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भोपाल, 31 मई ।

    साहित्य अकादमी की वेबसाइट का लोकार्पण आज

मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद भोपाल द्वारा साहित्य अकादमी की वेबसाइट का आज (शुक्रवार को) लोकार्पण किया जाएगा। भोपाल के स्वराज भवन में शाम 6.00 बजे आयोजित भव्य कार्यक्रम में संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव मनोज कुमार श्रीवास्तव इस वेबसाइट का लोकार्पण करेंगे।
साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ उमेश कुमार सिंह ने बताया कि इसके बाद निरंतर सृजन-संवाद में रमाकान्त दुबे-वरिष्ठ साहित्यकार, भोपाल की अध्यक्षता में होगा। निदेशक डॉ उमेश कुमार सिंह ने भोपाल के सभी साहित्यकारों, शोधार्थियों, रचनाकारों से इस प्रतिष्ठित आयोजन में उपस्थिति का आग्रह किया है।

चौथा खंभा न्यूज़ .com / नसीब सैनी/अभिषेक मेहरा

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बच्चों के डाटा बेस को परिवार पहचान पत्र के साथ मैपिंग को लेकर हुई बैठक

बच्चों के डाटा बेस को परिवार पहचान पत्र के साथ मैपिंग को लेकर हुई बैठक

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कैथल। सचिवालय स्थित विडियो कॉन्फ्रेंस हॉल में अतिरिक्त उपायुक्त समवर्तक सिंह ने डीपीओ व सुपरवाइजर के साथ बच्चों के डाटा बेस को परिवार पहचान पत्र के साथ मैपिंग को लेकर समीक्षा बैठक की। जिले में 96 हजार 651 बच्चे आंगनवाड़ी केंद्रों में आते हैं, जिसमें से 45 हजार 458 बच्चों का मैपिंग का कार्य हो चुका है। यह कार्य 1284 वर्करों द्वारा किया जा रहा है।


एडीसी समवर्तक ने डीपीओ व सुपरवाइजर के साथ की समीक्षा बैठक


अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि कार्य को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। यह कार्य बहुत महत्वपूर्ण है। सरकार की योजनाओं का लाभ हर व्यक्ति तक पहुंचाना संबंधित विभागों का कार्य है। इस कार्य में किसी प्रकार की कोताही सहन नहीं की जाएगी। इस दौरान एडीसी ने सुपरवाइजर्स के सामने आ रही समस्याओं पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि सभी कर्मचारी आंगनवाड़ी वर्करों के साथ मिलकर जल्द से जल्द इस कार्य को पूरा करें, जो भी अपने क्षेत्र का कार्य सबसे पहले करेगा, उसे विशेष तौर पर सम्मानित भी किया जाएगा। इस दौरान प्लानिंग अधिकारी विजेंद्र सिंह, सीडीपीओ कमलेश गर्ग, डीपीओ अनिता नैन,  निर्मला, सुपरवाईजर मीनू, दीप्ति, पूनम, निशा आदि मौजूद रहे

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बदहाल सफाई व्यवस्था को लेकर निवर्तमान पार्षद, शहर के मौजिक लोग के साथ विधायक से मिले

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कैथल। शहर की सफाई, स्ट्रीट लाइट, विकास कार्यों, हाउस टैक्स ब्रांच की चरमराई व्यवस्था और नप अधिकारियों की कार्य प्रणाली को लेकर निवर्तमान पार्षद एवं अन्य मौजिज शहरवासी सिटी विधायक लीला राम से उनके निवास पर मिले। यहां बंद कमरे में हुई मीटिंग में इन लोगों ने नप की व्यवस्था को लेकर खूब रोष जताया।

शहर की समस्याओं को लेकर विधायक से मिले निर्वतमान पार्षद एवं शहरवासी।

विधायक से मिलने के लिए वार्ड 30 से पूर्व चेयरमैन यशपाल प्रजापति, वार्ड 19 से निवर्तमान पार्षद प्रवीण शर्मा, वार्ड 31 से निवर्तमान पार्षद आशा रानी, वार्ड 27 से शहरवासी एडवोकेट धर्मवीर भोला, वार्ड 5 से संजय गर्ग, वार्ड 27 से हरीश सचदेवा, वार्ड 18 से प्रवीण सिंगला, वार्ड 24 से रजत थरेजा उनके निवास पर पहुंचे थे। इन जनप्रतिनिधियों ने विधायक से स्पष्ट कहा कि मुख्य अधिकारियों के कारण शहर में नप द्वारा दी जाने वाली सेवाएं बेहाल हैं। शहर में सफाई, स्ट्रीट लाइट, सड़कों का हाल बेहाल है। विकास कार्य के टेंडर बार-बार कैंसिल किए जा रहे हैं। विधायक ने आश्वासन दिया कि एक सप्ताह में नगर परिषद में बदलाव दिखेगा। कैथल में काम करने वाले अधिकारियों को लाया जाएगा। जो काम नहीं करते उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।

वे सफाई से स्वयं संतुष्ट नहीं, एसआई का करवा दिया था तबादला : विधायक लीला राम ने बताया कि उन्होंने शिकायतों के बाद एसआई का तबादला करवा दिया था। लेकिन शहर के मौजिज लोगों ने प्रेशर देकर तबादला रुकवा दिया। उन्होंने स्वयं शहर का दौरा कर सफाई न होने पर कचरे की कई बार डीसी, ईओ और एसआई को फोटो भेजी। वे स्वयं सफाई व्यवस्था से संतुष्ट नहीं हैं।

प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच कर्मी काम की बजाए कटवाते हैं चक्कर : निर्वतमान पार्षद एवं मौजिज लोगों ने विधायक को बताया कि प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच कर्मी आम शहरवासियों के काम करने की बजाए चक्कर कटवाते रहते हैं। फाइलें गुम होना, अस्समेंट के लिए कई-कई दिनों तक चक्कर लगवाना, शिकायतों पर अधिकारियों द्वारा सुनवाई न करना, अप्रूवड कॉलोनियों को अवैध बताना जैसी आम शिकायतें हैं।

मेरा मोबाइल नंबर ब्लैक लिस्ट में डाला : वार्ड 24 से पार्षद महेंद्र थरेजा के पुत्र रजत थरेजा ने बताया कि एसआई को सफाई के लिए वे बार-बार कहते हैं। लेकिन पहले तो उन्होंने फोन उठाना बंद कर दिया। अब तो उनका नंबर भी ब्लैक लिस्ट में डाल दिया गया है। अब वे किससे कहें कि वार्ड में सफाई नहीं हो पा रही है। वहीं दूसरे मौजिक लोगों ने भी कहा कि अधिकारी शहरवासियों के फोन नहीं उठाते।

माइनस 31 प्रतिशत पर काम लेने वाले कैसे करेंगे काम : सीएम ग्रांट से काम न होने पर विधायक ने कहा कि जल्द ही नए टेंडर लगाए जाएंगे। कुछ टेंडर लगे हुए हैं। बार-बार टेंडर कैंसिल किए जाने के पीछे उन्होंने बताया कि टेंडर 31 प्रतिशत माइनस में भरे गए थे। जिस कारण टेंडर कैसिंल किए गए थे। बता दें कि नप अधिकारियों ने पांच करोड़ के टेंडर कैंसिल किए थे।

उन्होंने बताया कि डोर-टू डोर का टेंडर जल्द लगेगा। पिछला टेंडर गलत एजेंसी के हाथ में चला गया था। एजेंसी जानबुझ कर काम नहीं कर रही है। जिस कारण टेंडर को कैंसिल करना पड़ा था।

ऐसा पहली बार जब पार्षद सिटी विधायक से मिले

ऐसा पहली बार हुआ कि निवर्तमान पार्षद एवं पार्षद पति जन समस्याओं को लेकर सिटी विधायक से मिले। जबकि लीला राम करीब दो साल से विधायक हैं। जब विधायक से पूछा कि क्या निवर्तमान पार्षद इससे पहले भी सामूहिक रूप से जन समस्या लेकर आए थे, तो उन्होंने कहा कि इस तरह की मीटिंग पहली बार हो रही हैं। लेकिन फोन पर या फिर मिल कर ये लोग जरुर समस्याएं बताते रहते हैं।

पार्षदों ने विधायक लीला राम के सामने ये डिमांड रखी

सभी वार्डों में 10 से 20 लाख रुपए से सड़कों पर पैच वर्क हो। सभी वार्डों में 10-20 प्वाइंट नए लगाए जाएं ताकि राेशनी बढ़े। काम न करने वाले अधिकारियों को बदला जाए। सीएम ग्रांट से जल्द काम करवाए जाएं। डोर टू डोर एवं सफाई व्यवस्था बेहतर की जाए।

नगर परिषद में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। कुछ अधिकारियों के बदलियां भी करवाई, लेकिन फिर भी अधिकारी लाइन पर नहीं आए। इस मामले में सीएम से मिलकर जल्द सख्त कार्रवाई करेंगे।-लीला राम, विधायक, हलका कैथल।

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डस्टबिन में भ्रष्टाचार:एजेंसी ने हेल्थ ब्रांच स्टाफ के साथ मिलीभगत कर तैयार कराए थे कम वजन के डस्टबिन, स्पेसिफिक जांच कमेटी ने पकड़ा मामला, 500 के बजाय 420 किलाे मिले

डस्टबिन में भ्रष्टाचार:एजेंसी ने हेल्थ ब्रांच स्टाफ के साथ मिलीभगत कर तैयार कराए थे कम वजन के डस्टबिन, स्पेसिफिक जांच कमेटी ने पकड़ा मामला, 500 के बजाय 420 किलाे मिले

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हिसार । नगर निगम के डस्टबिन टेंडर में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। टेंडर लेने वाली एजेंसी ने हेल्थ ब्रांच के स्टाफ के साथ मिलीभगत कर कम वजन के डस्टबिन तैयार करवा दिए। हालांकि मामला पकड़ में अा गया। स्पेसिफिक जांच करने के लिए गठित कमेटी ने मामले का पटापेक्ष कर दिया।

आजाद नगर स्थित दमकल केंद्र में रखे गए 3 क्यूब के डस्टबिन

दरअसल, मामला कुरूक्षेत्र की एजेंसी का है। एजेंसी ने 500 किलोग्राम के लाेहे के 30 बड़े डस्टबिन बनाने का टेंडर लिया था। इसमें स्पेसिफिकेशन रखी थी कि एक डस्टबिन का वजन 500 किलाेग्राम हाेना चाहिए। एजेंसी ने टेंडर तैयार कर नगर निगम कार्यालय के अधीन डस्टबिन भिजवा दिये। एक डस्टबिन की कीमत करीब 45 से 50 हजार रुपये के बीच रखी थी। निगम ने ये डस्टबिन आजाद नगर स्थित दमकल केंद्र में रखवा दिए।

पढ़िए… कैसे आई मिलीभगत सामने और कैसे पकड़ में आया मामला

जिस एजेंसी काे नगर निगम ने 30 बड़े डस्टिबन बनाने का वर्क ऑर्डर दिया था उस एजेंसी ने जब डस्टबिन तैयार करवाकर रखवाए ताे पेमेंट जारी करने से पहले सामान की स्पेसिफिक वेरिफिकेशन के लिए गठित कमेटी काे जांच के लिए भेजा गया। कमेटी इंचार्ज डीएमसी प्रदीप हुड्डा थे।

उन्हाेंने स्पेसिफिक के हिसाब से सामान जांच लिया मगर वजन नहीं कराया। उन्हाेंने सीएसआई व क्लर्क काे इसका वजन कराने की बात कही। मगर सीएसआई व क्लर्क ने दमकल केंद्र में ही कहा कि साहब वजन कैसे हाे पाएगा। वजन ताे पूरा ही मिलेगा। इस पर डीएमसी काे शक हाे गया।

उन्हाेंने कहा कि बिना वजन यह कैसे तय हाे पाएगा कि स्पेसिफिकेशन सही है। उन्हाेंने गाड़ी में डस्टबिन लाेड करवाकर कहा कि यह उस धर्मकांटा पर ले जाना जहां कंप्यूटराइज पर्ची निकलती हाे। यानी जाे धर्मकांटा मैनुअल पर्ची देगा उसकी मान्य नहीं हाेगी। सीएसआई और काॅन्ट्रेक्ट के क्लर्क ने शहर में आने के बाद डीएमसी काे काॅल की कि साहब सभी मैनुअल वाले ही हैं काेई कंप्यूटराइज पर्ची देने वाला धर्मकांटा नहीं है। 2 घंटे इंतजार के बाद कमिश्नर ने कहा कि आप लाेकेशन बताओ हम वहीं पहुंच रहे।

डीएमसी ने किसी अन्य कर्मचारी से पूछा कि ऐसा काेई धर्मकांटा बताओ। कर्मचारी ने कहा कि साहब निगम कार्यालय के सामने ही है। डीएमसी ने ये डस्टबिन वहीं मंगवा लिये। जब वजन किया गया ताे 420 किलाे प्रति डस्टबिन निकला। डीएमसी ने इस मामले में सीएसआई व क्लर्क काे फटकार लगाई और एजेंसी काे लिखा कि जब तक स्पेसिफिकेशन पूरी नहीं हाेती डस्टबिन नहीं रखवाए जाएंगे।

जानिए… अब एजेंसी काे लिखा बिना स्पेसिफिकेशन पूरी किए निगम नहीं करेगा सामान की पेमेंट

अब नगर निगम ने कुरुक्षेत्र की एजेंसी काे लिखा है कि जाे डस्टबिन भेजे गए थे वे स्पेसिफिकेशन के हिसाब से सही नहीं है। ऐसे में नगर निगम इसकी पेमेंट जारी नहीं करेगा। अधिकारियाें का कहना है कि अगर टेंडर के अनुरूप स्पेसिफिकेशन पूरी की जाएगी ताे ही डस्टबिन रखवाए जाएंगे वरना एजेंसी अपने डस्टबिन वापस ले जा सकती है।

3 क्यूब के बड़े डस्टबिन बनवाए गए थे। स्पेसिफिकेशन वेरिफिकेशन के लिए कमेटी ने जब इनका वजन कराया ताे इनमें 500 किलोग्राम के बजाय 420 किलाेग्राम वजन मिला। इस मामले में सीएसआई व क्लर्क की भूमिका संदिग्ध मिली थी।” -प्रदीप हुड्डा, डिप्टी म्युनिसिपल कमिश्नर, नगर निगम।

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