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हेल्थ

योग शिविर में बताया गया योगासनों का लाभ और सावधानियां

भिवानी, 01 जून।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मद्देनजर स्थानीय भीम स्टेडियम में उपायुक्त अंशज सिंह के मार्गदर्शन में शुक्रवार एक जून से तीन जून तक सरकारी व निजी स्कूलों के खेल प्रशिक्षकों के लिए तीन दिवसीय योगाभ्यास शिविर आरंभ हुआ। शिविर में आयुष विभाग के योग प्रशिक्षक चिकित्सकों व पतंजलि योग समिति के योगाचार्यों ने योगासन व प्राणायाम करवाएं तथा योगासनों से होने वाले लाभ व योगिक क्रियाओं के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में बताया।
योग शिविर जिला आयुष अधिकारी डॉ देवेन्द्र शर्मा की देखरेख में आयोजित हुआ। शिविर में पतंजलि के गजानंद शास्त्री, विजय जावला, योगी राजनाथ, सुरेन्द्र बडेसरा, संदीप योगी व योगी राजपाल ने योगाभ्यास व प्राणायाम करवाया। उन्होंने इस दौरान योगासन व प्राणायाम से होने वाले स्वास्थ्य लाभ के बारे में जानकारी दी। योगाचार्यों ने कहा कि प्रतिदिन योगासन करने से हम स्वस्थ एवं निरोगी रह सकते हैं। वर्तमान में बीमारियों से दूर रहने का एक मात्र उपाए नियमित रूप से योगासन करना है, जिस पर किसी प्रकार का खर्च नहीं होता। शिविर में योगाभ्यास करने वालों ने समाज व राष्ट्र के प्रति समर्पित रहने की शपथ भी ली।

शिविर मेें बताए आसन के लाभ व सावधानियां
1. ताड़ासन: इस आसन के अभ्यास से शरीर सुदृढ़ होता है। यह मेरूदण्ड से संबंधित नाड़ियों के रक्त संचय को ठीक करने में भी सहायक है। यह आसन एक निश्चित उम्र तक लंबाई बढ़ाने में सहायक है लेकिन जिन्हे हृदय संबंधी व वैरिकोज वेंस संबंधी समस्याएं है, उनको यह आसन नहीं करना चाहिए।
2. वृक्षासन: यह आसन तंत्रिका से संबंधित स्नायुओं के समन्वय को बेहतर बनाता है, शरीर को संतुलित बनाता है और सहनशीलता एवं जागरुकता बढ़ाता है। पैरों की मांसपेशियों को गठीला बनाता है और लिगामेंट्स को भी सृदृढ़ करता है लेकिन आर्थराइटिस, चक्कर आने और मोटापा होने पर इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।
3. पादहस्तासन: यह मेरूदंड को लचीला बनाता है, जठराग्नि बढ़ाता है, कब्ज तथा मासिक धर्म से संबंधित समस्याओं से बचाता है। परंतु हृदय अथवा पीठ से संबंधित समस्याओं, उदर शोथ, हर्निया एवं अल्सर, उच्च मायोपिया, चक्कर संबंधित रोगों तथा गर्भावस्था के समय इस अभ्यास को नहीं करना चाहिए। कशेरूका संबंधी तथा डिस्क विकार वाले लोगों को भी यह अभ्यास नहीं करना चाहिए।
4. अर्ध चक्रासन: यह आसन ग्रीवा की मांसपेसियों को मजबूत बनाता है तथा श्वस्न क्षमता बढ़ाता है। सर्वाइकल स्पॉन्डिलाईटिस में यह लाभकारी है। परंतु यदि आपको चक्कर आता हो तो यह आसन नहीं करना चाहिए। उच्च रक्तचाप वाले व्यक्ति अभ्यास करते समय पीछे ही ओर झुकें।
5. त्रिकोणासन: यह मेरूदंड को लचीला बनाता है तथा फेफड़ों की कार्य क्षमता बढ़ाता है, परंतु स्लिप्ड डिस्क, साईटिका एवं उदर में किसी प्रकार की सर्जरी होने के बाद इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।
6. भद्रासन- यह घुटनों का दर्द कम करने में मदद करता है। महिलाओं को मासिक धर्म के समय अक्सर होने वाले पेट दर्द से मुक्ति प्रदान करता है लेकिन पुरानी तथा अत्यधिक पीड़ा देने वाले ऑथराईटिस और साईटिका से ग्रसित व्यक्ति को इस अभ्यास से बचना चाहिए।
7. वज्रासन: यह आसन पाचन बढ़ाने में सहायक होता है लेकिन बवासीर के मरीजों को आसन से परहेज करना चाहिए। घुटने दर्द और ऐड़ियों के चोट से ग्रसित व्यक्तियों को इस आसन से परहेज करना चाहिए।
8. अर्ध उष्ट्रासन: इससे कब्ज एवं पीठ दर्द से मुक्ति मिलती है और सिर एवं हृदय क्षेत्र में रक्त संचार बढ़ाता है लेकिन हरनिया एवं उदर संबंधी व्याधि तथा ऑथराईटिस, चक्कर आना, स्त्रियों के लिए गर्भावस्था में इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।
9. उष्ट्रासन: यह दृष्टि दोष में अत्यंत लाभदायक है। यह उदर और नितंब चर्बी को कम करने में सहायक है। परंतु उच्च रक्तचाप, हृदय रोगी व हरनिया के मरीजों को यह आसन नहीं करना चाहिए।
10. शशांकासन: यह तनाव, क्रोध आदि को कम करने में सहायक है परंतु अधिक पीठ दर्द में इस अभ्यास को नहीं करना चाहिए। उच्च रक्तचाप वाले व्यक्ति को इस आसन से परहेज करना चाहिए।
11. उत्तान मंडूकासन: यह आसन पीठ दर्द और ग्रीवा की तकलीफ से छुटकारा दिलाता है और फेफड़ों की कार्यक्षमता को बढ़ाता है, लेकिन घुटनों के जोड़ों में दर्द से पीड़ित व्यक्तियों को इस आसन से परहेज करना चाहिए।
12. वक्रासन: इससे कब्ज एवं अग्रिमाद्य को दूर करने में सहायता प्रदान करता है। पैक्रियाज की शक्ति बढ़ाता है और मधुमेह के प्रबंधन में सहायता करता है, लेकिन उदर की सर्जरी के बाद और मासिक धर्म के दिनों में इस आसन को नहीं करना चाहिए।
13. मक्रासन: यह पीठ संबंधी समस्याओं को दूर करने में उपयोगी है, लेकिन निम्र रक्तचाप, ह्रदय संबंधी समस्याओं से ग्रसित और गर्भावस्था में यह अभ्यास नहीं करना चाहिए।
14. भुजंगासन: तनाव को दूर करने के लिए यह आसन सर्वश्रेष्ठ है। यह उदर के अतिरिक्त वसा को घटाता है तथा कब्जी को दूर करता है लेकिन अल्सर व हर्निया से पीड़ित को यह आसन नहीं करना चाहिए।
15. शलभासन: यह उदर के अंगों को लाभ पहुंचाता है तथा पाचन में सहायता करता है। साईटिका एवं पीठ के निचले हिस्से के पीड़ा निवारण में सहायता प्रदान करता है लेकिन उच्च रक्तचाप, पेप्टिक अल्सर व हर्निया रोगी को यह आसन नहीं करना चाहिए।
16. सेतूबंध आसन: उदर के अंगो में कसावट लाता है और पाचन क्षमता बढ़ाने के साथ कब्ज से छुटकारा दिलाता है, परंतु अल्सर, हर्निया से ग्रसित और अग्रिम अवस्था वाली गर्भवती महिलाओं को यह आसन नहीं करना चाहिए।
17. उत्तानपाद आसन: यह आसन नाभिकेंद्र में संतुलन स्थापित करता है। यह आसन चिंताओं व घबराहट से उभरने में सहायक है लेकिन गहरे तनाव पीड़ित व्यक्ति को यह आसन बिना श्वास रोके धीरे-धीरे करना चाहिए।
18. अर्ध हलासन: यह आसन बदहजमी, कब्ज, मधुमेह, बवासीर और गले संबंधी समस्याओं से छुटकारा दिलाने में सहायक है लेकिन उदर में जख्म होने, हर्निया आदि से पीड़ित व्यक्तियों को यह आसन नहीं करना चाहिए।
19. पवनमुक्तासन: यह कब्ज और वात से राहत, उदर को कम करना और पाचन क्रिया में सहायक है लेकिन उदर संबंधी व्याधि, हर्निया, साईटिका या तीव्र पीठ दर्द तथा गर्भावस्था के समय इसको नहीं करना चाहिए।
20. कपाल भाति: कपाल को शुद्ध करना, कफ विकारों को दूर करना, जुकाम, श्वास नली, अस्थमा से निजात दिलाकर पूरे शरीर की कायाकल्प करता है। चेहरे को सुकोमल व दीप्तिमान बनाए रखता है। शिविर में अनुलोम-विलोम से होने वाले लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

चौथा खंभा न्यूज़ .com / नसीब सैनी/अभिषेक मेहरा

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अमेरिका में फ़्लू का क़हर, इस साल 1300 मौतें

—शुक्रवार को सेंटर फ़ार डिजीज कंटोल एंड प्रिवेन्शन विभाग ने एक वक्तव्य में कहा है कि फ़्लू रोग के दिन प्रतिदिन नए मामले आ रहे है

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लॉस एंजेल्स,(नसीब सैनी)।

अमेरिका में पूर्वी छोर से पश्चिमी छोर तक हज़ारों लोग फ़्लू रोग के शिकार हो रहे हैं। इस साल फ़्लू रोग के 26 लाख लोग प्रभावित हुए हैं, जिनमें 1300 लोगों की मौतें हो चुकी हैं। अमेरिका के अल्बामा राज्य में सर्वाधिक फ़्लू रोग की शिकायतें आई है। इनके अलावा अमेरिका के सीमावर्ती राज्यों में भी यह रोग ज़ोर पकड़ रहा है। फ़्लू के बचाव के लिए सरकार ने सभी चिकित्सालयों में निशुल्क टीकाकरण का बंदोबस्त किया है। 

शुक्रवार को सेंटर फ़ार डिजीज कंटोल एंड प्रिवेन्शन विभाग ने एक वक्तव्य में कहा है कि फ़्लू रोग के दिन प्रतिदिन नए मामले आ रहे है। अभी तक  साल भर में जो 26 लाख लोग फ़्लू के शिकार हुए हैं, उनमें से 23 हज़ार लोगों को अस्पताल भर्ती कराना पड़ा। इनमें से 1300 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें दस बच्चे भी हैं। विशेषज्ञों का मत है कि इस बार फ़्लू रोग की जल्दी और तेज़ी से शुरूआत हुई। यह विषाणु अभी तक मौसम में डेरा जमाए हुए है, जो हैरान करने वाला है। 

वक्तव्य में कहा गया है कि प्रायः इनफ़्लुएंज़ा-ए वायरस से फ़्लू की शिकायतें होती हैं। इसके विपरीत इनफ्लूएंजा-बी वायरस बच्चों को, ख़ास कर एक साल से नीचे के बच्चों  को  ही शिकार बनाता है। उनका  कहना था कि इन बच्चों को बचाव के लिए फ़्लू शाट नहीं दिया जाता। दूसरे अस्पतालों में चार वर्ष से नीचे की आयु के बच्चों का विशेष ध्यान रखा जाता है।

नसीब सैनी

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प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- घुटकर क्यों मरें लोग, विस्फोटक से उड़ा दीजिए शहर

-दिल्ली, पंजाब, हरियाणा की सरकार को सत्ता का हक नहीं : सुप्रीम कोर्ट

-कहा, मतभेद भुला कर काम करें केंद्र व दिल्ली सरकार

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नई दिल्ली,(नसीब सैनी)।

दिल्ली में प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि लोग घुटकर क्यों मरें? विस्फोटक के 15 बैग से शहर उड़ा दीजिए। लोगों की ज़िंदगी सस्ती हो गई है। जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि दिल्ली, पंजाब, हरियाणा सरकार को सत्ता का हक नहीं है। केंद्र और दिल्ली सरकार मतभेद भुला कर काम करें। कोर्ट ने कहा कि 10 दिन में एयर प्यूरीफायर टावर पर योजना बनाएं।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। सीपीसीबी को ये बताना है कि दिल्ली में जो फैक्ट्रियां चल रही हैं उससे पर्यावरण पर कितना असर पड़ रहा है। साथ ही ये भी बताना है कि दिल्ली में जो फैक्ट्री चल रही है वो किस तरह की है।

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि आप मैजर्स को लागू नहीं कर पा रहे हो तो इसका मतलब ये तो नहीं कि दिल्ली-एनसीआर के लोगों को प्रदूषण से मरने और केंसर से तबाह होने दिया जाए। विकास का अर्थ ये तो नहीं कि आप देश की राजधानी में प्रदूषण बढ़ा दें।

‘आप लोगों को मरने के लिए नहीं छोड़ सकते’

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के चीफ सेकेट्री को चेतावनी देते हुए कहा कि हम सभी तंत्रों की जवाबदेही तय करेंगे। आप इस तरह लोगों को मरने के लिए नहीं छोड़ सकते। कोर्ट ने कहा कि ये क्या युद्धस्तर पर काम हो रहा है? राज्य सरकारें केंद्र पर छोड़ रही हैं और केंद्र राज्य पर। दिल्ली में हर रोज आप दरवाजे से इस बात का मॉनिटर करते हैं कि दिल्ली में प्रदूषण का स्तर क्या है? राज्य सरकारें आपस में बातचीत नहीं कर रही हैं।

कोर्ट की टिप्पणी, पानी पर चल रहा ‘ब्लेम गेम’

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में पानी को लेकर राजनीति चल रही है। यहां पानी अच्छा है, वहां अच्छा है। ये किस तरह की राजनीति हो रही है। पानी को लेकर ‘ब्लेम गेम’ चल रहा है। दिल्ली के लोग तबाह हो रहे हैं। ये चौंकाने वाली बात है। दिल्ली हरियाणा को ब्लेम करेगी, हरियाणा पंजाब को, ऐसे ही चलता रहेगा क्या?


दिल्ली में स्थिति नरक से खराब : कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को कहा कि ब्लेम गेम अब बंद होना चहिए। कोर्ट ने कहा कि हम चाहते हैं कि दिल्ली साफ हो। दिल्ली सरकार लोगों के प्रति जवाबदेह है। हम पूछेंगे कि जो पैसा पानी की सफाई को लेकर आता है चाहे वह गंगा के लिए हो या यमुना के लिए, वो पैसा कहां जाता है? सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में कचरे पर कहा कि दिल्ली में स्थिति नरक से भी खराब है।


प्रदूषण पर न हो राजनीति : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव से कहा कि प्रदूषण के मसले को लेकर राजनीति न हो। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार को कहा कि दिल्ली में स्मॉग टावर एयर प्यूरीफायर लगाने को लेकर जवाब दाखिल करे। कोर्ट ने कहा कि हमारे आदेश के बाद भी स्थिति खराब होते जा रही है ये बेहद चौकानें वाला है।

सुनवाई के दौरान उप्र के मुख्य सचिव ने कोर्ट को बताया कि पराली जलाने को लेकर एक हजार दर्ज किए गए हैं और क़रीब एक करोड़ का जुर्माना लगाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने उप्र सरकार से कहा कि पहले सकारात्मक कदम उठाएं उसके बाद दंडात्मक। सेटलाइट इमेज यह बता रही है कि पश्चिमी उप्र में पराली जलाई गई है।

नसीब सैनी

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सुप्रीम कोर्ट पहुंचा दिल्ली में पानी की शुद्धता का विवाद

—-याचिका में कहा गया है कि बीआईएस की रिपोर्ट में दिल्ली का पानी पीने लायक नहीं बताया गया है। इसलिए प्रतिबंध हटाया जाना चाहिए

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नई दिल्ली,(नसीब सैनी)।

दिल्ली में पानी की शुद्धता का विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। आरओ निर्माताओं ने मई में आए एनजीटी के आदेश को चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट ने आरओ निर्माताओं से कहा कि दस दिनों में अपनी बात सरकार के पास रखें। सरकार नीति बनाते समय सभी बातों का ध्यान रखे।

दरअसल मई में एनजीटी ने दिल्ली के कई हिस्सों में आरओ पर पाबंदी लगाई थी। आरओ कंपनियों का कहना है कि एनजीटी ने उनकी बात नहीं सुनी। बीआईएस की रिपोर्ट के हिसाब से दिल्ली में आरओ जरूरी है। याचिका में कहा गया है कि बीआईएस की रिपोर्ट में दिल्ली का पानी पीने लायक नहीं बताया गया है। इसलिए प्रतिबंध हटाया जाना चाहिए।

नसीब सैनी

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