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राजशाही जमाने की एेतिहासिक बावड़ियां जल संकट में आज भी वरदान सिद्ध हो सकती है

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रतलाम, 24 अप्रैल
रतलाम कभी बावड़ियों का शहर कहा जाता था। आज इसी शरह की बावड़ियां लावारिस और उपेक्षा की शिकार हैं। एक समय रतलाम में 50 से अधिक बावड़ियां थी, कई बावड़ियों पर प्लाट बनकर मकान बन गए और कई बावड़ियां कूड़ा-कचरा की कन गई है लेकिन कई बावड़ियां आज भी ऐसी हैं जो अपने पुरातन धरोहर को समेटे हुए हैं।
17वीं शताब्दी में जोधपुर से आए महाराजा रतनसिंह ने इस आशय से आज के रतलाम का नाम रत्नललाम रखा, जिसका अर्थ होता है सुंदर रत्न लेकिन हमारे कर्णधारों ने इसका क्या स्वरुप कर दिया है यह सबके सामने है। राजाओं के जमाने में बना राजमहल, सज्जन मिल, झाली तालाब, अमृत सागर तालाब, जिला अस्पताल, गुलाब चक्कर और ऐसे ही राजशाही के जमाने मेें बने एतिहासिक स्थल की भव्य वैभवता आज भी हमारे सामने है। ऐसे अनेक उदाहरण हैं जो हमारे रत्नललाम को रतलाम तक पहुंचाने वाले राजाओं की आत्माओं को कष्ट पहुंचा रहे हैं। इन्हीं में राजशाही के जमाने की बनी बावड़ियां भी शामिल हैं।
राजमहल के सामने जहां कभी नजरबाग हुआ करता था वहां आज भव्य अट्टालिकाएं खड़ी हैं। इसी बाग में कभी कुंड हुआ करता था जो सारे शहर को जल संकट में मीठे जल की आपूर्ति करता था। प्रौढ़ अवस्था के लोग आज भी इस कुंड को याद करते है क्योंकि उन्होंने इस कुंड का पानी भरकर कांवड़ में लोगों के घरों में डाला करते थे और अपनी रोजी-रोटी चलाते थे। यही कुंड आज कूड़ा-करकट का केंद्र बना हुआ है और वहीं लोग इस कुंड के अस्तित्व को समाप्त होते हुए देख रहे है, जिन्हें छोटे से बड़ा इस कुंड के पानी से होने का गौरव प्राप्त है। इसे दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि जो बावड़ियां आज लाखों, करोड़ों की लागत की हो गई हैं उनकी अपेक्षा करके शासन जल संवर्धन, जल अभिषेक, जल रोको जैसे अभियानों पर लाखों करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है, यदि इन बावड़ियों का ही उपयोग किया जाए तो शासन के लाखों रुपये बचाए जा सकते हैं। यहीं बावड़ियां रिचार्जिंग का काम भी कर सकती हैं और नलकुपों के जल स्तर को बढ़ाने में भी सहायक हो सकती हैं।
लोगों का यह भी कहना है कि यदि बावड़ियों पर ध्यान देकर इन्हें सुव्यवस्थित किया जाता है तो जल प्रबंंधन के नाम पर आने वाला आवंटन और उससे मिलने वाला निजी लाभ, व्यवस्था में लगे लोगों को नहीं मिल पाएगा, इसलिए लोग नहीं चाहते हैं कि बावड़ियां पुनर्जिवित की जाएं लेकिन हमारे जो कर्णधार हैं और निगम प्रशासन में बैठे हमारे पार्षद साथी अपने दायित्व का निर्वाह करते हुए इन बावड़ियों की चिंता करें तो उन राजाओं की आत्माएं उनको साधुवाद देंगी, जिन्होंने राजस्थान के भीषण जल संकट की वेदना को देखते हुए रतलामवासियों के लिए जहां देखों वहां ऐतिहासिक बावड़ियां बनाई थी।
अमृत के समान कभी रतलाम को जल आपूर्ति के लिए बनाई ये बावड़ियां जिनमें उंकाला माताजी, जिला अस्पताल, शिव मंदिर झीन, दो मुंह की बावड़ी, बोहरा बावड़ी, हाकम वाड़ा के अंदर, उंकाला रोड की बावड़ी, नगर सुधार न्यास के सामने वाली गली स्थित बावड़ी, स्टेशन रोड़ थाना तथा कालिका माता के समीप, पोलोग्राउंड टंकी के समीप स्थित बावड़ियां ऐसी हैं, जो आज भी शताब्दी तक लोगों के पानी की समस्या का निराकरण कर सकती हैै।
इनमें कई बावड़ियां तो ऐसी लगती हैं जो दस-बीस सालों पहले ही बनी हो। राजस्थान से आए राजाओं ने हमारे यहां बावड़ियां इसलिए बनाई थी ताकि प्रजा को जल का कष्ट न हो यदि बावड़ियों के रख-रखाव व उनके सौंदर्यीकरण को कायम रखा होता तो आज ये बावड़ियां रतलाम के लिए वरदान सिद्ध होती लेकिन हमारे आज के धनलोलुप, सत्तालोलुप राजाओं ने इन बावड़ियों को अकाल मौत की ओर धकेल दिया।
प्रशासन को चाहिए कि बावड़ियों को पुरातत्व के तहत उनके संरक्षण का इंतजाम करे, मोहल्ला या वार्ड में समितियां बनाकर पार्षद की अध्यक्षता में जिम्मेदारी सौंपी जाए तथा रख-रखाव के खर्च का भार नगर निगम बजट से किया जाए ताकि यह बावड़ियां पुन: अपने पुराने वैभव में लौट सके। कई कलेक्टरों ने इन बावड़ियों में सफाई कराने में रुचि ली थी, उनके जाने के बाद यह अभियान ठप हो गया।
औरंगजेब द्वारा निर्मित की गई सेजावता की बावड़ी के जिक्र के बिना इन बावड़ियों की चर्चा समाप्त नहीं होती। राजा रतनसिंह के पुत्र ने यह बावड़ी उस समय बनवाई थी जब औरंगजेब ने वहां पड़ाव डाला था वे अपने सेनापति राजा रतनसिंह की वीरता के प्रशंसक थे। इसलिए वे यहां रुके भी थे। ये बावड़ी आज भी सुंदर दिखाई देती हैं लेकिन इसके रख-रखाव की व्यवस्था पर भी क्षेत्र के लोग उदासीन हैं।

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महादेव हॉस्पिटल पेहवा की ओर से माउंट लीटर ज़ी स्कूल में लगाया गया दो दिवसीय फ्री हेल्थ चेकअप कैंप

महादेव हॉस्पिटल पेहवा की ओर से माउंट लीटर ज़ी स्कूल में लगाया गया दो दिवसीय फ्री हेल्थ चेकअप कैंप

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पेहवा। कुरुक्षेत्र के माउंट लीटर ज़ी स्कूल में दो दिवसीय फ्री हेल्थ चेकअप कैंप लगाया गया। महादेव हॉस्पिटल पेहवा की ओर से कैंप का आयोजन किया गया।

इसमें बच्चों की आंख, दांत और अन्य प्रकार की जांच की गई। कैंप में स्कूल के करीब 150 बच्चों की जांच करके उनके हेल्थ कार्ड बनाए गए। इन्हीं कार्ड के आधार पर बच्चों व इनके परिजनों की महादेव हॉस्पिटल पेहवा में निःशुल्क जांच की होगी। जिससे यह पता चल सकेगा कि कैंप के दौरान हुई जांच के बाद बच्चों को कुछ लाभ मिला या नहीं। इस दौरान डॉ लोकेश कुमार (एमडी, फिजिशियन) ने बच्चों की सेहत की जांच की। डॉ लोकेश कुमार ने बताया की जांच के दौरान सेहत, टेड़े मेढे दांत, मोटापा,कद ये सभी बच्चों में पाई गयी। जिसके उपचार के लिए उन्हें सलाह दी गयी। इस दौरान भारत गाँधी, अंकित वर्मा, ऋतू, लव तलवार आदि मौजूद रहे।

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महिला के ननदोई ने 3 साथियों के साथ मिलकर किया गैंगरेप, जेल से लौटा पति तो 2 की जगह मिले 3 बच्चे

महिला का पति जेल में गया तो पीछे तो उसके ननदोई ने अपने तीन साथियों संग मिलकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म कर दिया. जिसके बाद आरोपी नन्दोई भूपेंद्र और रिश्ते में चाचा रमेश को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने आरोपियों को कोर्ट में पेश कर तीन दिन के रिमांड पर लिया है.

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हरियाणा के सोनीपत जिले के कुंडली थाना क्षेत्र में रिश्तों को शर्मसार कर देने का मामला सामने आया है. जहां महिला का पति जेल में गया तो पीछे उसके ननदोई ने अपने तीन साथियों संग मिलकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म कर दिया. जिससे महिला गर्भवती हो गई और उसने एक बच्ची को जन्म दिया. महिला ने कुंडली थाना में मुकदमा दर्ज कराया है. पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी ननदोई व उसके एक दोस्त को गिरफ्तार कर लिया है. उन्हें तीन दिन के रिमांड पर लिया है.

सोनीपत के कुंडली थाना क्षेत्र में किराए पर रहने वाली महिला ने पुलिस को बताया कि उसका पति वर्ष 2018 में दुष्कर्म के एक मामले में जेल में चला गया था. घर पर वह तथा उसके दो बच्चे थे. उसका ननदोई भूपेंद्र भी पड़ोस में ही किराए पर रहता था. आरोप है कि भूपेंद्र ने अपने तीन साथियों रमेश, रामसिंह व दर्शन के साथ मिलकर उसके साथ कई बार दुष्कर्म व सामूहिक दुष्कर्म किया. जिससे वह गर्भवती हो गई. उसने एक बेटी को जन्म दिया. यह बच्ची अभी दो साल की है.

अब पति जेल से जमानत पर बाहर आया तो उसे घर में तीन बच्चे मिले. जिस पर उसने पत्नी से पूछताछ की. पत्नी ने सामूहिक दुष्कर्म की जानकारी दी, जिसके बाद महिला कुंडली थाना में पहुंची और चारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया. कुंडली थाना प्रभारी इंस्पेक्टर रवि कुमार ने बताया कि पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने के बाद आरोपी भूपेंद्र व रमेश को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने आरोपियों को कोर्ट में पेश कर तीन दिन के रिमांड पर लिया है.

जांच अधिकारी ने बताया की कुंडली थाना क्षेत्र में एक महिला ने शिकायत दी हे की उसके नन्दोई भूपेंद्र और रिश्ते में चाचा रमेश व रामसिंह व दर्शन के साथ मिलकर उसके साथ कई बार दुष्कर्म व सामूहिक दुष्कर्म किया था.

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शादी समारोह में कन्यादान के शगुन से भरा था बैग; सिर्फ 10 सेकेंड में हुआ गायब, CCTV मिले खराब

बड़ी बात यह है कि जिस जगह यह चोरी हुई बैंकवेट हाल के उसी हिस्से के सीसीटीवी खराब थे। वारदात को चंद सेकेंड में अंजाम दिया जाना और उसी क्षेत्र के सीसीटीवी खराब होना, कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

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खरावड़ स्थित इस बैंकवेट हाल में हुई चोरी।

हरियाणा के रोहतक जिले में एक बैंकवेट हाल में आयोजित शादी समारोह से 12 लाख रुपए की चोरी हो गई। चोरी हुए पैसे कन्यादान समेत विभिन्न रस्मों में इक्ट्ठा हुए थे। बड़ी बात यह है कि जिस जगह यह चोरी हुई बैंकवेट हाल के उसी हिस्से के सीसीटीवी खराब थे। वारदात को चंद सेकेंड में अंजाम दिया जाना और उसी क्षेत्र के सीसीटीवी खराब होना, कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है। पीड़ित ने पुलिस को शिकायत दी है। पुलिस मामले में हर एंगल से जांच कर रही है।

मेहमान को नमस्ते करने ही उठा था सुदर्शन
आईएमटी थाना पुलिस को दी शिकायत में सुदर्शन धींगड़ा ने बताया कि वह केवलगंज रोहतक का रहने वाला है। वह रिटायर्ड प्रोफेसर है। 20 नवंबर को वह अपने रिश्तेदार धर्मेंद्र निवासी मानसरोवर कॉलोनी रोहतक की बेटी के शादी समारोह में शामिल होने खरावड़ स्थित गजानिया बैंकवेट हाल गया था। शादी में कन्यादान वह ही ले रहा था। वह एक काले बैग में कन्यादान जमा कर रहा था। रात करीब साढ़े 10 बजे वह किसी मेहमान को नमस्ते करने के लिए उठा। करीब 10 सेकेंड बाद वह नमस्ते कर वापस मुड़ा तो देखा कि उसकी सीट पर बैग नहीं था। बैग को कोई चुरा ले गया। उन्होंने बैग को अपने तौर पर तलाशने के बाद तीसरे दिन पुलिस को शिकायत दी है।

जहां हुई चोरी, वहां लगे चारों कैमरे खराब
सुदर्शन ने बताया कि बैग में करीब 12 लाख की नकदी थी। इसमें शादी की सुबह चूड़ा रस्म के दौरान मिला साढ़े 3 लाख का शगुन, बैंकवेट हाल का 4 लाख किराया व बाकी कन्यादान में आया शगुन जमा था। बैग को इधर-उधर काफी तलाशा, मगर पता नहीं लगा। इसके बाद वह बैंकवेट मैनेजर विकास बिंद्रा के पास गए, जिनको पूरी घटना बताई। जिस पर मैनेजर ने कहा कि जिस जगह आप बैठे थे, वहां के सीसीटीवी कैमरे खराब हैं। इस क्षेत्र में लगे सभी चारों कैमरों के अलावा पूरे बैंकवेट हाल के सीसीटीवी सही हैं।

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