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सीजेआई ने यौन प्रताड़ना के आरोपों को किया खारिज, बोले- यह बड़ी साजिश का हिस्सा

शनिवार को अवकाश होने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की, सीजेआई ने दूसरी बेंच से खुद को किया अलग

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– कोर्ट ने उम्मीद जताई कि मीडिया बिना तथ्यों को जांचे न्यायपालिका को निशाना बनाने वाले फर्जी आरोप नहीं छापेगा

– अटार्नी जनरल बोले-मीडिया जिम्मेदारी से काम करे ताकि बेबुनियाद आरोपों से न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर आंच न आए

– सीजेआई ने कहा- साजिशकर्ता हमें पैसे के मामले में नहीं पकड़ सकते हैं, इसलिए ये मामला लेकर आए हैं

नई दिल्ली,(नसीब सैनी)।

कुछ वेबसाइट्स पर सुप्रीम कोर्ट की एक पूर्व महिला कर्मचारी के हवाले से चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के खिलाफ यौन प्रताड़ना की खबर प्रकाशित होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आज अवकाश के दिन भी उस मामले पर सुनवाई की। आरोप चीफ जस्टिस के खिलाफ था, इसलिए उन्होंने कोई आदेश पारित करने से अपने आपको अलग कर लिया। उन्होंने कहा कि इस मामले पर अगले हफ्ते दूसरी बेंच सुनवाई करेगी, जिसके सदस्य वे खुद नहीं होंगे। कोर्ट ने यौन प्रताड़ना के आरोपों का सिरे से खंडन किया।

बेंच के दूसरे सदस्य जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस संजीव खन्ना ने मीडिया से जिम्मेदारीपूर्वक काम करने को कहा। कोर्ट ने कहा कि हम मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक नहीं लगा रहे हैं लेकिन उम्मीद करते हैं कि मीडिया तथ्यों को जांचे बगैर इस तरह न्यायपालिका को निशाना बनाने वाले फर्जी आरोप नहीं छापेगा। कोर्ट ने कहा कि हम मीडिया पर छोड़ते हैं कि वे न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बरकरार रखें। हम कोई न्यायिक आदेश नहीं पारित कर रहे हैं।

जब कोर्ट ने सुनवाई शुरू की तो चीफ जस्टिस ने कहा कि शिकायत करने वाली महिला की पृष्ठभूमि आपराधिक है। उसके खिलाफ कई केस दर्ज हैं, जिसकी वजह से वह चार दिन जेल में बंद थी। यह अविश्वसनीय है। चीफ जस्टिस ने कहा कि मेरे रिटायरमेंट का समय नजदीक है और मेरे बैंक खाते में 6 लाख 80 हजार रुपये हैं। उन्होंने कहा कि मेरे चपरासी के पास हमसे ज्यादा संपत्ति है। इसमें हमें साजिश नजर आती है। हमें जवाब देने के लिए महज 10 घंटे का समय दिया गया। हम देश के नागरिकों से कहना चाहते हैं कि इस देश में न्यायपालिका पर खतरा है। मैं इस कोर्ट में रहूंगा और बिना डर के अपने कार्यकाल पूरा होने तक अपनी जिम्मेदारी निभाऊंगा। चीफ जस्टिस ने कहा कि वे अगले हफ्ते कुछ महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई करने वाले हैं, इसलिए उनकी छवि को खराब करने की कोशिश की जा रही है। चीफ जस्टिस ने कहा कि कोर्ट के सभी कर्मचारियों के साथ अच्छा व्यवहार होता है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस मामले को गंभीरता से लेने की जरूरत है। तब चीफ जस्टिस ने कहा कि चीजें बहुत आगे निकल गई हैं। न्यायपालिका को बलि का बकरा नहीं बनाया जा सकता है। तब तुषार मेहता ने कहा कि जो भी छापा गया वो बकवास है। तब चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि वे हमें पैसे के मामले में नहीं पकड़ सकते हैं, इसलिए ये मामला लेकर आए हैं। अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि मैं इस कोर्ट का अधिकारी हूं और सरकार का पक्ष रखने की वजह से हमारे ऊपर भी हमले होते हैं। चीफ जस्टिस ने कहा कि कोई भी समझदार व्यक्ति जज होना क्यों चाहेगा? जजों के लिए उसकी छवि ही सब कुछ होती है और उस पर हमला किया जा रहा है। अटार्नी जनरल ने कहा कि कोर्ट ने कहा कि हम कोई न्यायिक आदेश नहीं देने जा रहे हैं। हम मीडिया से कहना चाहते हैं कि वो समझदारी और जिम्मेदारीपूर्वक काम करे ताकि बेबुनियाद आरोपों से न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर आंच नहीं आए। तब तुषार मेहता ने कोर्ट ने कहा कि हमारे नाम से आप शिकायत दर्ज कराइए लेकिन कोर्ट ने इससे इनकार कर दिया।

दरअसल कुछ वेबसाइट्स ने सुप्रीम कोर्ट में काम करनेवाली एक पूर्व जूनियर असिस्टेंट के हवाले से खबर छापी है कि उसने पिछले 19 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट के 22 जजों को पत्र लिखकर चीफ जस्टिस पर यौन प्रताड़ना का आरोप लगाया है। खबर के मुताबिक 10 और 11 अक्टूबर, 2018 को उसके साथ छेड़छाड़ की गई। खबर के मुताबिक उस महिला को 21 दिसम्बर को बर्खास्त कर दिया गया। बर्खास्तगी का एक कारण ये बताया गया कि उसने बिना मंजूरी मिले ही एक दिन का कैजुअल लीव ले लिया था। इसे लेकर उसके परिवार वालों को भी दिल्ली पुलिस द्वारा काफी प्रताड़ित किया गया। इस खबर के छपने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आज की ये आपात सुनवाई की।

नसीब सैनी

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नागरिकता संशोधन एक्ट के विरोध में प्रसपा (लोहिया) के कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन

–सीसीए से देश की एकता-अखंडता को खतरा, तत्काल लिया जाए वापस: शिवपाल यादव- प्रदर्शन के दौरान प्रसपा कार्यकर्ताओं की पुलिस से झड़प, बैरिकेडिंग पर चढ़ने की कोशिश

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लखनऊ,(नसीब सैनी)।

नागरिकता संशोधन एक्ट (सीएए) के विरोध में देश भर में हो रहे प्रदर्शन के बीच बुधवार को प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) ने भी इस पर अपना विरोध दर्ज कराया। पार्टी प्रमुख शिवपाल सिंह यादव ने कार्यकर्ताओं के साथ कार्यालय के बाहर उपवास रखकर धरना-प्रदर्शन किया।   

प्रसपा प्रमुख ने इस दौरान कार्यकर्ताओं के साथ जीपीओ तक पैदल मार्च का ऐलान किया। इसको देखते हुए वहां पुलिस बल तैनात कर दिया गया। विधानमंडल सत्र के कारण पुलिस बेहद सतर्कता बरत रही है। प्रदर्शन के दौरान प्रसपा कार्यकर्ताओं की पुलिस से झड़प भी हुई और उन्होंने बैरिकेडिंग पर चढ़कर आगे जाने की कोशिश की। इस पर पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोका और गिरफ्तार किया। आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

इस दौरान शिवपाल यादव ने कहा कि हमने देश में अमन और शांति के लिए उपवास रखा है। नागरिकता संशोधन एक्ट (सीएए) के खिलाफ पूरे देश में विरोध ही नहीं विद्रोह की स्थिति है। सरकार को इसे तत्काल वापस लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि सीसीए देश हित में नहीं है। इस कानून से देश की एकता और अखंडता को खतरा है। इसलिए हम इसका विरोध करते हैं। प्रसपा प्रमुख ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों के चलते ही संविधान बचाओ-देश बचाओ नारे के साथ विरोध किया जा रहा है। सीएए में मुस्लिमों को सूची से बाहर किया जाना न्याय नहीं है। उन्होंने कहा कि यह दुखद है कि देश में साम्प्रदायिक विभाजन बढ़ रहा है। पूर्वोत्तर से लेकर देश की हिन्दी पट्टी में विरोध के स्वर तेज हो रहे हैं। पूर्वोत्तर में विरोध से आगे बढकर विद्रोह की स्थिति है।

उन्होंने कहा कि ऐसा कोई भी कानून जो सामाजिक सद्भाव, समाजवाद, पंथ निरपेक्षता व संविधान की प्रस्तावना में निहित मूल्यों के विरुद्ध है, अमानवीय, असंवैधानिक व अलोकतांत्रिक है और मेरी उससे असहमति है। संवैधानिक दायरे में रहकर शांतिपूर्ण ढंग से विरोध दर्ज करना हमारा लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने लोगों से शांति व साम्प्रदायिक सद्भाव बनाए रखने की भी अपील की और कहा कि हमारे असंतोष का लाभ साम्प्रदायिक शक्तियां न उठा सकें।
इस दौरान उन्होंने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य में विकास ठप है। भ्रष्टाचार, दुष्कर्म, भुखमरी जैसी घटनाओं से मुकाबला करने में सरकार फेल साबित हो रही है। किसान सबसे ज्यादा परेशान हैं।

नसीब सैनी

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रॉबर्ट वाड्रा की गिरफ्तारी पर 5 फरवरी तक जारी रहेगी रोक

—हाईकोर्ट जस्टिस मनोज कुमार गर्ग की कोर्ट ने अधिवक्ता भंवरसिंह मेड़तिया के निधन के बाद कोर्ट में 3.45 बजे रेफरेंस के आयोजन का हवाला देते हुए सुनवाई आगामी 5 फरवरी को नियत करने का आदेश दिया

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जोधपुर,(नसीब सैनी)।

रॉबर्ट वाड्रा के बीकानेर के कोलायत फायरिंग रेंज में 275 बीघा जमीन खरीद-फरोख्त और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े हाई प्रोफाइल मामले में स्काइलाइट प्राइवेट हॉस्पिटलिटी और बिचौलिये महेश नागर की ओर से दायर याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई समयाभाव के चलते टल गई। अब इस मामले में आगामी 5 फरवरी को फिर सुनवाई होगी। तब तक वाड्रा की गिरफ्तारी पर रोक जारी रहेगी।

रॉबर्ट वाड्रा व मौरीन वाड्रा से जुड़े मामले में स्काईलाइट प्राइवेट हॉस्पिटलिटी व महेश नागर की याचिका पर बुधवार को हाईकोर्ट में जस्टिस मनोज कुमार गर्ग की कोर्ट में सुनवाई होनी थी लेकिन समयाभाव के चलते मामले में सुनवाई टल गई। ईडी की ओर से पक्ष रखते हुए एएसजी राज दीपक रस्तोगी ने कोर्ट से आग्रह किया कि इस मामले में आज अंतिम बहस शुरू कर दी जाए।

हाईकोर्ट जस्टिस मनोज कुमार गर्ग की कोर्ट ने अधिवक्ता भंवरसिंह मेड़तिया के निधन के बाद कोर्ट में 3.45 बजे रेफरेंस के आयोजन का हवाला देते हुए सुनवाई आगामी 5 फरवरी को नियत करने का आदेश दिया। एएसजी राज दीपक रस्तोगी ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में विगत 20 पेशियों से आगे तारीख दी जा रही है और वह आशा करते हैं कि आगामी 5 फरवरी को इस मामले में अंतिम बहस शुरू कर दी जाएगी। साथ ही कोर्ट के संज्ञान में लाया गया कि पूर्व में महेश नागर के मामले में रॉबर्ट वाड्रा व मौरीन वाड्रा के खिलाफ नो-कोर्सिव एक्शन का आदेश जारी हो चुका है, जिसके खिलाफ उनकी ओर से एक अर्जी पेश की गई है। उसका निस्तारण भी होना बाकी है। अब इस मामले में आगामी 5 फरवरी को फिर सुनवाई होगी। बुधवार को सुनवाई के दौरान रॉबर्ट वाड्रा व मौरीन वाड्रा की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता केटीएस तुलसी कोर्ट में मौजूद रहे। 

गौरतलब है कि यह मामला बीकानेर के कोलायत क्षेत्र में 275 बीघा जमीन की खरीद फरोख्त से जुड़ा है। इस सौदे की ईडी जांच चल रही है। इस मामले में रॉबर्ट वाड्रा ने अपने पार्टनर मौरीन वाड्रा को एक चेक दिया था। इस चेक द्वारा बिचौलिये महेश नागर ने अपने ड्राइवर के नाम जमीन खरीदकर इस पूरे घोटाले को अंजाम दिया है, जो जांच का विषय है। इस पर पूर्व में  कोर्ट ने राबर्ट वाड्रा को जांच में सहयोग करने के लिए ईडी के सामने पेश होने एवं गिरफ्तारी पर रोक के अंतरिम आदेश दिए थे। वाड्रा की गिरफ्तारी पर रोक आगामी 5 फरवरी तक जारी रहेगी।

नसीब सैनी

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बिजनौर कोर्ट शूटकांड : हाईकोर्ट ने डीजीपी और अपर मुख्य सचिव (गृह) को किया तलब

—दरअसल, बिजनौर में 28 मई को नजीबाबाद में हुई बसपा नेता हाजी अहसान व उनके भांजे शादाब की हत्या के मुख्य अभियुक्त कुख्यात बदमाश शाहनवाज और उसके साथी जब्बार को पेशी के लिए मंगलवार को दिल्ली पुलिस सीजेएम कोर्ट लायी थी

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प्रयागराज,(नसीब सैनी)।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को बिजनौर सीजीएम कोर्ट में हुए हत्याकांड को संज्ञान में लिया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में पुलिस महानिदेशक और प्रमुख सचिव (गृह) को 20 दिसम्बर को तलब किया है। कोर्ट ने कहा है कि जब वह आयें तो सरकार की ओर से न्यायालय की सुरक्षा को लेकर क्या इंतजाम किया गया है, इसके बारे में कोर्ट को बताएं।  जस्टिस सुधीर अग्रवाल व जस्टिस सुनीत कुमार की विशेष खंडपीठ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए पूछा है कि इस घटना के बाद अब आने वाले दिनों में न्यायालय परिसर की सुरक्षा के लिए उनके पास क्या इंतजाम हैं। कोर्ट ने यह भी कहा है कि अगर उनके स्तर पर न्यायालय में पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था नहीं दी जा सकती तो इसके लिए केंद्र सरकार से बात की जाए।  

दरअसल, बिजनौर में 28 मई को नजीबाबाद में हुई बसपा नेता हाजी अहसान व उनके भांजे शादाब की हत्या के मुख्य अभियुक्त कुख्यात बदमाश शाहनवाज और उसके साथी जब्बार को पेशी के लिए मंगलवार को दिल्ली पुलिस सीजेएम कोर्ट लायी थी। पेशी के दौरान परिसर में मौजूद मृतक हाजी अहसान की दूसरी पत्नी के पुत्र शाहिल खान ने अपने दो साथियों के संग सीजेएम कोर्ट के अंदर पिस्टलों से गोलियां बरसाकर मुख्य अभियुक्त शाहनवाज की हत्या कर दी। इसमें दो पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे।

प्रत्यक्षदिर्शियों के मुताबिक सीजेएम योगेश कुमार ने मेज के पीछे छिपकर जान बचाई। शाहनवाज का साथी जब्बार कोर्ट से फरार हो गया। इस घटना से कोर्ट परिसर में हड़कम्प मच गया था। पुलिस की सतर्कता से तीनों आरोपितों को दबोच लिया गया था। इस मामले में एसपी संजीव त्यागी ने लापरवाही बरतने वाले चौकी प्रभारी समेत 18 पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया है। 

नसीब सैनी

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