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नागरिकता विधेयक अधिकार देता है, छीनता नहीं : अमित शाह

–उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि वह धार्मिक उत्पीड़न का शिकार लोगों को भारत की नागरिकता दिए जाने के राहत संबंधी कदम का विरोध नहीं करें।

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नई दिल्ली,(नसीब सैनी)।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 (नासंवि) किसी धार्मिक समुदाय से अधिकार नहीं छीनता बल्कि पड़ोसी देशों में धार्मिक उत्पीड़न का शिकार अल्पसंख्यकों को अधिकार देता है।

शाह ने लोकसभा में विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक प्रताड़ना का शिकार लोगों को 31 दिसंबर 2020 तक भारत की नागरिकता हासिल हो सकेगी। इन अल्पसंख्यकों में हिन्दू, बौद्ध, जैन, सिख, पारसी और ईसाई शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि इन तबकों के लोग चाहे किसी भी कालखंड में भारत आए हों उन्हें नागरिकता मिल सकेगी। भारत में उनके प्रवास के दौरान उन्होंने संपत्ति अर्जन, आवास निर्माण और नौकरी हासिल करने जैसे जो विशेषाधिकार हासिल किए हैं। वे पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे। देश में अवैध प्रवेश या निवास के लिए उनके खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई में भी उन्हें राहत मुहैया कराई जाएगी तथा वे नागरिकता के लिए आवेदन कर सकेंगे।

गृहमंत्री ने पूर्वोत्तर भारत के राज्यों की चिंताओं का निराकरण करते हुए कहा कि वर्तमान विधेयक के प्रावधानों का उनके उपर कोई असर नही पड़ेगा। अरुणांचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम,त्रिपुरा, मेघालय और मणिपुर में बाहरी लोगों के प्रवेश और निवास के संबंध में  कायम मौजूदा व्यवस्था बरकरार रहेगी।

शाह ने घोषणा की कि पहली बार मणिपुर में पूर्वोत्तर के कुछ अन्य राज्यों की तरह ‘इनर लाइन परमिट’ व्यवस्था लागू की जा रही है। इससे मणिपुर घाटी के लोगों की वर्षों से चली आ रही पुरानी मांग पूरी होगी। ‘इनर लाइन परमिट’ के तहत बाहरी लोगों के प्रवेश और निवास को नियंत्रित किया गया है।

शाह ने कहा कि दुनिया का हर देश शरणार्थी और घुसपैठिए में अंतर करता है । कोई भी देश विदेशी व्यक्ति को मनमाने तरीके से देश में प्रवेश की अनुमति नही देता। हर देश ने नागरिकता के संबंध में कानूनी प्रावधान किए हैं। उन्होंने धर्म के आधार पर भेदभाव किए जाने के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि भारत एक पंथनिरपेक्ष देश है और यहां किसी के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव नही किया जाता।

गृहमंत्री ने कांग्रेस सहित विपक्षी सदस्यों को चुनौती दी कि यदि वे यह साबित कर दें कि यह विधेयक किसी धर्म विशेष  के साथ अन्याय करता है तो वह इस विधेयक को वापस ले लेंगे। उन्होने विपक्षी सदस्यों के इस कथन का भी खंडन किया कि संसद नागरिकता के संबंध में  ऐसा कानून बनाने के लिए सक्षम नही है।

भारत में शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान करने के इतिहास का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि 1947 में देश के विभाजन के बाद लाखों की संख्या में शरणार्थी भारत आए थे और हमने उन्हें सहर्ष स्वीकार किया था। इनमें से बहुत से लोगों ने राजनीति सहित समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में स्थान बनाया। इस संबंध में उन्होंने डॉ मनमोहन सिंह और लालकृष्ण आड़वाणी का उल्लेख करते हुए कहाकि शरणार्थी के रुप में भारत आए ये लोग कालांतर में देश के प्रधानमंत्री और उप-प्रधानमंत्री बनें। उन्होंने कहा कि बंगाली शरणार्थियों के लिए दंडकारण्य योजना, 1971 में बांग्लादेश संकट और अफ्रीकी देश युगांडा से भारतीयों के निष्कासन के घटनाक्रम से प्रभावित लोगों को भारत की नागरिकता प्रदान की गई।

उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि वह धार्मिक उत्पीड़न का शिकार लोगों को भारत की नागरिकता दिए जाने के राहत संबंधी कदम का विरोध नहीं करें।

शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने 31 दिंसबर 2014 को भारतीय नागरिकता कानून 1955 में संशोधन कर भारत आए लोगों के प्रवेश और निवास को कानूनी स्वरुप प्रदान किया था। अब नए विधेयक के जरिए उन्हें भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए सक्षम बनाया गया है।

भारत आए शरणार्थियों को धीरज बंधाते हुए शाह ने कहा कि उन्हें किसी भी प्रकार से भयभीत होने की जरुरत नही है। वे किसी भी तारीख को भारत आए हों, उनके पास राशन कार्ड हो या न हो, वे नागरिकता हासिल करने की योग्यता रखते हैं। उनकी संपत्ति, आवास और नौकरी पूरी तरह सुरक्षित है। भारतीय नागरिकता कानून के दंडात्मक प्रावधानों से उनकी सुरक्षा की गई है।

गृहमंत्री ने कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक तैयार करते समय कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, गैर सरकारी संगठनों और सामाजिक संस्थाओं के साथ व्यापक विचार विमर्श किया। इस विचार विमर्श में उन्होंने 119 घंटे तक चर्चा की। विभिन्न पक्षों की ओर से मिले सुझावों को वर्तमान विधेयक में शामिल किया गया।

शाह ने देशवासियों विशेषकर पूर्वोत्तर भारत के लोगों से कहा कि उन्हें चिंता करने और आंदोलन करने की कोई जरुरत नही है। देश अब शांति के रास्ते पर चल पड़ा है।

विधेयक के बारे में असम के लोगों को आश्वस्त करते हुए गृहमंत्री ने कहा कि राज्य की स्वायत्त विकास परिषद और जनजातीय समूहों के अधिकारों की रक्षा के लिए विशेष उपाय किए गए हैं। उन्होने कहा कि वर्ष 1985 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने आंदोलनकारियों के साथ असम समझौता किया था लेकिन उसे लागू करने के लिए कोई कदम नही उठाया गया। राज्य में दशकों तक कांग्रेस की सरकार रही लेकिन असम समझौते को नजरअंदाज किया गया।

नसीब सैनी

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ITBP सब इंस्पेक्टर के खाते से 2.59 लाख उड़ाए: हिमाचल से लौटते समय बस में चोरी हुआ ATM कार्ड और मोबाइल; एक चूक से पकड़ा गया बदमाश

सब इंस्पेक्टर हिमाचल के रहने वाले है और रेवाड़ी के जाटूसाना स्थित आईटीबीपी के कैंप में तैनात है। रेवाड़ी बस स्टैंड चौकी पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।

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बस स्टैंड चौकी पुलिस ने एक नामजद शख्स के खिलाफ केस दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।

हरियाणा के रेवाड़ी में ITBP में तैनात सब इंस्पेक्टर का मोबाइल फोन व ATM कार्ड चोरी कर उनके खाते से 2 लाख 59 हजार रुपए साफ कर दिए। सब इंस्पेक्टर हिमाचल के रहने वाले है और रेवाड़ी के जाटूसाना स्थित आईटीबीपी के कैंप में तैनात है। रेवाड़ी बस स्टैंड चौकी पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।

मिली जानकारी के अनुसार, हिमाचल के अवैरी बैजनाथ निवासी रमेश चंद ITBP में रेवाड़ी के जाटूसाना स्थित कैंप में सब इंस्पेक्टर के पद पर तैनात है। रमेश चंद ने बताया कि कुछ समय पहले वह छुट्‌टी पर घर गए थे। छुट्टी खत्म होने के बाद वह ड्यूटी ज्वॉइन करने के लिए 28 दिसंबर को रेवाड़ी बस स्टैंड पहुंचे थे। बस स्टैंड से जाटूसाना जाने के लिए बस में सवार होते समय किसी ने भीड़ में उनका एटीएम व मोबाइल चोरी कर लिया। उसके बाद मोबाइल व एटीएम के जरिए ही खाते से 259000 हजार रुपए निकाल लिए।

जांच करने पर आरोपी की पहचान जाटव मोहल्ला रामपुरा निवासी लोकेश पालिया के रूप में हुई। जिसमें 20200 रुपए अपने अकाउंट में ड्रांसफर किए जबकि एक लाख रुपए खाते से निकाले गए। बाकी लेनदेन पेटीएम से किया गया। पूरी जानकारी हासिल करने के बाद रमेश चंद ने इसकी शिकायत बस स्टैंड चौकी पुलिस को दी। पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपी लोकेश पालिया की तलाश शुरू कर दी है। गुरुवार को पुलिस ने लोकेश के घर दबिश भी दी, लेकिन वह नहीं मिला। बस स्टैंड चौकी पुलिस के अनुसार जल्द ही आरोपी को पकड़ लिया जाएगा।

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पानीपत में रोका बाल विवाह: लड़का और लड़की दोनों थे नाबालिग, शपथ पत्र लेकर फिलहाल रोकी गई शादी

लड़का व लड़की दोनों के स्कूली दस्तावेजों की जांच की गई तो लड़की की उम्र 16 साल व लड़के की उम्र 19 साल पाई गई। दोनों ही अभी शादी के योग्य नहीं थे। परिवार वालों से शपथ पत्र लेकर फिलहाल इस शादी को रोक दिया गया है।

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मामले की पूछताछ करती बाल विवाह निषेध अधिकारी रजनी गुप्ता।

हरियाणा के पानीपत जिले के एक गांव में बाल विवाह निषेध अधिकारी रजनी गुप्ता ने बाल विवाह रुकवाया है। अधिकारी ने सूचना के आधार पर इस कार्रवाई को किया। लड़का व लड़की दोनों के स्कूली दस्तावेजों की जांच की गई। जिसमें लड़की की उम्र 16 साल व लड़के की उम्र 19 साल पाई गई। दोनों ही अभी शादी के योग्य नहीं थे। परिवार वालों से शपथ पत्र लेकर फिलहाल इस शादी को रोक दिया गया है। दोनों पक्षों से शपथ पत्र लेकर फिलहाल शादी पर रोक लगा दी है। वहीं 4 जनवरी को कोर्ट खुलने के बाद मामला कोट के संज्ञान में लाकर आगामी कार्रवाई की जाएगी।

बाल विवाह निषेध अधिकारी रजनी गुप्ता के अनुसार

जानकारी देते हुए बाल विवाह निषेध अधिकारी रजनी गुप्ता ने बताया कि उन्हें सूचना प्राप्त हुई की गांव नवादा पार में एक नाबालिग लड़की की शादी होनी है। सूचना मिलने पर वह टीम के साथ मौके पर पहुंचे और वहां जाकर लड़की पक्ष से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान लड़की के सभी दस्तावेज चेक किए गए। लड़की के स्कूल के दस्तावेजों में उसकी जन्मतिथि मार्च 2005 की मिली। यानी दस्तावेजों के आधार पर लड़की अभी महज 16 साल की थी। इसके बाद लड़के पक्ष को फोन पर बात कर अपने कार्यालय बुलाया। जहां लड़का पक्ष मौजूद हुआ और लड़के के दस्तावेजों को चेक किया गया, जिसमें लड़का भी नाबालिग पाया गया। लड़के की उम्र दस्तावेजों के आधार पर 19 साल थी।

इन कारणों से हो रही थी बाल विवाह
लड़की के पिता ने बताया कि वह पेशे से श्रमिक हैं। यह अपनी बेटी की शादी गरीबी और अज्ञानता के चलते कर रहे थे। साथ ही वह खुद हार्ट पेशेंट है, उनकी तमन्ना थी कि उनके जीते जी उनकी बेटी की शादी हो जाए। वही लड़के पक्ष से लड़के का कहना है कि उसकी चार बड़ी बहने हैं, जो कि चारों विवाहित हैं। तीन भाई व एक छोटी बहन है। अब घर में कोई रोटी बनाने वाला नहीं था, क्योंकि मां की तबीयत सही नहीं रहती है। इसी के चलते वह शादी कर रहा था।

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बालिग हूं, मेरी मर्जी जहां जाऊं: थाने में युवक संग जाने को अड़ी 19 वर्षीय छात्रा, दो दिन पहले गई थी साथ

युवती ने पुलिस से साफ कह दिया कि वह युवक के साथ ही जाएगी। पुलिस और परिजनों के सामझाने पर वह नहीं मानी। छात्रा ने परिजनों की सब दलीलों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मैं बालिग हूं, मेरी मर्जी जहां जाऊं।

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मामले में थाना लाखन माजरा पुलिस कर रही जांच

हरियाणा के रोहतक के जिले में कॉलेज से दो दिन पहले एक युवक संग गई युवती को पुलिस ने बरामद कर लिया। हालांकि युवती ने पुलिस से साफ कह दिया कि वह युवक के साथ ही जाएगी। पुलिस और परिजनों के सामझाने पर वह नहीं मानी। छात्रा ने परिजनों की सब दलीलों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मैं बालिग हूं, मेरी मर्जी जहां जाऊं।

कॉलेज गई थी प्रवेश पत्र लेने
लाखन माजरा थाना क्षेत्र के एक गांव से छात्रा मंगलवार सुबह कॉलेज के लिए यह कहकर निकली थी कि आगामी परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र लेने जा रही हूं। उसके वापस न लौटने पर परिजनों ने काफी खोज खबर की।रातभर छात्रा की खोज-खबर करने के बाद बुधवार सुबह पुलिस को सूचना दी। छात्रा के पिता ने थाना लाखन माजरा में बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने छात्रा व युवक को वीरवार दोपहर गिरफ्तार कर लिया। दोनों को थाना लाया गया। यहां छात्रा ने युवक संग जाने की रट लगा दी।

कोर्ट में होंगे पेश
मामले में थाना लाखन माजरा एसएचओ अब्दुल्ला खान का कहना है कि छात्रा बालिग है। छात्रा व युवक को कोर्ट में पेश किया जाएगा। वहां उनके बयानों के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। युवक व छात्रा को कोर्ट ले जाने की तैयारी की जा रही है।

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