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अयोध्या विवाद: सुप्रीम कोर्ट में पूरी हुई सुनवाई, फैसला सुरक्षित

— सुनवाई के अंतिम दिन खूब चला कोर्टरूम में ड्रामा, मुस्लिम पक्ष के वकील ने फाड़ा नक्शा

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नई दिल्ली,(नसीब सैनी)।

अयोध्या मामले पर बुधवार को सुनवाई पूरी हो गई। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। उम्मीद है कि एक महीने के भीतर फैसला आ जाएगा। आज सुनवाई शुरू होते ही एक वकील ने कोर्ट से कहा कि उन्हें दलीलें रखने के लिए एक घंटे का समय चाहिए, तब चीफ जस्टिस ने कहा कि आज हर हाल में दलीलें खत्म होंगी, ‘एनफ इज एनफ’। 

सुन्नी वक्फ़ बोर्ड की अपील वापस लेने पर कोर्ट में नहीं हुई कोई चर्चा 
सुन्नी वक्फ़ बोर्ड की अपील वापस लेने के मामले में कोर्ट में कोई चर्चा नहीं हुई। रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि कब्जे का दावा करने से पहले यह साफ होना चाहिए कि क्या कब्जा कानूनी है और क्या यह प्रतिकूल है लेकिन मुस्लिम पक्षकारों की विवादित जमीन के कब्जे को लेकर दी गईं दलीलें स्पष्ट नहीं हैं। वैद्यनाथन ने कहा कि इस बात के कुछ साक्ष्य हैं कि 1857 से 1934 के बीच मुस्लिम पक्ष विवादित स्थल पर शुक्रवार को नमाज पढ़ता था लेकिन 1934 के बाद नमाज पढ़ने का कोई साक्ष्य नहीं है। दूसरी तरफ हिन्दू हमेशा पूजा करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि किसी दूसरी जगह को नहीं कहा जा सकता लेकिन मुस्लिम पक्ष कहीं भी नमाज पढ़ सकता है।

सेवादार होने के असली हकदार पर निर्वाणी और निर्मोही अखाड़ा भिड़े  वैद्यनाथन के बाद चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने गोपाल सिंह विशारद के वकील रंजीत कुमार से पूछा कि आप कल कह रहे थे कि आप दो मिनट का समय लेंगे, तब रंजीत कुमार ने कहा कि ये मैंने कल के लिए कहा था लेकिन आज नया दिन है, हमें कुछ ज्यादा समय चाहिए। रंजीत कुमार ने कहा कि मैं वहां काफी पहले से पूजा करता रहा हूं। मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज की जानी चाहिए। रंजीत कुमार के बाद निर्वाणी अखाड़ा और महंत हनुमान गढ़ी की तरफ से वरिष्ठ वकील जयदीप गुप्ता ने जब दलीलें शुरू की तो निर्मोही अखाड़े की ओर से विरोध किया गया। तब चीफ जस्टिस ने कहा कि उन्हें पांच मिनट का समय दिए जाने से कोई नुकसान नहीं है। निर्वाणी अखाड़े की तरफ से कहा गया कि वे सेवादार होने के असली हकदार हैं न कि निर्मोही अखाड़ा। जयदीप गुप्ता ने कहा कि स्वर्गीय बाबा अभिराम दास ही विवादित स्थल के पुजारी थे और अब उनके चेले बाबा धर्मदास को सेवादार का अधिकार है। उन्होंने 1949 में विवादित स्थल के अंदर मूर्ति रखी।

…जब राजीव धवन ने नक्शे की कॉपी फाड़ डाली
जयदीप गुप्ता के बाद हिदू महासभा की ओर से वकील विकास सिंह ने पूर्व आईपीएस अफसर किशोर कुणाल की ‘अयोध्या रिविजिटेड’ नामक एक किताब का हवाला देना चाहा। राजीव धवन ने रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं बताते हुए इसका विरोध किया। विकास सिंह ने एक नक्शा रखा तो उसका भी धवन ने विरोध करते हुए अपने पास मौजूद नक्शे की कॉपी फाड़ डाली। एक और वकील भी जिरह के बीच में बोलने लगे तो चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि सुनवाई अभी बंद कर देंगे।
विकास सिंह ने कहा कि अंग्रेज़ों ने इमारत के बाहर रेलिंग लगा दी, इसलिए हिन्दू वहीं तक जाते और पूजा कर लौट आते थे। यह ऐसा ही है जैसे तिरुपति में भी आपको देवता के बिल्कुल करीब नहीं जाने दिया जाता। लोग एक सीमा से पूजा करते हैं। इसलिए रेलिंग से आस्था पर कोई फर्क नहीं पड़ा। विकास सिंह ने गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1858 का हवाला देते हुए कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड 1858 में ही खत्म कर दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की दलीलें नहीं सुनी विकास सिंह के बाद निर्मोही अखाड़े की ओर से वरिष्ठ वकील सुशील कुमार जैन ने चीफ जस्टिस से डेढ़ घंटे का समय मांगा लेकिन चीफ जस्टिस ने कहा कि आप इसे एक बजे तक खत्म कर लीजिए। हमारे पास समय नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की दलीलें नहीं सुनीं। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि उनकी याचिका वर्तमान सुनवाई से हटा दी गई हैं और कोर्ट केवल अपील पर ही सुनवाई करेगा। तब सुब्रमण्यम स्वामी ने कोर्ट से जाने की अनुमति मांगी।

मुस्लिम पक्ष ने कहा, मस्जिद के पुनर्निर्माण का हमें हक
पुनरुद्धार समिति की ओर से वकील पीएन मिश्रा ने बाबरनामा का उल्लेख करते हुए कहा कि बाबर इस्लाम का पालन करता था। इससे मुस्लिम पक्ष की ये दलील गलत होती है कि बाबर एक शासक था और वो किसी कानून से बंधा हुआ नहीं था। पीएन मिश्रा जब हिन्दुओं द्वारा लगातार पूजा करने का इतिहास बताने लगे तो जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि वे केवल लिमिटेशन पर दलीलें रखें। धवन ने के परासरन की उन दलीलों का विरोध किया जिसमें कहा गया था कि बाबर कानून से बंधा हुआ नहीं था। धवन ने कहा कि उनका दावा अंदरूनी चाहरदीवारी तक सीमित नहीं है बल्कि बाहरी इलाकों तक है। धवन ने कहा कि बाबरी मस्जिद बनाई जानी चाहिए। मस्जिद के पुनर्निर्माण का हमें हक है। वहां ईंटें मौजूद हैं और जमीन वक्फ की है।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने धवन को व्यक्तिगत कमेंट करने से रोका 
मुस्लिम पक्ष की ओर से वकील राजीव धवन ने अपनी अंतिम दलीलें रखते हुए कहा कि वे अपना पक्ष एक-एक कर रखेंगे तब जस्टिस अब्दुल नजीर ने कहा कि उसमें एक सवाल ये भी है कि क्या सुन्नी वक्फ बोर्ड की याचिका सुनवाई योग्य है। धवन ने हिंदू महासभा की याचिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनमें आठ गुट हैं और चार अलग-अलग दलीलें हैं। धवन ने पूछा कि क्या हिन्दू महासभा इतनी ईमानदार है कि कोर्ट के सामने सही तथ्य रखे। धवन ने निर्वाणी अखाड़ा की ओर से महंत धर्मदास की याचिका पर कहा कि उन्हें सेवादार कभी नहीं कहा गया बल्कि यही कहा गया कि वे पुजारी हैं। धवन ने जब कुछ दस्तावेज के अनुवाद के बारे में बात की तो पीएन मिश्रा ने उनके बारे में विस्तार से बताने की कोशिश की। इस पर धवन ने कहा कि हमने आपकी दलीलों को सुना है, उसमें कोई दम नहीं है। पीएन मिश्रा की दलीलें मूर्खतापूर्ण हैं। वे भूमि राजस्व के बारे में कुछ नहीं जानते हैं। तब जस्टिस चंद्रचूड़ ने धवन से व्यक्तिगत कमेंट नहीं करने को कहा।

मध्यस्थता पैनल ने सीलबंद लिफाफे में सेटलमेंट दाखिल किया
अयोध्या मामले पर मध्यस्थता कर रहे पैनल ने आज सुप्रीम कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में सेटलमेंट दाखिल किया। सेटलमेंट में क्या है ये अभी बाद में साफ होगा। हालांकि इससे जुड़े सूत्रों का कहना है कि पक्षकारों में व्यापक सहमति बनी है कि हिन्दू पक्षकारों को मंदिर निर्माण की इजाजत दी जाए। इसके साथ ही एक बड़ा भूखंड मुसलमानों को सरकारी खर्च पर मस्जिद के निर्माण के लिए दिया जाए। सेटलमेंट में मुस्लिम पक्ष की इस मांग का भी जिक्र किया गया है कि रेलिजियस प्लेसेज एक्ट 1991 को लागू किया जाए जिसमें कहा गया है कि सभी धार्मिक स्थलों पर 1947 के पहले की यथास्थिति बरकरार रखी जाए।

संविधान बेंच ने अयोध्या मामले पर 40 दिन सुनवाई की
पांच जजों की संविधान बेंच ने अयोध्या मामले पर 40 दिन सुनवाई की। इस मामले पर 6 अगस्त से सुनवाई चल रही है। संविधान बेंच में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोब्डे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अब्दुल नजीर, और जस्टिस अशोक भूषण शामिल हैं। पिछले दो अगस्त को कोर्ट ने पाया था कि अयोध्या मामले पर मध्यस्थता प्रक्रिया असफल हो चुकी है। उसके बाद कोर्ट ने रोजाना सुनवाई करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त मध्यस्थता कमेटी ने पिछले एक अगस्त को अपनी फाइनल रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी थी। पिछले 18 जुलाई को कोर्ट ने मध्यस्थता कमेटी से यह रिपोर्ट मांगी थी। पिछले 8 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व जज एफ एम कलीफुल्ला, धर्म गुरु श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ वकील श्रीराम पांचु को मध्यस्थ नियुक्त किया था।

नसीब सैनी

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मोदी सरकार पिता के साए जैसी : ‘विजय भवभारत’

भवभारत’ विदेश से लाए युवक ने कहा है कि ऐसी व्यवस्था तो उसने जर्मनी जैसे यूरोपीय देशों में भी नहीं देखी है। शख्स बता रहा है कि सरकार ने करीब 70 किलोमीटर दूर सभी पैसेंजर को कोरोन्टाइन किया है

विदेश से लाए युवक ने कहा है कि ऐसी व्यवस्था तो उसने जर्मनी जैसे यूरोपीय देशों में भी नहीं देखी है। शख्स बता रहा है कि सरकार ने करीब 70 किलोमीटर दूर सभी पैसेंजर को कोरोन्टाइन किया है । बिल्डिंग को लगातार सैनेटाइज किया जा रहाहै। उन्हें 24 घंटे की देख रेख में रखा है, जहॉं बेहतरीन सुविधाएँ हैं। भवभारत’ विदेश से लाए युवक ने कहा है कि ऐसी व्यवस्था तो उसने जर्मनी जैसे यूरोपीय देशों में भी नहीं देखी है। शख्स बता रहा है कि सरकार ने करीब 70 किलोमीटर दूर सभी पैसेंजर को कोरोन्टाइन किया है। बिल्डिंग को लगातार सैनेटाइज किया जा रहा है। उन्हें 24 घंटे की देख रेख में रखा है , जहॉं बेहतरीन सुविधाएँ हैं ।

विजय भव भारत का फेसबुक पेज, 24,000 से अधिक फौलोवेर्स.

जहाँ एक और पूरी दुनिया कोरोना (महामारी) से लडर ही है, हर देश इसकी रोकथाम में लगा हुआ है अपने नागरिकों के बचाव में हर कोशिश कर रहा है, वहीं भारत की कोशिशों की विश्वपटल सरहाना हो रही है। कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी भले इस वैश्विक महामारी को मोदी सरकार पर हमले के मौके की तरह तलाश कर रहे हैं, लेकिन सोशल मीडिया में सरकार की तारीफ करते हुए कुछ लोगों ने जो आपबीती शेयर की है जो बेहद मार्मिक है। हालफिलाहल इटली से लाई गई एक युवती के पिता ने अपनी भावना साझा कि, वो सालों से सरकार की आलोचना कर रहे थे। लेकिन, अब उन्हें एहसास हो रहा है कि मोदी सरकार पिता के साए (fatherly figure) जैसी है। विदेश से लाए गए एक युवक ने कहा है कि ऐसी व्यवस्था तो उसने जर्मनी जैसे यूरोपीय मुल्कों में भी नहीं देखी है।टाइम्स ऑफ इंडिया के पत्रकार रोहन दुआ ने इटली से लौटी युवती के पिता का पत्र शेयर किया है। इस पत्र में उन्होंने इंडियन एंबेसी, भारत सरकार और विशेषत: नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया है। पिता के मुताबिक उनकी बेटी मास्टर की पढ़ाई करने इटली के मिलान गई थी। वहॉं हालात बिगड़ने पर उसे वापस लौटने को कहा। जब वह लौटने लगी तो उससे भारत वापस जाने का सर्टिफिकेट माँगा गया। न्होंने खुद इंडियन एंबेसी को संपर्क करने की कोशिश की। मगर मिलान में एंबेसी का कार्यालय बंद होने के कारण ऐसा नहीं हो पाया। उन्होंने इंडियन एंबेसी के अन्य लोगों को मेल के जरिए संपर्क किया और रात के 10:30 बजे उनकी बेटी ने फोन पर बताया कि उसकी बात दूतावास में हो गई है और वह अगली फ्लाइट से भारत लौट रही है।

पिता के मुताबिक, वे सालों से भारतीय सरकार को कोस रहे थे। लेकिन मोदी सरकार में पिता का चेहरा है। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी 15 मार्च को भारत आई और आईटीबीपी अस्पताल में उसकी स्वास्थ्य संबंधी, खान-पान संबंधी सभी जरूरतों का ख्याल रखा गया। गौरतलब है कि इटली उन देशों में शामिल है जो कोरोना संक्रमण से सर्वाधिक प्रभावित हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कोरोना वायरस के संक्रमण से निबटने के लिए सरकार ने 400 बेड का कोरोन्टाइन वार्ड तैयार करवाया है। यहाँ विदेश से लौटने वालों को सीधे दिल्ली एयरपोर्ट से लेकर जाया जाएगा। यहाँ इन सभी लोगों की 14 तक की निगरानी होगी और अगर इनमें कोरोना के लक्षण मिलते हैं तो इन्हें आइसोलेट कर छोड़ा जाएगा। ये कोरोन्टाइन वार्ड नोयडा के सेक्टर 39 में स्थित जिला अस्पताल की नई बिल्डिंग में बना है। यहाँ पर्याप्त संख्या में पैरामेडिकल स्टॉफ तैनात हैं।

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इन टीमों के जरिये समझिये समाज की सच्चाई को: ‘विजय भवभारत’

समाज की सच्चाई को दिखाने का बीड़ा उठाने वालों में से एक नाम ‘विजय भव भारत’ का भी है

21वीं सदी के दो दशक बीतते तक मीडिया को किस तरह से टुकड़े टुकड़े गैंग ने बर्बाद कर दिया और मीडिया ने किस तरह से समाज को बर्बाद किया, यह हम सभी जानते हैं और टुकड़े टुकड़े गैंग व् मीडिया में बैठे उनके नेटवर्क को भी हम समझ चुके हैं. उस नेटवर्क को तोड़ने और मीडिया में जमे इस कचरे की सफाई का जिम्मा जिनसोशल मीडिया के पोर्टलों ने ली है, उनकी श्रृंखला में एक और नाम की चर्चा इस लेख में हम करेंगे. इस बार चर्चा है फेसबुक कैलेंडर पेज –‘विजय भव भारत’ की

विजय भव भारत का फेसबुक पेज, 24,000 से अधिक फौलोवेर्स.

यूँ तो साहित्य समाज का दर्पण कहा जाता था और बाद में मीडिया ने इसकी जगह ले ली, मगर समाज की सच्चाई को समाज का यह दर्पण दिखा नहीं पाया और ख़बरों को व् समाज की सच्चाई को तोड़ मरोड़ कर पेश करने का आरोप मीडिया पर लगने लगा. ऐसे में समाज की सच्चाई को दिखाने का बीड़ा उठाने वालों में से एक नाम ‘विजय भव भारत’ का भी है.

विजय भव भारत

‘विजय भव भारत’ पेज का संचालन फेसबुक पर होता है, जहाँइसे फॉलो करने वाले 24,000 से भी अधिक लोग हैं. यह पेज जाना जाता है समाज में चलने वाले सकारात्मक कामों के प्रचार प्रसार के लिए, जो आम मीडिया कीनज़रों से दूर हैं. इसके साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधियों पर भी यह पेज नज़र रखता है, और उनसे जुडी तकरीबन हर जानकारी अपने दर्शकों तक पहुँचाता है. विजय भव भारत पेज का एक और काम 365दिनों के विशेष घटनाओं को अपने पेज से जनता तक पहुँचाना भी है. इसका एक नाम ‘कैलेंडर विशेष’ भी है. इनके अतिरिक्त समसामयिक घटनाओं पर पोस्ट व् विडियो डालना भी इस पेज का काम है.

सकारात्मक कामों का प्रचार प्रसार:

विजय भव भारत जिस काम में लगा है, शायद वह काम मीडिया का कोई भी तंत्र नहीं कर पायेगा क्योंकि इस काम में मीडिया को मसाला नहीं मिलेगा बल्कि मेहनत करनी पड़ेगी. मीडिया का एक तंत्र जहाँ केवल टीआरपी बढाने और ख़बर बेचने में लगा है, वहीँ सोशल मीडिया पर विजय भव भारत- दुनिया व् भारत की कुछ बेहतरीन सकारात्मक ख़बरें खोज कर ला रहा है और अपने पेज के माध्यम से साझा कर रहा है. सोशल मीडिया से नकारात्मकता हटाने का यह कदम सराहनीय है. समाज की यह सच्चाई जो छिपी हुई है, उसे खोज निकलने का यह काम विजय भव भारत कर रहा है.

कोरोना से बचाव के लिए दुनिया ने अपनाई भारतीय संस्कृति

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधियों पर नज़र:                            दुनिया का सबसे बड़ा गैर सरकारी संगठन है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और समाज निर्माण के काम में इसके योगदान को नकारना मुर्खता होगी. महात्मा गाँधी जी से लेकर अन्य कई महापुरुष संघ के बारे में सकारात्मक विचार रख चुके हैं, ऐसे में इस संगठन के कामकाज पर भी नज़र रखे हुए है. इससे पहले कि मीडिया संघ के कामकाज को तोड़ मरोड़ का या अपने अनुरूप पेश करे, विजय भव भारत संघ के विशिष्ट स्त्रोतों से संघसे जुडी प्रमाणिक ख़बरें लेकर आता है और समाज से उसका क्या लेना देना है, यह भी स्पष्ट करता है.

विश्व के सबसे बड़े गैर सरकारी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधियों पर नज़र.

कैलेंडरविशेष दिन:

विजय भव भारत जिन महत्वपूर्ण सकारात्मक कामों में लगा हुआ है, उनमे से एक कैलेंडर विशेष दिन भी है. साल में 365 दिन होते हैं, और तकरीबन हर दिन महत्वपूर्ण होता है. उन सभी दिनों की विशेषता और महत्त्व बताने का काम भी विजय भव भारत करता है. चाहे किसी महापुरुष का जन्मदिन या पुण्यतिथि हो या कोई स्मरणीय घटना की बात हो, उनके महत्त्व को समझाने का काम भी विजय भव भारत करता है.

16 सितम्बर 1947, गाँधीजी द्वारा छूआछूत की समाप्ति पर राष्ट्रीयस्वयंसेवक संघ के काम पर चर्चा.

समसामयिक घटनाओं पर नज़र:

जब समाज में सकारात्मकता भरने का काम और समाज से नकारात्मकता हटाने का काम विजय भव भारत कर रहा है तो यह तो असंभव है कि ऐसे में समकालीन घटनाओं को न जोड़ा जाये. वर्तमान में घटने वाली हर घटना पर समाज की प्रतिक्रिया, सही ख़बर, तथ्य परक, और प्रमाणिक ख़बरें विडियो और पोस्टर के माध्यम से अपने फौलोवर्स तक विजय भव भारत पहुँचाता है.

राम मंदिर पर शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिज़वी का स्पष्ट बयान. 10 लाख से ज्यादा लोगों द्वारा देखा गया, 50 हज़ार से ज्यादा लोगों द्वारा साझा किया गया.

अपने इस प्रयास के माध्यम से विजय भव भारत ने सोशल मीडिया पर एक ऐसा विमर्श खडा किया है जो सकारात्मक है, प्रमाणिक है और नकारात्मकता को तोड़ने वाला है. जिन ख़बरों में मीडिया की दिलचस्पी नहीं होती मगर समाज के लिए आवश्यक है – उन्हें खोज कर लाने का काम यह पेज कर रहा है.

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दर्पण के ज़रिए समझिये समाज की सच्चाई

टुकड़े टुकड़े मीडिया की सफाई करने का यानि सोशल मीडिया पर फ़ैल रही नकारात्मकता, नफरत और झूठे विमर्श को ख़त्म करने का बीड़ा उठाया है

भारत जैसे बड़े देश में व् दुनिया भर में मीडिया को लोकतंत्र का चौथा अथवा महत्वपूर्ण स्तम्भ बताया जाता है. मीडिया मतलब हर वह माध्यम है जिससे जनता तक जानकारियाँ, विचार व् नीतियाँ पहुँच सके. इस मीडिया के तंत्र में समाचार पत्र, पुस्तक, पत्रिकाएं, टेलीवीजन, रेडियो, इन्टरनेट इत्यादि हैं. टीवी समाचार चैनल करीब 90 के दशक में भारत में आना शुरू हुए, उससे करीब 150 वर्ष पूर्व ही समाचार पत्र, पत्रिकाएं प्रचलित हो चुकी थीं और 90 के दशक तक समाज का दर्पण समाचार पत्र बन चुके थे. ‘राष्ट्र की आवाज़: समाचार पत्र’- ऐसे वाक्य प्रचलित हो चुके थे और जो समाचार पत्र कहे वही जन जन की आवाज़ है; ऐसा माना जाने लगा था. देश में टीवी समाचार चैनल और भी तेज़ी से स्थापित हुए और समाचार पत्र के पत्रकार व टेलीविजन चैनल के पत्रकारों ने मिलकर मीडिया की प्रमाणिकता को लगभग समाप्त कर दिया और अपने निजी स्वार्थ के चक्कर में देश का बंटाधार करने लगे और देश तोड़ने में लग गए. ऐसे में समय बीता और 21वीं सदी में सोशल मीडिया का आगमन हुआ. इन्टरनेट के काल में अब दुनिया समाचार इन्टरनेट से ही प्राप्त करती है और जनता आज स्वयं रिपोर्टर है. ऐसे अनेक स्टार्टअप लोगों ने खुद शुरू किये और जनता तक बात पहुँचाई; हालाँकि प्रमाणिक यह माध्यम भी बहुत ज्यादा नहीं है, मगर मीडिया की प्रमाणिकता जिस कारण समाप्त हुई उसका कारण बेईमानी और पैसों का शक्ति का लोभ है, जो आम जनता में नहीं होती, इसलिए यह मनना कठिन है कि लोग अपनी ख़बर बेचेंगे, बदलेंगे या उस ख़बर की नीयत बदल देंगे, जो काम मीडिया करती है. 

मीडिया में फैले इस कुकर्म से लड़ने का काम सोशल मीडिया से शुरू हुआ, और एक एक पत्रकार, एक एक प्रभावशाली व्यक्ति की पोल खुलनी शुरू हो गयी. मगर उन्हें बचाने के लिए सोशल मीडिया पर भी उन्मादी लोग आ गए और इससे पहले कि सोशल मीडिया पर भी ऐसा कचरा फैले, कुछ स्वायत्त मीडिया पोर्टल ने इन देश तोड़ने वाली गैंग के खिलाफ सफाई का बीड़ा उठाया है. उनमे से एक नाम है- एक दर्पण.

एक दर्पण एक मीडिया पोर्टल है, जो फेसबुक, इन्स्ताग्राम, ट्विटर व् हेलो एप्प पर उपलब्ध है. इस पोर्टल ने टुकड़े टुकड़े मीडिया की सफाई करने का यानि सोशल मीडिया पर फ़ैल रही नकारात्मकता, नफरत और झूठे विमर्श को ख़त्म करने का बीड़ा उठाया है, और उसके लिए तीन मुख्य कामों पर ध्यान दिया है: त्वरित प्रतिक्रिया, फैक्ट फाइंडिंग, स्मरणीय दिवस. फेसबुक पेज के माध्यम से सही सूचना जन – जन तक पहुँचाता है. इस पेज को लाइक और फॉलो करने वालों की संख्या इन सभी सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट पर 90,000 से अधिक है.

सोशल मीडिया के कचरे को हटाने वाला पोर्टल – एक दर्पण

95,000 से अधिक लोगों द्वारा फॉलो किया गया.

Quick Response: समाज की प्रतिक्रिया

एक दर्पण का सबसे पहला और महत्वपूर्ण काम है समाज में घटने वाली किसी भी घटना पर समाज की प्रतिक्रिया को रखना. समाज के मत को टुकड़े टुकड़े मीडिया तोड़ मरोड़ कर पेश करता है, जिससे समाज का असली भाव व् प्रतिक्रिया पता नहीं लग पाती. ऐसे में विमर्श बदल कर चलाया जाता है, जिसका नुकसान अंततः समाज को ही झेलना पड़ता है. इस समस्या से बचने के लिए ‘एक दर्पण’ त्वरित प्रतिक्रिया यानि quick response देता है यानि जो समाज का स्वर है उसी को आगे रखता है, कोई ग़लत ख़बर या विचार समाज में अगर चल रहा है, तो उस पर समाज का सही जवाब देना एक दर्पण का काम है. कोई देरी किये बिना ही टुकड़े टुकड़े गैंग के विमर्श को समाज की ओर से जवाब देना एक दर्पण की विशेषता है.

15 लाख से ज़्यादा लोगों द्वारा देखा गया, 36 हज़ार से ज्यादा लोगों ने साझा की पोस्ट.

Fact Finder: ख़बरों में फैले सचझूठ को सामने लाना

सोशल मीडिया के आने के साथ जहाँ कई अच्छी बातें आई वहीँ कई दुष्परिणाम भी सामने आये. जैसा कि ऊपर बताया भी हमने कि प्रमाणिकता की कमी तो सोशल मीडिया पर भी है, ऐसे में कोई भी झूठी ख़बर या ऐसी ख़बर चल पड़ती है जिसमें पूरी सच्चाई न हो. ऐसे में समाज भटक जाता है, जिससे अफवाह और दंगों की स्थिति पनपती है. इस परेशानी से लड़ने का भी बीड़ा ‘एक दर्पण’ ने उठाया है. फैक्ट फाइंडिंग यानि तथ्य परखने का काम भी एक दर्पण बखूबी निभा रहा है. ऐसे कई ख़बर व् वीडियों हैं जिनकी तथ्यपरकता एक दर्पण ने की है, और इस काम को आगे भी करता रहेगा.

जामिया के लाइब्रेरी विडियो के सत्य को बताता एक दर्पण

स्मरणीय दिवस: हमारे गौरवशाली दिवस

जिस इतिहास को और जिस गौरवशाली वर्तमान को आज टुकड़े टुकड़े मीडिया दिखाने से मना करता और जिससे बचता है, वह हमारी पिछली पीढ़ी को हमारा अभिवादन होगा और आने वाली पीढ़ी के लिए सीख होगी. ऐसे कई दिवस, कई महापुरुष, कई महत्वपूर्ण घटनाओं का स्मरण एक दर्पण अपने फ़ोटो, विडियो और टाइमलाइन के माध्यम से अपने दर्शकों तक पहुँचाता है.

गौरवशाली दिवस का स्मरण कराता एक दर्पण

इन सभी बातों को ध्यान में रखकर मीडिया के टुकड़े टुकड़े विमर्श को जवाब देने का काम और समाज के विचारों को स्थापित करने का काम एक दर्पण कर रहा है

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