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शिक्षा/ स्कूल

हरियाणा बोर्ड ओपन और रेगुलर 10वीं के परीक्षा परिणाम घोषित, जींद के कार्तिक बने हरियाणा बोर्ड 10वीं के टॉपर, चेक कर सकेंगे

हरियाणा ,22 मई..

हरियाणा बोर्ड ओपन और रेगुलर 10वीं के परीक्षा परिणाम घोषित, लड़कियों ने मारी बाजी,               हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड (HBSE haryana board) आज 10वीं क्लास (HBSE 10th Result 2018) के नतीजे घोषित  हो गए हैं। रिजल्ट (haryana board result 2018 class) वेबसाइट bseh.nic.in पर चेक किए जा सकेंगे। हरियाणा विद्यालय विद्यालय शिक्षा बोर्ड की मार्च-2018 में संचालित सैकेण्डरी (शैक्षिक) परीक्षा का परिणाम 51.15 फीसदी रहा है और स्वयंपाठी (प्राईवेट) परीक्षार्थियों का परिणाम 66.72 फीसदी रहा है। लड़कियों ने 55.34 प्रतिशत परिणाम देकर लडक़ों से बाजी मारी जिनका उत्तीर्ण प्रतिशत 47.61 रहा है। इस परीक्षा में प्रथम स्थान पर जींद के कार्तिक ने 498 अंक अर्जित किए हैं। लड़क़ों की पास प्रतिशतता रही  47.61  प्रतिशत-ग्रामीण तबके के विद्यार्थी रहे हावी ।, रैंकिंग में दूसरे नंबर पर सेलिना यादव, सोनाली और हरिओम ,जींद के कार्तिक बने हरियाणा बोर्ड 10वीं के टॉपर , 55.34 फीसदी लड़कियां पास , फिलहाल स्टूडेंट्स वेबसाइट पर बी रिजल्ट चेक नहीं कर पाएंगे, रिजल्ट अपलोड होने के बाद नतीजे चेक किए जा सकेंगे ओपन में कुल 66.73 फीसदी स्टूडेंट्स पास, कुल  51.15 फीसदी पास, हरियाणा बोर्ड ओपन और रेगुलर 10वीं के परीक्षा परिणाम घोषित, लड़कियों ने मारी बाजी, शिक्षा मंत्री रामविलास शर्मा 2.20 बजे घोषित करेंगे हरियाणा बोर्ड में 10वी कक्षा के परिणाम। 

चौथा खंभा न्यूज़ .com / नसीब सैनी/अभिषेक मेहरा

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फोटोग्राफी में पीएचडी करने वाली पहली महिला डॉ. तूलिका 17 दिसम्बर को होंगी सम्मानित

–लिम्का बुक में दर्ज है नाम

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सुलतानपुर,(नसीब सैनी)।

फोटोग्राफी में पीएचडी करने वाली देश की पहली महिला डॉ. तूलिका साहू को 17 दिसम्बर को लखनऊ में सम्मानित किया जाएगा। अलीगंज स्थित ललित कला अकादमी में आयोजित फोटोग्राफी प्रदर्शनी में डॉ. तूलिका को पद्मश्री मालिनी अवस्थी सम्मानित करेंगी।

लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्ड्स में अपना नाम दर्ज कराने वाली डॉ. तूलिका साहू ने सोमवार को ‘हिन्दुस्थान समाचार’ से फोन पर बातचीत में अपनी उपलब्धियों के कारवां को साझा किया। अम्बेडकर नगर की मूल निवासी   डॉ. तूलिका की प्रारंभिक शिक्षा गांव में हुई है। पिता के फोटोग्राफर होने के नाते फ़ोटो बनाने का शौक बचपन से ही आ गया। वर्तमान में राजधानी लखनऊ में रह रहीं डॉ. तूलिका एमिटी यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर कार्यरत हैं। 

लिम्का बुक में दर्ज है नाम  डॉ. तूलिका ने पीएचडी करने वाली भारत की पहली महिला बनने का श्रेय प्राप्त किया और अपना नाम लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स (2015) तथा इंडिया बुक ऑफ़ रिकार्ड्स (2016) में दर्ज करवाने में कामयाबी हासिल की। फोटोग्राफी के क्षेत्र में प्राप्त उपलब्धियों के लिए उन्हें भारत के अतिरिक्त अन्य कई देशों में सम्मानित किया गया है। इतना ही नहीं, डॉ. साहू के नाम लखनऊ आर्ट्स कॉलेज के सौ वर्षों से भी अधिक के इतिहास में प्रथम पीएचडी धारक होने का रिकॉर्ड भी है। उन्होंने डिजिटल तथा एनालॉग फोटोग्राफी की वयसंधि को देखा और दोनों पर महारत हासिल की है। उनके फोटोग्राफ्स को भारत, अमेरिका, सिंगापुर, ग्रीस, एरिज़ोना, रोमानिया , मैसेडोनिअ, संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन आदि के विश्व प्रसिद्द फोटो क्लबों द्वारा आयोजित चालीस से अधिक राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय फोटोग्राफी प्रदर्शनियों शामिल किया जा चुका है। यूपी की प्रतिष्ठित राज्य ललित कला अकादमी द्वारा भी उनकी फोटोग्राफी पोर्टफोलियो को प्रदर्शनी के लिए चुना गया है ।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर ‘असाधारण प्रतिभा पुरस्कार’। विश्व श्रम दिवस पर अखिल भारतीय मीडिया फोटोग्राफर क्लब द्वारा सम्मान, अखिल भारतीय जवाहर नवोदय विद्यालय फाउंडेशन द्वारा सम्मान, उन्नयन एनजीओ (गर्ल चाइल्ड के सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक कल्याण के लिए समर्पित एक संस्था) द्वारा ‘उन्नति सम्मान’, आल इंडिया मीडिया फोटोग्राफर्स क्लब, अखिल भारतीय जवाहर नवोदय विद्यालय फाउंडेशन, तृतीय उत्तर प्रदेश फोटो एक्सपो, अखिल भारतीय वैश्य साहू महासभा इत्यादि द्वारा भी डॉ. तूलिका सम्मानित हो चुकी हैं।

राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों के साथ ही उनके हिस्से में अंतर्राष्ट्रीय बाल कला प्रदर्शनी में ‘क्षितिज कलाश्री सम्मान’ और क्षितिज आर्ट सोसाइटी मुंबई द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कला शिक्षक प्रदर्शनी में ‘सर्वश्रेष्ठ शिक्षक’ पुरस्कार भी है। वह यूनाइटेड स्कूल आर्गेनाइजेशन और सूचना और जन संपर्क विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित चित्रकारी एवं फोटोग्राफी प्रतियोगिताओं की विजेता भी रह चुकी हैं। बहुमुखी प्रतिभा की धनी डॉ. साहू, गायन, कविता लेखन, एंकरिंग और स्पोर्ट्स के क्षेत्र से भी जुड़ी हैं। जल रंग व आयल कलर पेंटिंग्स से भी उनका लगाव है।

नसीब सैनी

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स्कूल समिट में बोले योगी-सभी राज्यों के पाठ्यक्रमों में साम्यता जरूरी

— इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में दो दिवसीय स्कूल समिट का शुभारंभ किया मुख्यमंत्री ने

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लखनऊ,(नसीब सैनी)।

विभिन्न राज्यों, विभिन्न बोर्ड और संस्थाओं के पाठ्यक्रमों में साम्यता स्थापित करना जरूरी है। इसके लिए सबको मिलकर पहल करना होगा। हमें संविधान समानता का अधिकार भी देता है। इसके बावजूद शिक्षा में समानता अब तक नहीं मिल पाई है। शिक्षा अलग दायरे में कैद होकर रह गई है। 

ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कही। वे इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में स्कूल समिट को बुधवार को शुभारंभ करने के बाद बोल रहे थे। इस दो दिन तक चलने वाले समिट का आयोजन माध्यमिक शिक्षा विभाग और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआइआइ) संयुक्त रूप से कर रहा है। इसमें करीब 1100 प्रधानाचार्य व शिक्षक शामिल हो रहे हैं। यह समिट यूपी में पहली बार आयोजित हो रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शिक्षा को बंधनों में जकड़कर समाज और राष्ट्र की प्रगति को बाधित नहीं किया जाना चाहिए। समानता के कार्य में सबको मिलकर आगे बढ़ना होगा। इसमें  संस्थाओं को भी स्कूली शिक्षा को सर्वांगीण विकास और स्वावलंबन से जोड़ने के लिए आगे आना होगा। सीएम ने कहा कि अलग-अलग देश, काल और परिस्थिति में शिक्षा की उपयोगिता किस रूप में हो सकती है। योगी ने कहा कि जनसहभागिता से उत्पन्न सुविधाओं से यदि हम स्कूली शिक्षा ठीक कर लें तो उच्च शिक्षा में बच्चे अपना भविष्य स्वयं बना सकते हैं। ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से सरकारी अधिकारी और कंपनियां स्कूलों को गोद लेंगी तो इससे हमारी शिक्षा की नींव मजबूत होगी।

सीएम योगी ने कहा कि  स्कूल समिट के माध्यम से हम सब एक कार्ययोजना बनाकर एक सार्थक पहल करें, जिससे आप अपना योगदान देकर भारत को समर्थ और सशक्त बनाने का सपना साकार हो सके। इस दौरान उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सतीश चंद्र द्विवेदी सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे। इस समिट में शिक्षाविद्, उद्यमी,दूसरे राज्यों के शिक्षामंत्री, स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रमुख और  अधिकारी भी शामिल हो रहे हैं। इसका मकसद नवाचार के प्रयोग व शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए तकनीक को बढ़ावा देना है।

नसीब सैनी

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जेएनयू में देशविरोधी नारे लगाने के मामले में सुनवाई पटियाला हाउस कोर्ट में फिर टली

—उल्लेखनीय है कि 9 फरवरी 2016 को जेएनयू केपस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान देश विरोधी नारे लगाने के आरोप में कन्हैया कुमार , उमर खालिद और अनिर्वाण भट्टाचार्य को गिरफ्तार किया गया था

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नई दिल्ली,(नसीब सैनी)।

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने बुधवार को जेएनयू में देशविरोधी नारे लगाने के मामले में सुनवाई फिर टाल दी है। दरअसल, आज जांच अधिकारी ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में अभियोजन के लिए स्वीकृति देने की फाइल दिल्ली सरकार के पास लंबित है। उसके बाद कोर्ट ने 19 फरवरी को सुनवाई करने का आदेश दिया। पिछले 25 अक्टूबर को दिल्ली सरकार के वकील ने कोर्ट को बताया था कि यह मामला अभी लंबित है। उसके बाद कोर्ट ने इस मामले के जांच अधिकारी को तलब किया था। 

 पिछले 18 सितंबर को कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया था कि वो अभियोजन चलाने के लिए स्वीकृति देने पर एक महीने में फैसला करें। पिछले 23 जुलाई को इस मामले की जांच कर रहे जांच अधिकारी ने कोर्ट को बताया था कि चार्जशीट पर अनुमति देने के बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है। तब कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के डीसीपी से मामले की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था। पिछले 8 अप्रैल को कोर्ट ने दिल्ली सरकार को फैसला लेने लिए 23 जुलाई तक का समय दिया था। पिछले 5 अप्रैल को दिल्ली सरकार ने कोर्ट को बताया था कि दिल्ली पुलिस ने इस मामले में जल्दबाजी में और गोपनीय तरीके से चार्जशीट दाखिल किया था।

दिल्ली सरकार ने कहा था कि वे एक महीने में इस संबंध में फैसला कर लेंगे। पिछले 3 अप्रैल को दिल्ली सरकार ने कोर्ट से कहा था कि इस मामले में अनुमति देने के मामले पर फैसला लेने में एक महीने का वक्त लग सकता है। तब चीफ मेट्रोपोलिटन मैजिस्ट्रेट दीपक सहरावत ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया था कि वे यह बताएं कि आखिर कब तक इस मामले पर आप फैसला कर लेंगे। पिछले 30 मार्च को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के डीसीपी प्रमोद कुशवाहा पटियाला हाउस कोर्ट में पेश हुए थे। उन्होंने कहा था कि इस मामले में केस चलाने के लिए अनुमति देना एक प्रशासनिक कार्य है और ये दिल्ली सरकार के पास लंबित है। तब चीफ मेट्रोपोलिटन मैजिस्ट्रेट दीपक सहरावत ने कहा था कि आपका काम खत्म हो गया, हम दिल्ली सरकार से पूछेंगे कि देर क्यों हो रही है। 29 मार्च को स्पेशल सेल के डीसीपी कोर्ट में पेश नहीं हुए थे जिससे कोर्ट नाराज हो गई थी और उन्हें 30 मार्च को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया। पिछले 11 मार्च को दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया था कि केस चलाने के लिए जरूरी अनुमति मिलने में दो-तीन महीने का समय लग सकता है।

इस पर कोर्ट नाराज हो गई और कहा कि बिना अनुमति मिले चार्जशीट दाखिल करने की क्या हड़बड़ी थी। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के डीसीपी से केस का अपडेट दाखिल करने का निर्देश दिया था। 11 मार्च को दिल्ली पुलिस के वकील ने बताया था कि इस मामले के जांच अधिकारी उपस्थित नहीं हैं क्योंकि वो हादसे के शिकार हो गए हैं। कोर्ट को बताया गया था कि दिल्ली सरकार ने चार्जशीट को पढ़ने के लिए दो-तीन महीने का समय मांगा है। पिछले 28 फरवरी को दिल्ली पुलिस ने कोर्ट से कहा था कि दिल्ली सरकार ने अब तक केस चलाने की अनुमति नहीं दी है । तब कोर्ट ने कहा था कि हम वीडियो देखेंगे और अगर सरकार अनुमति नहीं देगी, तो भी हम सबूत का वीडियो देखकर कार्रवाई करेंगे। पिछले 6 फरवरी को ने कोर्ट दिल्ली पुलिस के चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया था कि अभी चार्जशीट के लिए ज़रूरी मंजूरी दिल्ली सरकार से नहीं मिली है। कोर्ट ने कहा कि चार्जशीट दायर करने से पहले अनुमति ले लेनी चाहिए थी। अब दिल्ली सरकार से कहिए वो जल्द मंजूरी दे। अनिश्चित समय तक ऐसे फ़ाइल को लटकाया नहीं जा सकता।

पिछले 19 जनवरी को भी कोर्ट ने जेएनयू में देशविरोधी नारे लगाने के मामले में दिल्ली पुलिस के चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इन्कार कर दिया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि पूछा था कि बिना सरकार की अनुमति के कैसे चार्जशीट दाखिल कर दी गई। पिछले 14 जनवरी को दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट दाखिल किया था।करीब 12 सौ पेजों के इस चार्जशीट में सीट में जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्वाण भट्टाचार्य को आरोपित बनाया गया है । चार्जशीट में सात अन्य कश्मीरी छात्रों के भी नाम शामिल हैं। चार्ज शीट में देशद्रोह, धोखाधड़ी,इलेक्ट्रॉनिक धोखाधड़ी , गैरकानूनी तरीके से इकट्ठा होना, दंगा भड़काने और आपराधिक साजिश रचने के आरोप लगाया गया है।

उल्लेखनीय है कि 9 फरवरी 2016 को जेएनयू केपस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान देश विरोधी नारे लगाने के आरोप में कन्हैया कुमार , उमर खालिद और अनिर्वाण भट्टाचार्य को गिरफ्तार किया गया था । फिलहाल, तीनों जमानत पर हैं।  इस मामले में अभियोजन की स्वीकृति देने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की गई थी। पिछले 4 दिसंबर को हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया था कि अभियोजन के लिए स्वीकृति देने के मामले पर कानून के मुताबिक फैसला करें।

नसीब सैनी

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