजूद है

चौथा खंभा न्यूज़ .com / नसीब सैनी/अभिषेक मेहरा