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हरियाणा का 5000 साल पुरना इतिहास बहुत समृद्ध है

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नसीब सैनी

जहाँ आज पुरे विश्व में भारत का ढंका बज रहा है वहीं भारत में हरियाणा राज्य का भी देश के साथ-साथ पुरे विश्व में हरियाणवी संस्कृति का ढंका बज रहा है।  हरियाणवी संस्कृति समृद्ध संस्कृति है, जिसका पूरे भारत देश के साथ-साथ विदेशों में भी ढंका है। हरियाणवीं सांग, रागनी, हरियाणवी वेशभूषा, हरियाणवीं हास्य व्यंग्य और खान-पान ये सब इस संस्कृति के विशेष अंग है। जिसको हम भूलते जा रहे है। इस संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक है कि हरियाणा का युवा अपनी संस्कृति से भली-भांति परिचित हो।

हमारी संस्कृति से युवाओं को परिचित करवाने के लिए हरियाणा सरकार ने हरियाणवी संस्कृति को बचाने के लिए बेहद सराहनीय पहल की है। जिनमें हरियाणवी संस्कृति की झलक स्पष्ट देखने को मिल रही है। हरियाणवी कार्यक्रमों से युवा पीढ़ी में अपने देश व प्रदेश की लोक संस्कृति के प्रति जागृति आएंगी। इन आयोजनों से न केवल शहरों में रहने वाला युवा वर्ग हरियाणवी संस्कृति से परिचित होगा, बल्कि संस्कृति से जुड़कर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हरियाणवी संस्कृति को बढ़ावा देने में सहायक भी सिद्ध होगा।

क्या आप ऐसी भूमि की कल्पना कर सकते हैं जहां परिवार के धन का निर्धारण इस बात से होता है की परिवार में गायों की संख्या कितनी है! जहां हर सुबह सूरज हरी धान के खेतों पर अपनी किरणों का रंग बिखेरता है और शाम के रंगीन क्षितिज एक अपनी ही तरह की बोली में अनोखी और निर्दोष सौहार्द के गीत गुनगुनाते है।

हमारी सबसे प्रमुख विशेषता तो हमारी भाषा ही है है या यूँ कहें, जिस तरीके और लहजे से यहाँ बात की जाती हैं वो ही तो अलग बनता है हमे। बंगारु हमारे यहाँ बोली जाने वाली सबसे लोकप्रिय बोली है जिसे आमतौर से हरियाणवी के नाम से जाना जाता है, हमारी बोली संभवतः बाहर के लोगों को ठेठ व उग्र प्रतीत हो, लेकिन इसमें ग्रामीण मिटटी की महक से भरपूर व्यंगात्मक सरलता और सीधापन भरा है। आप क्या बोलेंगे हमारे बारे में जो ऊपर से कठोर, बोली से उग्र लेकिन; दिल इतना साफ़ और मक्खन सा नरम? और इस भाईचारे के मक्खन का आनंद लेने के लिए, आपको हरियाणा आने की जरूरत नहीं है बस किसी रस्ते चलते हरयाणवी से दो बातें कर के देख लीजिये।

हरियाणा के संस्कृति के आम-बोलचाल के शब्द जिनका चलन धीरे-धीरे ख़त्म ही गया है। ये शब्द हमारी हरियाणवी बोली की शान हुआ करते थे। आजकल ये शब्द केवल किताबों में ही देखने को मिलते है। 
बरही/नेजू – कुएं से पानी खींचने की मोटी रस्सी 
दोघड – सिर पर ऊपर नीचे एक साथ दो घड़े 
पनिहारन – कुएं से पानी लेन वाली औरत 
पनघट – वह सार्वजनिक कुएं जहाँ से पीने का पानी लाया जाता था 
सूड़ – खेत में हल चलाने से पहले की जाने वाली कटाई- छटाई (खरपतवार)
नेता – हाथ से दूध बिलोने की राई को घुमाने वाला रस्सा 
भलद – बैल
लाड़ला – प्यारा
कुंगर – जवान
लँडूर – फुकरा 
गना ऐंडी ना बन – ज्यादा होशियार मत बन 
मरोड़ – अकड़
बैरी – दुश्मन
जुकर – जैसे 
कयाते – क्यों 
कुकर – कैसे 
यो – ये  
मनै ना बेरा – मुझे नहीं पता 
टीककड़ – रोटी 
कीमे – कुछ  
ओल्हा – घूँघट 
गिरकाना – स्टाइलिश बनना 
भीतर – अंदर 
बक्क्ल – छिलका 
भखत – समय
ऐसे ही बहुत शब्द है जिसका सीधा नाता हरियाणा की संस्कृति से जुड़ा हुआ है जिसको हम भूलते जा रहे है। जो हमे अपनी संस्कृति से दूर ले जाने का काम कर रही है।

                        हुक्के, खाट, पीपल, बरगद, कुए, दामण …… यही है हमारा हरियाणा ।

जहाँ  हरियाणा  देश  का “अन्नदाता” है वहीं आज औद्योगीकरण के लिए भी एक केंद्रीय बिन्दु बन के उभर रहा है। 

जहां वेदो का निर्माण हुआ, मिथकों और किंवदंतियों के साथ भरा हुआ, हरियाणा का 5000 साल पुरना इतिहास बहुत समृद्ध है। कुरुक्षेत्र युं तो एक साधारण क्षेत्रीय शहर की तरह दिख सकता है, लेकिन वास्तव में हिंदू शिक्षाओं के अनुसार यहि से ब्रह्मांड का उद्गम हुआ और यहि बुराई पर अच्छाई की विजय हुई। ब्रह्मा ने यहि मनुष्य और ब्रह्माण्ड का निर्माण किया और भगवान कृष्ण ने भगवद गीता का धर्मोपदेश दिया। इस्सी मिट्टी पर संत वेद व्यास ने संस्कृत में महाभारत लिखा। महाभारत युद्ध से भी पहले, सरस्वती घाटी में कुरुक्षेत्र क्षेत्र में दस राजाओं की लड़ाई हुई थी। लेकिन लगभग 900 ईसा पूर्व में, यह महाभारत का ही युद्ध था, जिसने इस क्षेत्र को दुनिया भर में प्रसिद्धि दिलाई। महाभारत ने हरियाणा को बहुधनीयका, भरपूर अनाज और बहुधना की भूमि, विशाल धन की भूमि का पता लगाया।

हमारे यहां के लोग दुनिया में सबसे जुदा है ….. हम जो करते है खुल के करते हैं हमारा ये अपनापन ही तो है जो लोगो को हमारे पास खींच लता हैं … और हाँ भोजन को कैसे भूल सकता है कोई ?  हम खाने के लिए जीते हैं मखण, दूध, खोया, मलाई, चूरमा, लाडू, गुड़, कढ़ी, बथुए का रायता, बाजरे की रोटी ..? “जित दूध दही का खाना इस्सा म्हारा हरयाणा” ….. इसे तो आपने सौ बार सुना होगा। यह वह भूमि है जहां आज भी खेतों में जाने वाले किसान अपने साथ रोटी और प्याज़ ले जाते हैं, जहां नाश्ते में लस्सी के बिना दिन अधूरा है और रात में लोगों को गर्म दूध के गिलास के बिना नींद नहीं आये। हमारे यहाँ हर क्षेत्र में अदालत और पुलिस स्टेशन जरूर है, लेकिन आज भी  हमारा विश्वास पंच-परमेश्वर और पारंपरिक पंचायती राज में ज्यादा हैं, वो कहते हैं न जब आपसी विचार-विमर्श और वार्ता से विवाद सुलझ जाये तो कोर्ट कचेरी के चक्कर कौन काटे। यद्यपि आधुनिक युग ने हरयाणा में भी बहुत कुछ बदला है , लेकिन आज भी हमारे यहाँ  विशेष रूप से गांवों में, हम चाचा-चाची, ताउ-ताई, दादा-दादी, भाई-भाभी . एक ही छत के नीचे, संयुक्त परिवार रहते मिल जायेंगे। आज भी हम अपने माता-पिता के परामर्श के बिना, चाहे छोटा हो या बड़ा , निर्णय नहीं लेते। हालांकि हमने आधुनिकीकृत दृष्टिकोण को अपनाया है, लेकिन आज भी हम पहले अपने बड़ों का सत्कार पहले और अपना खाना बाद में ग्रहण करते हैं।

हमे अपने हरियाणा के लिए और अपनी हरियाणवी संस्कृति को बचने के लिए हर असभव प्रयास करना चाइए। हमारा प्रयास है कि हम उच्च स्तरीय साहित्य व लेखन को बढावा दें व लुप्त होती हुई हरियाणवी विधाओं को जीवित रख सकें।  

……...नसीब सैनी,कैथल        

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अब आगरा का नाम बदलकर ‘अग्रवन’ करने की तैयारी में यूपी सरकार

—इससे पहले सरकार ने कई जिलों व स्टेशन के नाम बदले थे

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आगरा,(नसीब सैनी)।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अब ताज की नगरी आगरा का नाम बदलने की तैयारी शुरू कर दी है। आगरा का नाम बदलकर अग्रवन होने की संभवाना है। इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार ने डॉ. भीमराव आम्बेडकर यूनिवर्सिटी को सौंपी है जो यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग से नामों से संबंधित अपना सुझाव भेजने के निर्देश दिये हैं। साथ ही विभाग से आगरा के नाम संबंधी साक्ष्य भी मांगे गए हैं। 

इससे पहले सरकार ने कई जिलों व स्टेशन के नाम बदले थे। इसमें इलाहाबाद को प्रयागराज, फैजाबाद का नाम बदलकर अयोध्या किया गया है। इनके अलावा मुगलसराय स्टेशन का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपध्याय जंक्शन रखा गया था। इतना ही नहीं चंदौली जिले का नाम बदलने की रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है, लेकिन अभी तक इस पर शासन की ओर से कोई आदेश नहीं हुआ है। अब शासन ताज की नगरी से जाना जाने वाला आगरा का नाम बदलकर अग्रवन करने की कवायद में जुटी हुई है। अगर आगरा का नाम बदला तो इसको लेकर भी दूसरे राजनीतिक पार्टियां सरकार को घेरने का काम कर सकती हैं, जैसे पहले भी हो चुका है। 

नसीब सैनी

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तलाकशुदा महिला से दुष्कर्म, मामला दर्ज

—पुलिस ने आरोपित के खिलाफ धारा 376 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की

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बीकानेर,(नसीब सैनी)।

राजस्थान के बीकानेर में दंतौर पुलिस थानांतर्गत तलाकशुदा 25 वर्षीय महिला को शादी का झांसा देकर छह साल तक दुष्कर्म करने का मामला सोमवार को सामने आया है। जब पीडि़ता ने आरोपी से शादी करने की बात कही तो आरोपी यह कहते मना कर दिया कि वह दूसरी जाति की है। इस संबंध में पीडि़ता ने नामजद आरोपी के खिलाफ  जिले के दंतौर पुलिस थाने में मामला दर्ज करवाया है। इस मामले की जांच थानाधिकारी भजनलाल कर रहे है। 

पीडि़ता महिला का आरोप है कि चक 05 एनजीएम निवासी रोशन पुत्र नानकसिंह बावरी ने उसको शांदी का झांसा देकर छह साल तक दुष्कर्म किया। जब शादी करने की बात कही तो आरोपी शादी करने से मुकर गया। पुलिस के अनुसार पीडि़ता पहले पति को तलाक दे चुकी है। पुलिस ने आरोपित के खिलाफ धारा 376 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। 

नसीब सैनी

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तीन माह बाद बनिहाल-श्रीनगर-बारामुला रेल सेवा हुई बहाल

—दोबारा रेल सेवा शुरू होने पर प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए कड़े प्रबंध किए

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श्रीनगर,(नसीब सैनी)।

जम्मू संभाग के बनिहाल से लेकर श्रीनगर तक रेल सेवा तीन महीने से ज्यादा समय तक बंद रहने के बाद सोमवार को एक बार फिर शुरू कर दी गई है। रविवार को बनिहाल-श्रीनगर-बारामुला रेलवे ट्रैक पर ट्रेन का ट्रायल सफल रहा। इसके बाद रविवार को ही श्रीनगर से बनहाल के लिए दोपहर में एक ट्रेन भी रवाना की गई जिसके बाद आज यानि सोमवार को बनिहाल-श्रीनगर-बारामुला रेल ट्रैक पर रेल सेवा पूरी तरह से बहाल कर दी गई है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाये जाने के बाद पांच अगस्त से राज्य प्रशासन ने कानून व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए बनिहाल-बारामुला रेल सेवा को स्थगित कर दिया था। अब दोबारा रेल सेवा शुरू होने पर प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए कड़े प्रबंध किए हैं।  

इससे पहले शनिवार को बनिहाल-श्रीनगर रेलवे ट्रैक पर दो बार ट्रेन को चलाया गया था और दोनों ही बार ट्रायल सफल रहने के बाद इस ट्रैक पर रेल सेवा शुरू होने का रास्ता साफ हो गया था। इसी बीच बारामुला-श्रीनगर रेलवे ट्रैक पर बीते मंगलवार से ही रेल सेवा जारी है। बनिहाल से श्रीनगर तक जाने वाले लोगों को बनिहाल-श्रीनगर रेल सेवा दोबारा शुरू होने से अब काफी फायदा होगा। लोग ट्रेन से बड़ी संख्या में श्रीनगर जाते हैं। इसमें एक तो कम किराया और दूसरी समय की बचत भी है। यही नहीं बर्फबारी के कारण जवाहर सुरंग के बंद होने से लोगों को जम्मू से कश्मीर पहुंचने में दिक्कत होती थी।

कश्मीर घाटी में स्थिति पूरी तरह से शांतिपूर्ण 
इसी बीच कश्मीर घाटी में सोमवार को भी स्थिति पूरी तरह से शांतिपूर्ण बनी हुई है। विंटर जोन के स्कूलों में 10वीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षा के बाद अब पांचवीं से नौवीं कक्षा तक की परीक्षाएं भी शुरू हो गई हैं जिसके लिए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए हैं। सड़कों पर सभी तरह के वाहन दौड़ रहे हैं। दुकानें तथा व्यापारिक प्रतिष्ठान पहले के मुकाबले अब ज्यादा समय के लिए खुल रहे हैं। लोगों की भारी भीड़ बाजारों में अब एक बार फिर दिखने लगी है।

निजी व सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की संख्या लगभग पूरी है। सेब मंडियां लगी हुई हैं और ट्रकों में सेब भरकर अन्य राज्यों में ले जाए जा रहे हैं। कश्मीर घाटी में लैंडलाइन फोन सेवा तथा पोस्ट पेड़ मोबाइल सेवा सुचारू रूप से जारी है जबकि पूरे जम्मू कश्मीर में मोबाइल इंटरनेट सेवा एहतियात के तौर पर बंद रखी गई है। इस सब के बावजूद घाटी के सभी संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती बरकरार है। 

नसीब सैनी

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