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कर्नाटका

बेटी की याद में बनवाया अस्पताल, जिस बीमारी से बेटी मरी, उसी का करते हैं मुफ्त इलाज

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हुबली (कर्नाटक), 27 अप्रैल

 

धारवाड़ जिले में जगदीश हिरेमठ एक ऐसे डाक्टर हैं जिन्होंने अपनी बेटी की याद में अस्पताल बनाकर उसी रोग का मुफ्त इलाज कर रहे हैं जिस बीमारी से उनकी बेटी की मृत्यु हुई थी। हिरेमठ की बेटी 5 वर्ष का आयु में स्वर्ग सिधार गई जो प्रोग्रेसिव न्यूरोलाजिकल डेमोलिशन जैसी बीमारी से ग्रसित थी।
जब इनकी बेटी मरी तब इनके पास पैसा और सामर्थ्य भी था, लेकिन सिर्फ इलाज न होने के चक्कर में उसकी मृत्यु हुई। इससे पहले जब बेटी को रात में ज्वर आता था तो वह एवाइड कर देते थे कि सुबह दिखाएंगे, लेकिन जब सुबह ज्वर उतर जाता था तो फिर छोड़ देते थे। यह घटना 23 वर्ष पहले की है। बेटी के मरने से डाक्टर को बहुत दुख हुआ और फिर उसने यह मन बना लिया कि अब इस बीमारी से किसी को मरने नहीं देंगे। इसकी शुरूआत उन्होंने हुबली के गोपुनकोप्पा के बगल में देवांगपेठ एक गली से किया जहां बुनकर समाज के लोग ज्यादा रहते थे।
पहले वहां एक छोटा अस्पताल बनाया और 10 बच्चों को का इलाज शुरू किया। इसके लिए उन्होंने 2 प्रशिक्षु भी रखे थे। बाद में बेटी की याद में ‘बाल पुनर्वास केंद्र’ के नाम से अस्पताल बनवाया। इसके अलावा इन्होंने स्कूल भी बनवाया जिसमें मंदबुद्धि, अपाहिज और बहरे लोग न सिर्फ इलाज करवाते हैं बल्कि उनकी पढ़ाई भी होती है। अस्पताल में 6 से 60 साल तक के लोगों का इलाज किया जाता है। अभी बच्चे और बड़े लोगों को मिलाकर कुल 90 लोग है। 23 साल से अब तक हिरेमठ 600 हजार बच्चों को पूरी तरह से ठीक कर दिए हैं।
अस्पताल में आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, गोवा, राजस्थान और बिहार के लोग भी अपने बच्चों का इलाज कराने यहां आते हैं। यहां के बच्चे ठीक होने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्पोर्ट्स में भी गए। कुछ लोग अपने काम-धाम शुरू करके गुजर-बसर कर रहे हैं। बहरहाल, हिरेमठ अपनी बच्ची की याद में कोप्पड़ जिले के एक 18 महीने की बच्ची को भी गोद लिया। तब उसके माता-पिता बच्ची को यहीं छोड़कर एक हफ्ते में आकर ले जाने की बात कही थी, लेकिन वे नहीं आए। इस बच्ची का नाम पूर्णिमा जबकि उनकी अपनी बेटी का नाम वीणा था। पूर्णिमा 12 साल तक रही और बाद में वह भी मर गई

चौथा खंभा न्यूज़ .com / नसीब सैनी/अभिषेक मेहरा

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कर्नाटक : 15 सीटों पर उपचुनाव की घोषणा के बाद आज से चुनाव आचार संहिता लागू

—इसी सम्बन्ध में रविवार को हुई बैठक में सिद्धारमैया, बीके हरिप्रसाद, डीके शिवकुमार और दिनेश गुंडू आदि कई नेता मौजूद थे

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बेंगलुरु,(नसीब सैनी)।

कर्नाटक के चुनाव आयुक्‍त संजीव कुमार द्वारा कर्नाटक विधानसभा की 15 सीटों पर उपचुनाव के लिए मतदान की तारीखों की घोषणा कर देने के पश्चात पूरे प्रदेश में सोमवार से चुनाव आचार संहिता लागू हो गई है। इससे पहले चुनाव आयोग ने अयोग्य विधायकों की याचिका लंबित रहने के मद्देनजर 21 अक्टूबर को निर्धारित उपचुनावों को 5  दिसम्बर तक टाल दिया था।

उपचुनाव के लिए उम्मीदवारों को 11 से 18 नवम्बर के बीच नामांकन दाखिल करना होगा। मतों की गिनती 9 दिसम्बर को होगी। अयोग्य ठहराए गए सभी विधायक इस उपचुनाव के लिए नामांकन नहीं दाखिल कर सकेंगे। इन उपचुनावों की घोषणा तब हुई है जब कांग्रेस और जेडीएस के 17 अयोग्य विधायकों ने सर्वोच्च न्यायालय से मांग की है कि जब तक स्पीकर रमेश कुमार के फैसले को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर फैसला नहीं हो जाता है, तब तक वे उपचुनाव को टाल दें।उधर, उपचुनाव की तैयारियों को लेकर कांग्रेस नेता तैयारी में जुट गए हैं।

इसी सम्बन्ध में रविवार को हुई बैठक में सिद्धारमैया, बीके हरिप्रसाद, डीके शिवकुमार और दिनेश गुंडू आदि कई नेता मौजूद थे। माना जा रहा है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी अगले दो दिनों में विधानसभा उपचुनावों के लिए शेष सात सीटों के लिए उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप देगी। उधर, इस बैठक से पहले पिछले आम चुनावों में हारने वाले बेलगावी जिले के दो भाजपा नेताओं राजू केज और अशोक पुजारी ने रविवार को पूर्व मंत्री डी के शिवकुमार से मुलाकात की जो सियासी गलियारों में चर्चा में रही।  

जिन 15 निर्वाचन क्षेत्रों में उपचुनाव होने हैं, उनमें अथनी, कागवाड, गोकाक, येल्लापुर, हिरेकरूर, रानीबेन्नूर, विजयनगर, चिक्कबल्लापुर, केआर पुरम, यशवंतपुर, महालक्ष्मी लेआउट, शिवाजीनगर, होसकोटे, केआर पेट और हुनसुर। मास्की और आरआर नगर निर्वाचन क्षेत्रों के चुनावों को रोक लगा दी गई है, क्योंकि उनके संबंध में अलग-अलग मामले उच्च न्यायालय में लंबित हैं।

नसीब सैनी

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लड़की पैदा होने पर पत्नी को दिया तीन तलाक,पुलिस ने पति को भेजा नोटिस

—महिला का आरोप है कि उसके पति ने कहा कि अब उससे कोई लेना-देना नहीं है

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बेंगलुरु,(नसीब सैनी)।

शहर के एक व्यवसायी ने अपनी पत्नी को केवल लड़कियों को जन्म देने का आरोप लगाते हुए तीन तलाक दे दिया। इस आशय की शिकायत नूर फातिमा नामक महिला ने आरटी नगर पुलिस से की है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर महिला के पति सैयद अफसर को मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत पूछताछ के लिए उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया है।

शिकायती पत्र में महिला ने आरोप लगाया है कि उसके पति सैयद अफसर ने उसके साथ झगड़ा किया और तीन बार तलाक कहकर उसे उसके माता-पिता के घर भेज दिया। कुछ दिनों बाद जब पत्नी ने घर वापस ले जाने के लिए कहा तब पति ने शादी ख़त्म करने की बात कही। महिला का आरोप है कि उसके पति ने कहा कि अब उससे कोई लेना-देना नहीं है। फातिमा ने अपनी शिकायत में पति पर बेटियों को भी परेशान करने का आरोप लगाया है।

नसीब सैनी

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सूचना आयोगों में खाली पड़े पदों पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें केंद्र और 9 राज्य : सुप्रीम कोर्ट

—पश्चिम बंगाल, आंध्रप्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात, केरल और कर्नाटक सरकार को निर्देश

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नई दिल्ली,(नसीब सैनी)।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग और राज्य सूचना आयोगों में खाली पड़े पदों पर नियुक्ति के लिए दिशा-निर्देश जारी करने की मांग करनेवाली याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और 9 राज्य सरकारों को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

याचिका आरटीआई कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज ने दायर किया है। याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश के बावजूद केंद्रीय सूचना आयोग और राज्य सूचना आयोगों में खाली पड़े पदों को नहीं भरा गया है। अंजलि भारद्वाज की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों ने नियुक्ति के लिए उम्मीदवारों का चयन भी नहीं किया है।
दरअसल,  दिसम्बर 2018 में केंद्र सरकार ने कहा था कि केंद्रीय सूचना आयोग में खाली पद जल्द ही भर लिए जाएंगे। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि उसे केंद्रीय सूचना आयुक्त के लिए 65 और सूचना आयुक्तों के लिए 280 आवेदन मिले हैं। योग्य नामों का चयन कर लिया गया है।

केंद्र सरकार ने कहा कि इस बारे में जल्द ही अंतिम निर्णय ले लिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा कि वो आवेदकों के नाम, सेलेक्शन का पैमाना और सर्च कमेटी का ब्यौरा कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग की वेबसाइट पर डालें।
पहले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार, पश्चिम बंगाल, आंध्रप्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात, केरल और कर्नाटक सरकार को निर्देश दिया था कि वे केंद्रीय और राज्य सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के लिए उठाए गए कदम पर प्रगति रिपोर्ट दाखिल करें।

सूचना का अधिकार कानून के तहत सूचना आयोग पाने संबंधी मामलों के लिए सबसे बड़ा और आखिरी संस्थान है। हालांकि सूचना आयोग के फैसले को हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। सबसे पहले आवेदक सरकारी विभाग के लोक सूचना अधिकारी के पास आवेदन करता है। अगर 30 दिनों में वहां से जवाब नही मिलता है तो आवेदक प्रथम अपीलीय अधिकारी के पास अपना आवेदन भेजता है।

नसीब सैनी

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