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मणिपुर

बंद से मणिपुर में सामान्य जन-जीवन प्रभावित

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इम्फाल। मणिपुर में एक विद्रोही समूह द्वारा आहूत दिनभर की हड़ताल से राज्य में सामान्य जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। प्रतिबंधित भूमिगम संगठन, माओवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने उपभोक्ता मामलों, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री करम श्याम के इस्तीफे की मांग को लेकर यह बंद आहूत किया है। श्याम पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं।

मंत्री ने हालांकि भ्रष्टाचार के आरोपों से इनकार किया है और इसे निराधार बताया है। उन्होंने कहा, ‘‘अगर आरोप साबित होते हैं तो मैं इस्तीफा दे दूंगा।’’पुलिस ने कहा कि बंद का कोई असर नहीं है, क्योंकि सडक़ों पर वाहनों का आवागमन जारी है और दुकानें व व्यवसायिक प्रतिष्ठान सामान्य रूप से संचालित हो रहे हैं।

अधिकारियों ने बताया कि लंबी दूरी की बसें और ट्रक सडक़ों से नदारद हैं और पट्रोल पंप व ज्यादातर दुकानें बंद हैं।

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एससी-एसटी एक्ट में तुरंत होगी गिरफ्तारी, दो जजों की बेंच का फैसला निरस्त

—सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने अपने फैसले में माना था कि एससी-एसटी एक्ट में तुरंत गिरफ्तारी से कई बार बेकसूरों को जेल जाना पड़ता है

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नई दिल्ली,(नसीब सैनी)।

सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने एससी-एसटी एक्ट में गिरफ्तारी के प्रावधानों को हल्का करने के पिछले साल दिये गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मामले में दो जजों की बेंच के फैसले को निरस्त कर दिया है। पिछले साल दो जजों की बेंच ने अपने फैसले में माना था कि एससी-एसटी एक्ट में तुरंत गिरफ्तारी की व्यवस्था के चलते कई बार बेकसूर लोगों को जेल जाना पड़ता है। कोर्ट ने तुरंत गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी। इसके खिलाफ सरकार ने पुनर्विचार अर्जी दायर की थी। कोर्ट ने पिछले 18 सितम्बर को फैसला सुरक्षित रख लिया था।

पिछले साल दिए इस फैसले में कोर्ट ने माना था कि एससी-एसटी एक्ट में तुरंत गिरफ्तारी की व्यवस्था के चलते कई बार बेकसूर लोगों को जेल जाना पड़ता है। कोर्ट ने फैसले में तुरंत गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी। बाद में केंद्र सरकार ने रद्द किए गए प्रावधानों को दोबारा जोड़ दिया था।
पिछले 24 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट में सरकार की ओर से किये गए बदलाव के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार की ओर से किये गए संशोधन पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में एससी-एसटी एक्ट के मामलों में तुरंत गिरफ्तारी के प्रावधान का विरोध किया गया है। याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस एक्ट में तुरंत गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी लेकिन सरकार ने बदलाव कर रद्द किए गए प्रावधानों को फिर से जोड़ दिया।

नसीब सैनी

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तमिलनाडु सरकार को सुप्रीम कोर्ट से झटका

स्टरलाईट कॉपर कंपनी को दोबारा खोलने के एनजीटी के आदेश पर रोक लगाने से इनकार

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के तूतीकोरिन में स्टरलाईट कॉपर कंपनी को दोबारा खोलने के एनजीटी के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। एनजीटी ने पिछले 15 दिसंबर को तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया था कि वो तीन हफ्ते के अंदर स्टरलाईट कंपनी को चलाने के लिए सहमति यानि कंसेंट टू आपरेट दे और सारी बाधाएं दूर करे। एनजीटी ने अपने आदेश में कहा कि वो पर्यावरण संबंधी कानूनों का पालन करते हुए स्टरलाइट कंपनी को नुकसानदेह पदार्थों को नष्ट करने का अधिकार दे। एनजीटी ने फैक्ट्री के लिए बिजली आपूर्ति बहाल करने का आदेश दिया था। अदालत के इस फैसले से तमिलनाडु सरकार को तगड़ा झटका लगा है| 

एनजीटी के इस आदेश के खिलाफ तमिलनाडु सरकार ने पिछले 2 जनवरी को स्टरलाईट कॉपर कंपनी को दोबारा चलाने के एनजीटी के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। तमिलनाडु सरकार ने अपनी याचिका में कहा था कि एनजीटी का आदेश गलत है| उसे वेदांता की याचिका पर फैक्ट्री को दोबारा खोलने का आदेश नहीं देना चाहिए था।

उसके बाद पिछले 3 जनवरी को स्टरलाईट कंपनी को खोलने में तमिलनाडु सरकार की ओर से बाधा खड़ी करने के खिलाफ स्टरलाइट कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। 

पिछले 28 नवंबर को एनजीटी द्वारा मामले पर विचार करने के लिए गठित कमेटी ने एनजीटी को दिए रिपोर्ट में तमिलनाडु सरकार के स्टरलाईट को सील करने के फैसले को गलत करार दिया था। मेघालय के पूर्व चीफ जस्टिस तरुण अग्रवाल ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि स्टरलाईट युनिट को बंद करने के लिए न तो नोटिस दिया गया था और न ही सीलिंग से पहले कंपनी को जवाब देने का मौका दिया गया। इस रिपोर्ट पर एनजीटी ने तमिलनाडु सरकार के फैसले को प्राकृतिक सिद्धांत के खिलाफ बताया था।

सुनवाई के दौरान स्टरलाईट की ओर से वकील सीए सुंदरम ने कहा था कि हम पहले दिन से ही स्टरलाईट कॉपर प्लांट को खोलने की मांग कर रहे हैं क्योंकि बंद करने का फैसला गलत है। उन्होंने कहा था कि तमिलनाडु सरकार का प्लांट को बंद करने का फैसला पूरे तरीके से राजनीतिक फैसला था।

नसीब सैनी / अभिषेक मेहरा

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भारी भूस्खलन के चलते नौ लोगों की मौत, सात शव निकाले गए

इंफाल, 11 जुलाई। मणिपुर के तामेंगलांग में बुधवार की तड़के सुबह तीन से चार बजे के बीच हुए भारी भूस्खलन के चलते नौ लोगों की मौत हो गई है। बचाव व राहत कार्य चला रही एजेंसियों ने अब तक सात शवों को निकाल लिया है। जबकि अन्य दो मां-पुत्र के शवों की तलाश जारी है। इस हादसे में अन्य कई लोगों के घायल होने की जानकारी मिली है।
सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बुधवार की तड़के सुबह भारी बरसात की वजह से तामेंगलांग शहर के तीन अलग-अलग इलाकों में हुए भारी भूस्खलन के चलते घर में गहरी निंद में सो रहे कुल नौ लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में सबसे अधिक बच्चे शामिल हैं।
मिली जानकारी के अनुसार तामेंगलांग शहर के वार्ड नें. 4 के न्यू सालेम में एक ही परिवार के पांच बच्चों की मौत हो गई। वहीं जबकि शहर के तीन नंबर वार्ड के रामगाइलांग इलाके में मलवे में दबे एक बच्चा व उसके अभिभावक समेत दो शवों बरामद किया गया। दोनों की मौत घर पर पहाड़ का मलवा गिरने से दबकर हो गई। सूत्रों ने बताया है कि इस बीच शहर के दो नंबर वार्ड के नेईगाइलुवांग इलाके में घर पर पहाड़ी मलवा गिरने से मां-बेटे दब गए। सूत्रों ने बताया है कि दोनों की मलवा में दबकर मौत हो गई है। दोनों की तलाश जारी है। बचाव व राहत कार्य चला रही एजेंसियों ने कुल सात शवों को बरामद कर लिया है। खबर लिखे जाने तक दो नंबर वार्ड में मां-पुत्र की तलाश जारी थी।
तामेलांग जिला के उप उपायुक्त रविंदर सिंह ने बताया है कि जिला पुलिस और जिला प्रशासन युद्ध स्तर पर बचाव व राहत कार्य चलाया जा रहा है।
पुलिस सूत्रों ने बताया है कि भूस्खलन की घटना बुधवार की सुबह तीन से चार बजे के बीच हुई। भूस्खलन में 9 लोग मारे गए हैं। राहत व बचाव कार्य में अग्निशमन और स्थानीय पुलिस व स्थानीय लोग जुटे हुए हैं। उल्लेखनीय है कि राजधानी इंफाल से 162 किमी दूर तामेंगलांग जिला शहर स्थित है जहां पर भूस्खलन की घटना घटी है।  
चौथा खंभा न्यूज़ .com / नसीब सैनी/अभिषेक मेहरा

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