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सूचना आयोगों में खाली पड़े पदों पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें केंद्र और 9 राज्य : सुप्रीम कोर्ट

—पश्चिम बंगाल, आंध्रप्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात, केरल और कर्नाटक सरकार को निर्देश

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नई दिल्ली,(नसीब सैनी)।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग और राज्य सूचना आयोगों में खाली पड़े पदों पर नियुक्ति के लिए दिशा-निर्देश जारी करने की मांग करनेवाली याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और 9 राज्य सरकारों को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

याचिका आरटीआई कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज ने दायर किया है। याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश के बावजूद केंद्रीय सूचना आयोग और राज्य सूचना आयोगों में खाली पड़े पदों को नहीं भरा गया है। अंजलि भारद्वाज की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों ने नियुक्ति के लिए उम्मीदवारों का चयन भी नहीं किया है।
दरअसल,  दिसम्बर 2018 में केंद्र सरकार ने कहा था कि केंद्रीय सूचना आयोग में खाली पद जल्द ही भर लिए जाएंगे। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि उसे केंद्रीय सूचना आयुक्त के लिए 65 और सूचना आयुक्तों के लिए 280 आवेदन मिले हैं। योग्य नामों का चयन कर लिया गया है।

केंद्र सरकार ने कहा कि इस बारे में जल्द ही अंतिम निर्णय ले लिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा कि वो आवेदकों के नाम, सेलेक्शन का पैमाना और सर्च कमेटी का ब्यौरा कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग की वेबसाइट पर डालें।
पहले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार, पश्चिम बंगाल, आंध्रप्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात, केरल और कर्नाटक सरकार को निर्देश दिया था कि वे केंद्रीय और राज्य सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के लिए उठाए गए कदम पर प्रगति रिपोर्ट दाखिल करें।

सूचना का अधिकार कानून के तहत सूचना आयोग पाने संबंधी मामलों के लिए सबसे बड़ा और आखिरी संस्थान है। हालांकि सूचना आयोग के फैसले को हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। सबसे पहले आवेदक सरकारी विभाग के लोक सूचना अधिकारी के पास आवेदन करता है। अगर 30 दिनों में वहां से जवाब नही मिलता है तो आवेदक प्रथम अपीलीय अधिकारी के पास अपना आवेदन भेजता है।

नसीब सैनी

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घाटी में हालात सामान्य, प्रशासन के निर्णय के बाद होगी नेताओं की रिहाईः अमित शाह

—शाह सदन में प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस नेता अधीर रंजन के पूरक प्रश्न का जवाब दे रहे थे।

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नई दिल्ली, (नसीब सैनी)

केंद्र सरकार ने कहा है कि कश्मीर घाटी में स्थिति सामान्य है और प्रशासन के द्वारा निर्णय लिए जाने के बाद एहतियात के तौर पर गिरफ्तार किए गए राजनीतिक दलों के नेताओं को रिहा कर दिया जाएगा।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मंगलवार को लोकसभा में कहा कि जहां तक घाटी और स्थानीय जनता का सवाल है तो उनकी स्थिति सामान्य है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने कहा था कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने पर  घाटी में दंगे हो जाएंगे, किंतु ऐसा कुछ नही हुआ। उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि जहां तक कांग्रेस की स्थिति का सवाल है तो वह उसे सामान्य नहीं कर सकते।

शाह सदन में प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस नेता अधीर रंजन के पूरक प्रश्न का जवाब दे रहे थे।

गृहमंत्री ने राजनीतिक दलों के नेताओं की रिहाई के बारे में कहा कि सरकार को किसी को भी ज्यादा दिन हिरासत में रखने की मंशा नही है और ज्यों ही कश्मीर का प्रशासन निर्णय लेगा नेताओं की रिहाई हो जाएगी। उन्होंने कहाकि कांग्रेस सरकारों के उलट मौजूदा सरकार स्थानीय प्रशासन के कामकाज में दखल नही देती है।

नसीब सैनी

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नागरिकता संशोधन पर अमेरिकी आयोग का बयान एकतरफा और पूर्वाग्रह से ग्रसित : विदेश मंत्रालय

–उन्होंने कहा, “विधेयक उत्पीड़न के शिकार लोगों की वर्तमान कठिनाइयों को दूर करने और उन्हें बुनियादी मानवाधिकार देने से जुड़ा प्रयास है

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नई दिल्ली,(नसीब सैनी)।

विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को ‘अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग’ (यूएससीआईआरएफ) के नागरिकता संशोधन विधेयक और गृहमंत्री अमित शाह पर दिए बयान को एकतरफा और पूर्वाग्रह से ग्रसित बताया है। मंत्रालय का कहना है कि अमेरिका सहित हर देश को अपने नागरिकों की पहचान करने का अधिकार है।

उल्लेखनीय है कि यूएससीआईआरएफ ने नागरिकता संशोधन विधेयक को गलत दिशा में उठाया कदम बताया है और राज्यसभा में विधेयक के पारित होने के बाद अमित शाह पर प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने इस पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि यूएससीआईआरएफ पहले भी इस तरह के बयान देता रहा है और इस बयान में कुछ भी आश्चर्यजनक नहीं है। आयोग का अधूरी जानकारी के साथ कार्यक्षेत्र से बाहर के विषयों पर टांग अड़ाते हुए एकतरफा और पूर्वाग्रह से ग्रसित बयान देना अफसोसजनक है।

उन्होंने कहा कि अमेरिकी आयोग द्वारा नागरिकता (संशोधन) विधेयक पर दिया गया बयान गैर-जरूरी और तथ्यों से परे है। यह विधेयक भारत में पहले से रह रहे कुछ देशों में धार्मिक उत्पीड़न के शिकार अल्पसंख्यकों को शीघ्रता से भारतीय नागरिकता दिए जाने पर विचार करने से जुड़ा प्रावधान है।

उन्होंने कहा, “विधेयक उत्पीड़न के शिकार लोगों की वर्तमान कठिनाइयों को दूर करने और उन्हें बुनियादी मानवाधिकार देने से जुड़ा प्रयास है। इस तरह की पहल का स्वागत किया जाना चाहिए न कि धार्मिक स्वतंत्रता के लिए प्रतिबद्ध लोगों द्वारा इसकी आलोचना की जानी चाहिए।”

रवीश ने कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक किसी भी समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता लेने से नहीं रोकता है। भारत का इस संबंध में रिकॉर्ड पूरी तरह से निष्पक्ष है। उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) किसी भी समुदाय से जुड़े किसी भी भारतीय से उसकी नागरिकता छीनने नहीं जा रहा है।

नसीब सैनी

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भारत से जुड़ेगा थाईलैंड का रानोंग बन्दरगाह: थाई राजदूत

– वायु, सड़क व समुद्र परिवहन से ——–भारत-म्यांमार का विश्व में दखल बढ़ेगा- थाई राजकुमारी की भारत यात्रा से भारत-थाई सम्बंध और प्रगाढ़ होंगे

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कुशीनगर,(नसीब सैनी)।

इंडो-थाई के मध्य व्यापार को और विकसित करने के लिए दोनों देश समुद्र के रास्ते से भी जुड़ेंगे। थाईलैंड के रानोंग बंदरगाह व भारत के चेन्नई व अंडमान बन्दरगाह को समुद्र मार्ग से जोड़ने की योजना पर दोनों देश कार्य कर रहे हैं। 

नई दिल्ली स्थित थाईलैंड के राजदूत शूतिनथोन खोंगसक ने मंगलवार को कुशीनगर में पत्रकारों से बातचीत में यह जानकारी दी। राजदूत थाई राजकुमारी के फरवरी 2020 में कुशीनगर आगमन के मद्देनजर तैयारियों का जायजा लेने आए हुए हैं। थाई राजदूत ने बताया कि भारत और थाईलैंड पहले से ही वायुसेवा से जुड़े हुए हैं। दोनों देशों के मध्य सड़क निर्माण का कार्य तेजी से पूर्ण होने की कगार पर है। वायु, सड़क व समुद्र परिवहन की सेवाएं जब एक साथ परिचालन में आएंगी, तब उद्योग व्यापार के क्षेत्र में भारत-म्यांमार का विश्व में दखल बढ़ेगा। 

थाईलैंड ट्राइलैटरल हाई-वे की प्रगति की जानकारी देते हुए राजदूत ने बताया कि भारत के सहयोग से निर्माण चल रहा है। ट्राइलैटरल हाइवे से वियतनाम को भी जोड़ने की योजना है। 1400 किमी ट्राइलैटरल हाइवे का निर्माण भारत के सहयोग से 2016 से निर्माणाधीन है। यह भारत के मोरे से म्यांमार के तामूर नगर होते हुए थाईलैंड के मेई सेत जिले के ताक तक जाएगा। यह भारत को जमीन के रास्ते दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने की योजना है। इन परियोजनाओं के पूर्ण हो जाने के बाद पर्यटन, व्यापार में बढ़ोत्तरी के साथ-साथ सम्बंधित देशों के मध्य मैत्री सम्बंध और गहरे होंगे। 

राजदूत बोले कि कंबोडिया, लाओस व मलेशिया से थाईलैंड का सर्वाधिक बॉर्डर ट्रेड है। सड़क मार्ग से जुड़ जाने से भारत से भी बॉर्डर ट्रेड बढ़ जाएगा। राजदूत बोले कि आसियान देशों को भी सड़क व वायुमार्ग से जोड़ने की योजना है। राजदूत ने विश्वास जताया कि थाई राजकुमारी की भारत भ्रमण यात्रा से हजारों वर्ष से चले आ रहे भारत-थाई सम्बंध और प्रगाढ़ होंगे।

नसीब सैनी

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