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मध्य प्रदेश

मध्यप्रदेश के छह जिलों में हुआ शत-प्रतिशत विद्युतीकरण, 13 लाख से अधिक घर हुए रोशन

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भोपाल, 24 अप्रैल
मध्यप्रदेश में सहज बिजली हर घर सौभाग्य योजना में अब तक 13 लाख 21 हजार 188 घरों में बिजली कनेक्शन देकर रोशनी पहुंचाई जा चुकी है। शेष बचे घरों में आगामी अक्टूबर माह तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य है। मध्यप्रदेश में केन्द्र और राज्य सरकार की प्रभावी पहल पर ऐसे सभी घरों में बिजली कनेक्शन उपलब्ध करवाए जा रहे हैं, जो वर्षों से अंधेरे में डूबे थे। इसके लिए क्रियान्वित की जा रही सहज बिजली हर घर “सौभाग्य योजना” के बेहतर परिणाम सामने आए हैं।
प्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कंपनी द्वारा समुचित प्रयास कर अंधेरे में डूबे घरों को बिजली कनेक्शन सहजता और सरलता से उपलब्ध करवाकर रोशन किया जा रहा हैं। राज्य के छह जिलों आगर-मालवा, मंदसौर, इंदौर, खण्डवा, नीमच और देवास में शत-प्रतिशत विद्युतीकरण का लक्ष्य पूरा कर सभी घरों को रोशन कर दिया गया है।
सौभाग्य योजना के क्रियान्वयन में तीनों विद्युत वितरण कंपनी और उनके क्षेत्रीय व स्थानीय अभियंता और अन्य अमला पूरी सक्रियता से कार्य कर रहे हैं, ताकि इस योजना का लाभ हर बिजली विहीन परिवार तक पहुंच सके। पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को क्षेत्र के 20 जिलों के 15 लाख 07 हजार 20 कनेक्शन विहीन घरों को बिजली से जोड़ने का लक्ष्य दिया गया है।
कंपनी ने अब तक 04 लाख 38 हजार 896 घरों को बिजली कनेक्शन से जोड़ा है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने क्षेत्र के 16 जिलों के 18 लाख 55 हजार 325 बिजली कनेक्शन विहीन घरों के विद्युतीकरण के लक्ष्य के विरुद्ध 5 लाख 71 हजार 704 घरों को रोशन किया है। इसी प्रकार पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा क्षेत्र के 15 जिलों में 7 लाख 16 हजार 851 बिजली कनेक्शन विहीन घरों को बिजली सुविधा मुहैया करवाने के लक्ष्य के विरुद्ध 03 लाख 10 हजार 588 घरों में बिजली कनेक्शन उपलब्ध करवा दिए गए हैं।
सौभाग्य योजना में 60 प्रतिशत राशि केन्द्र से अनुदान के रूप में उपलब्ध करवाई जा रही है। शेष 40 प्रतिशत राशि का प्रबंध राज्य शासन एवं तीनों विद्युत वितरण कंपनी द्वारा किया जा रहा है। योजना में आर्थिक, सामाजिक रूप से पिछड़े हितग्राहियों को नि:शुल्क कनेक्शन दिए जा रहे हैं। अन्य हितग्राहियों से 500 रुपये की राशि 10 किश्तों में मासिक विद्युत बिल के साथ ली जाएगी।

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हनीट्रेप मामले में इंदौर हाईकोर्ट ने राज्य शासन से मांगा जवाब

—इस याचिका में कहा गया था कि राज्य शासन ने मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन तो कर दिया है, लेकिन बार-बार एसआटी में अधिकारियों को बदला जा रहा है

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भोपाल/इंदौर,(नसीब सैनी)।

मध्यप्रदेश का  हाई-प्रोफाइल हनीट्रेप केस इन दिनों सुर्खियों में है । आये दिन इस केस के अगल- अलग पहलू सामने आ रहे हैं । लेकिन अभी तक कोई पुख्ता कार्यवाई इस केस को लेकर नहीं हो सकी है । इस मामले की जांच में जुटे कई आला अधिकारी का ट्रान्सफर कर दिया जा रहा है । मध्यप्रदेश शासन द्वारा बीते 9 दिनों में इस केस की जांच में जुटे तीन एसआईटी प्रमुखों को बदला जा चुका है । एसआईटी में बार-बार हो रहे  बदलाव  को लेकर अब इंदौर हाईकोर्ट ने राज्य शासन से जवाब मांगा है । इधर, स्पेशल डीजी राजेंद्र कुमार ने गुरुवार को एसआईटी का कार्यभार संभाला और अधिकारियों से अबतक की सारी अपडेट ली।

इंदौर हाईकोर्ट ने बार- बार एसआईटी में बदलाव करने पर नाराजगी जताई है और इस पर सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि सरकार बंद लिफाफे में जवाब दे कि आखिर क्यों तीन बार एसआईटी प्रमुख को बदलने की जरुरत पड़ी।  इंदौर निवासी शेखर चौधरी नामक व्यक्ति द्वारा यह याचिका दायर की गई है, जिस पर आज शुक्रवार को सुनवाई हुई। याचिका में मामले की जांच सीबीआई या कोर्ट की निगरानी में करवाने की मांग की गई है।  दरअसल,  बीते गुरुवार को शेखर चौधरी ने अधिवक्ता धर्मेन्द्र चेलावत के माध्यम से हनीट्रैप को लेकर इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी ।

इस याचिका में कहा गया था  कि राज्य शासन ने मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन तो कर दिया है, लेकिन बार-बार एसआटी में अधिकारियों को बदला जा रहा है। सरकार इस मामले की जांच की दिशा भटकाने का प्रयास भी कर रही है। बार-बार जांच अधिकारी बदले जा रहे हैं। जैसे ही जांच आगे बढ़ती है, सरकार एसआईटी के अधिकारियों को बदल देती है। ऐसी स्थिति में जांच में गड़बड़ी की आशंका है। जिस पर आज शुक्रवार को सुनवाई हुई और कोर्ट ने राज्य सरकार से बंद लिफाफे में जवाब मांगा।

बता दें कि कुछ दिन पहले आईपीएस संजीव शमी को एसआईटी का प्रमुख बनाया था, लेकिन बाद में बदल दिया गया। जो भी अधिकारी जांच कर रहे हैं, वे राज्य शासन के अधीन हैं, लेकिन बार- बार हो रहे बदलाव से जांच प्रभावित होने की आशंका है इसलिए यह जांच सीबीआई या किसी केंद्रीय एजेंसी को सौंपी जाए और हाईकोर्ट दिन-प्रतिदिन इसकी निगरानी करे।

नसीब सैनी

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हनीट्रैप मामले की जांच के लिए बनी एसआईटी के चीफ तीसरी बार बदले

—राज्य शासन ने देर रात पुलिस विभाग में किया बड़ा फेरबदल

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भोपाल,(नसीब सैनी)।

राज्य शासन ने मंगलवार रात पुलिस विभाग में बड़ी सर्जरी की है। इसके साथ ही बहुचर्चित हनी ट्रैप मामले की जांच के लिए 9 दिन पहले बनी एसआईटी में भी तीसरी बार बदलाव कर दिया गया है। हनी ट्रैप केस की जांच के लिए राज्य सरकार ने अब डीजी स्तर के सीनियर आईपीएस अधिकारी राजेंद्र कुमार को एसआईटी का जिम्मा सौंपा है। राजेंद्र कुमार 1985 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उनसे पहले संजीव शमी इसके प्रमुख थे, जिन्हें बदलकर पुलिस भर्ती एवं एंटी नक्सल ऑपरेशन में भेजा गया है। 

मंगलवार की देर शाम मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मुख्य सचिव एसआर मोहंती और डीजीपी वीके सिंह से इस बारे में चर्चा करने के बाद एसआईटी को बदला है। राजेंद्र कुमार के साथ एसआईटी टीम में एडीजी सायबर क्राइम मिलिंद कानस्कर और एसएसपी इंदौर रुचि वर्धन मिश्र रहेंगी। टीम की कमान संभालने वाले राजेंद्र कुमार को यह अधिकार दिए गए हैं, वे अगर आवश्यक होगा तो अन्य अधिकारियों की मदद ले सकेंगे। डीजीपी को एसआईटी को आवश्यक सहयोग देने के आदेश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इसके साथ ही कुछ और सीनियर आईपीएस अधिकारियों के कामकाज में परिवर्तन किया है। उन्होंने पुलिस अफसरों के विवादों के बीच बड़ी सर्जरी में तीन वर्ष से ज्यादा एक स्थान पर पदस्थ वरिष्ठ अफसरों को भी बदल दिया है। स्पेशल डीजी सायबर सेल व एसटीएफ प्रमुख पुरुषोत्तम शर्मा को भी डीजीपी से विवाद के चलते हटाया गया है। उन्हें संचालक लोक अभियोजन का जिम्मा दिया गया है। वे राजेंद्र कुमार की जगह पर जाएंगे। बड़ी सर्जरी में राज्य सरकार ने लंबे समय तक परिवहन आयुक्त रहे शैलेंद्र श्रीवास्तव को पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन की जवाबदारी दी है। 

इसके अलावा केएन तिवारी स्पेशल डीजी,ईओडब्ल्यू को स्पेशल डीजी, चयन एवं भर्ती, पुरुषोत्तम शर्मा स्पेशल डीजी, सायबर एवं एसटीएफ को संचालक, लोक अभियोजन, एडीजी, योजना पवन जैन को एडीजी लोकायुक्त संगठन, एडीजी, इंटेलीजेंस-कैलाश मकवाना को एडीजी प्रशासन, एडीजी आरएपीटीसी-मिलिंद कानस्कर को एडीजी सायबर, एडीजी एंटी नक्सल ऑपरेशन-जीपी सिंह को एडीजी एससीआरबी, एडीजी लोकायुक्त संगठन-सुशोभन बनर्जी को प्रभारी डीजी ईओडब्ल्यू, एडीजी प्रशासन-एसडब्ल्यू नकवी को एडीजी इंटेलीजेंस, एडीजी, लोकायुक्त संगठन-वी मधुकुमार को आयुक्त परिवहन, एडीजी सायबर-राजेश गुप्ता को एडीजी एटीएस, एडीजी एससीआरबी-आदर्श कटियार को एडीजी व आईजी भोपाल, एडीजी एटीएस-संजीव शमी को एडीजी चयन एवं भर्ती, आईजी भोपाल-योगेश देशमुख को आईजी प्रशासन की कमान सौंपी गई है। 

जिन अधिकारियों को प्रमोशन मिला है उनमें आईजी लॉ एंड ऑर्डर-अनंत कुमार सिंह को एडीजी योजना, आईजी होशंगाबाद-आशुतोष राय को एडीजी व आईजी होशंगाबाद, आईजी ग्वालियर-राजाबाबू सिंह को एडीजी व आईजी ग्वालियर, आईजी चंबल-डीपी गुप्ता को एडीजी व आईजी चंबल और शैलेष सिंह ओएसडी मुंबई पदस्थ किया गया है।

नसीब सैनी

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हनीट्रेप की आरोपितों को 14 तक न्यायिक हिरासत में भेजा जेल

—एसआईटी को लगातार मिल रही गुमनाम शिकायतें

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इंदौर,(नसीब सैनी)।

बहुचर्चित हनीट्रेप मामले में पुलिस रिमांड पर चल रही तीन आरोपी महिलाओं को सोमवार को भोपाल की एक अदालत में पेश किया गया। जहां से उन्हें एक दिन की ट्रांजिट रिमांड पर भेजने के बाद मंगलवार की सुबह इन तीनों महिलाओं सहित पांचों आरोपित महिलाओं को इंदौर की अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। 

हनीट्रैप मामले में आरोपित श्वेता विजय जैन, श्वेता स्वपनिल जैन, बरखा अमित सोनी, आरती दयाल उर्फ ज्योत्सना और मोनिका यादव को पलासिया पुलिस ने मंगलवार सुबह जिला कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने पुलिस रिमांड नहीं देते हुए आरोपित महिलाओं को न्यायिक हिरासत में 14 दिनों के लिए जेल भेज दिया है। उधर, श्वेता के पति का आरोप है कि उसकी पत्नी को फंसाया जा रहा है। जमानत मिलने के बाद हम मीडिया के सामने आकर अपनी बात रखेंगे। भोपाल में पिछले तीन दिनों से पुलिस रिमांड पर गई मेरी पत्नी व अन्य के साथ मारपीट भी की गई, जिसकी जांच कराई जाना चाहिए। पत्नी के हाथ में चोट भी लगी है।

आरती और रूपा की तलाश  नगर निगम के इंजीनियर हरभजन सिंह का वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने के मामले में आरती की एक साथी रूपा की भूमिका भी सामने आई थी। होटल इन्फिनिटी में आरती, मोनिका के साथ ही रूपा भी रुकी थी। पूछताछ में पता चला कि रूपा ने भी वीडियो बनाने में आरती का साथ दिया था। रूपा भी आरती की तरह छतरपुर की निवासी है और भोपाल में रह रही थी। बाद में आरती ने बताया, रूपा दिल्ली के ठेके देखती है। एसआइटी ने छानबीन की तो रूपा के साथ प्रियंका का नाम भी आया। प्रियंका और रूपा के बारे में पता चला कि भोपाल के अफसर व नेताओं के वीडियो बनाकर वे भी ब्लैैकमेल कर चुकी है। यह ब्लैकमेलिंंग का तीसरा गिरोह हो सकता है।

एसआईटी को लगातार मिल रही गुमनाम शिकायतें
हाईप्रोफाइल हनीट्रैप मामले में आए दिन नए खुलासे हो रहे हैं। वहीं अब इस मामले में एसआईटी के पास कई गुमनाम शिकायतें भी पहुंचने लगी हैं। बताया जा रहा है कि इन शिकायतों में कई नौकरशाहों (ब्यूरोक्रेट्स) के नाम भी शामिल हैं। पुलिस मुख्यालय और सीएम सचिवालय तक यह गुमनाम शिकायतें सबूतों के साथ पहुंच रही हैं। एक ईमेल आईडी भी जारी की थी इस ईमेल आईडी के जरिए भी एसआईटी के पास शिकायतें पहुंचना शुरू हो गई हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही एसआईटी इन शिकायतों पर भी एक्शन लेगी भले ही यह नेता और अफसर खुलकर इस मामले में सामने नहीं आ रहे हो, लेकिन अब एक के बाद एक पुलिस मुख्यालय के पास गुमनाम शिकायतें पहुंच रही हैं। इन शिकायतों में सबूतों के साथ कुछ नौकरशाहों  का पूरा चिठठा दिया गया है। कहा जा रहा है कि अब तक पुलिस मुख्यालय के पास ऐसी 20 से ज्यादा शिकायतें पहुंची हैं। जिसमें श्वेता विजय जैन, श्वेता स्वप्निल जैन, आरती दयाल और बरखा भटनागर के संबंध राज नेताओं अफसरों और हाई प्रोफाइल लोगों से होने के सबूत भी शामिल हैं। जल्द ही एसआईटी इन शिकायतों के आधार पर भी अपनी जांच आगे बढ़ाएगी और इन शिकायतों पर एक्शन लिया गया, तो शायद बहुत जल्द ही कुछ नौकरशाहों  और राजनेताओं के नामों का खुलासा भी हो सकता है।

सांसें हो रही उपर-नीचे
मध्यप्रदेश के हनीट्रैप मामले से राजनीतिक लोगों की भी सांसें ऊपर-नीचे हो रही है, क्योंकि इसमें पक्ष-विपक्ष दोनों के ही नेता फंस सकते हैं। इनके अलावा कई आईएएस-आईपीएस समेत नौकरशाहों की सांसें उपर-नीचे हो रही है । उनके भी लिप्त होने की जांच चल रही है। इस बीच अश्लील वीडियो बनाकर ब्लेकमेल करने वाली श्वेता विजय जैन ने पूछताछ में कई खुलासे किए हैं। उसके साथ संबंध रखने वाले कई नामों का भी खुलासा किया गया है। इनमें नेता, अफसर और व्यापारी भी शामिल हैं। सूत्र बताते हैं कि पुलिस की विशेष टीम की पूछताछ में श्वेता विजय जैन, बरखा सोनी और आरती अहिरवार ने कई लोगों के नाम बताए हैं। इन तीनों के पास से बड़ी संख्या में वीडियो क्लिपिंग भी बरामद हुई है । ये तीनों महिलाएं इन्हीं वीडियो के बल पर नेता और अफसरों को ब्लैक मेल कर पैसा ऐंठ रही थीं और मनमाफिक तबादले और टेंडर अपने परिचितों को दिलवा रही थी।

नसीब सैनी

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