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राम मंदिर, अनुच्छेद 370 और समान नागरिक संहिता मुद्दों पर राजनीति कब तक

इन तीनों मुद्दों पर एक समानता है कि सुप्रीम कोर्ट का दखल इन तीनों पर बना हुआ है

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नेशनल न्यूज़  : देश में ये तीन ऐसे प्रमुख मुद्दे हैं जो देश की राजनीति को प्रभावित कर रही है अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण, जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष अधिकार देने वाला अनुच्छेद 370 और समान नागरिक संहिता- ये तीन ऐसे प्रमुख मुद्दे हैं जिनकी मदद से राजनीति में रोटियां सेकने का काम हो रहा है।  इन्ही तीन मुद्दों के कारण बीजेपी का हिन्दू वोट बैंक संघटित हुआ। देश के अधिकतर हिन्दू अभी भी मानते हैं कि सिर्फ बीजेपी ही इन मुद्दों का समाधान कर सकती है लेकिन वह यह नहीं जानते कि बीजेपी ने 20 साल पहले ही इन मुद्दों से किनारा कर लिया था। 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में बीजेपी ने गठबंधन की राजनीति के चलते स्पष्ट कर दिया था कि वह लोकसभा चुनावों में उन्हीं मुद्दों को शामिल करेगी, जिन पर आम सहमति होगी। अनुच्छेद 370, समान नागरिक संहिता और राम मंदिर पर आम सहमति कभी भी नहीं बन पाई। बीजेपी के इसी रवैये के चलते आजये मुद्दे सुलझने की बजाय और ज़्यादा उलझ गए हैं।

पहला : राम मंदिर का निर्माण
AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी से लेकर बीजेपी के पैतृक संगठन आरएसएस तक सभी बीजेपी को राम मन्दिर के लिए अध्यादेश लाने का अल्टीमेटम दे चुके हैं लेकिन किसी समय हर हाल पर मंदिर बनना चाहिए की बात करने वाली भारतीय जनता पार्टी अब कानून के दायरे में मंदिर निर्माण की संभावनाएं तलाश रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने कई बार कहा है कि जो सुप्रीम कोर्ट फैसला देगी उनकी सरकार वही मानेगी। अध्यादेश लाने के लिए उन्होंने कभी ज़रा सी रूचि तक नहीं दिखाई है। वहीँ सुप्रीम कोर्ट ने साफ बता दिया है कि अयोध्या का मुद्दा उसके लिए प्राथमिकता वाला नहीं है। जनवरी 2019 में सुप्रीम कोर्ट बताएगी कि अगली सुनवाई कब होगी? क्या प्रधानमंत्री मोदी यह गारंटी देंगे कि सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला आएगा उस पर सभी पक्ष सहमत होंगे? क्या मोदी यह नहीं जानते कि भारतीय न्याय प्रणाली ऐसी है जिसमे केस कई दशकों तक चलते हैं ? लोकतंत्र में सरकार जवाबदेह होती है न कि सुप्रीम कोर्ट।


दूसरा: अनुछेद 370
अनुच्छेद 370 पर ताजा स्थिति क्या है उसे बाद में बताएंगे पहले यह बता देते हैं कि अनुच्छेद 370 के चलते जम्मू-कश्मीर राज्य को जो विशेष अधिकार मिलता है वह भारत की एकता और अखंडता के लिए कितना खतरनाक है?

अनुछेद 370 से मिलने वाले विशेषाधिकार

  • जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता होती है।
  • जम्मू-कश्मीर के पास अपना संविधान है।
  • जम्मू-कश्मीर का राष्ट्रध्वज अलग होता है।
  • जम्मू-कश्मीर के अन्दर भारत के राष्ट्रध्वज या राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान अपराध नहीं माना जाता ।
  • भारत के सुप्रीम कोर्ट के आदेश जम्मू-कश्मीर के अन्दर मान्य नहीं होते हैं।
  • जम्मू-कश्मीर की कोई महिला यदि भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से विवाह कर ले तो उस महिला की नागरिकता समाप्त हो जाते है। इसके विपरीत यदि वह पाकिस्तान के किसी व्यक्ति से विवाह कर ले तो उस पाकिस्तानी को  भी जम्मू-कश्मीर की नागरिकता मिलजाती है।
  • कश्मीर में आरटीआई (RTI) और सीएजी (CAG) जैसे कानून लागू नहीं होते है।
  • कश्मीर में अल्पसंख्यकों [हिन्दू-सिख] को 16% आरक्षण नहीं मिलता।
  • कश्मीर में बाहर के लोग जमीन नहीं खरीद सकते हैं।

क्या है अनुच्छेद 370 की ताज़ा स्थिति 
बीजेपी सरकार  के ढुलमुल रवैये के चलते अनुच्छेद 370 हटाना अब नामुमकिन हो गया है। 3 अप्रैल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 370 भारत में स्थाई मतलब परमानेंट हो गया है।

तीसरा: समान नागरिक संहिता
शुरूआती दिनों में समान नागरिक संहिता बीजेपी का मुख्य एजेंडा होता था लेकिन जैसे जैसे समय बीतता गया यह मुद्दा पीछे खिसकता गया। 13 अक्टूबर 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार से पूछा था कि वह देश में समान नागरिक संहिता लागू करना चाहती है कि नहीं या उसे कोर्ट लागू करे ? 1 जुलाई 2016 में केंद्र सरकार ने लॉ कमीशन से पूछा कि क्या भारत में समान नागरिक संहिता लागू किया जा सकता है? इस पर 31 अगस्त 2018 में लॉ कमीशन ने सरकार को बताया कि देश में न तो समान नागरिक संहिता आवश्यक है और न ही इसकी ज़रुरत है।

इन तीनों मुद्दों पर एक समानता है कि सुप्रीम कोर्ट का दखल इन तीनों पर बना हुआ है लेकिन जब SC/ST ACT के समय मोदी सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निरस्त करने के लिए संसद में कानून पास करा सकती है तो राम मंदिर, अनुछेद 370 और समान नागरिकसंहिता को लेकर सुप्रीम कोर्ट पर मोहताज क्यों है?

नसीब सैनी/अभिषेक महेरा

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घाटी में हालात सामान्य, प्रशासन के निर्णय के बाद होगी नेताओं की रिहाईः अमित शाह

—शाह सदन में प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस नेता अधीर रंजन के पूरक प्रश्न का जवाब दे रहे थे।

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नई दिल्ली, (नसीब सैनी)

केंद्र सरकार ने कहा है कि कश्मीर घाटी में स्थिति सामान्य है और प्रशासन के द्वारा निर्णय लिए जाने के बाद एहतियात के तौर पर गिरफ्तार किए गए राजनीतिक दलों के नेताओं को रिहा कर दिया जाएगा।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मंगलवार को लोकसभा में कहा कि जहां तक घाटी और स्थानीय जनता का सवाल है तो उनकी स्थिति सामान्य है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने कहा था कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने पर  घाटी में दंगे हो जाएंगे, किंतु ऐसा कुछ नही हुआ। उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि जहां तक कांग्रेस की स्थिति का सवाल है तो वह उसे सामान्य नहीं कर सकते।

शाह सदन में प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस नेता अधीर रंजन के पूरक प्रश्न का जवाब दे रहे थे।

गृहमंत्री ने राजनीतिक दलों के नेताओं की रिहाई के बारे में कहा कि सरकार को किसी को भी ज्यादा दिन हिरासत में रखने की मंशा नही है और ज्यों ही कश्मीर का प्रशासन निर्णय लेगा नेताओं की रिहाई हो जाएगी। उन्होंने कहाकि कांग्रेस सरकारों के उलट मौजूदा सरकार स्थानीय प्रशासन के कामकाज में दखल नही देती है।

नसीब सैनी

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नागरिकता संशोधन पर अमेरिकी आयोग का बयान एकतरफा और पूर्वाग्रह से ग्रसित : विदेश मंत्रालय

–उन्होंने कहा, “विधेयक उत्पीड़न के शिकार लोगों की वर्तमान कठिनाइयों को दूर करने और उन्हें बुनियादी मानवाधिकार देने से जुड़ा प्रयास है

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नई दिल्ली,(नसीब सैनी)।

विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को ‘अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग’ (यूएससीआईआरएफ) के नागरिकता संशोधन विधेयक और गृहमंत्री अमित शाह पर दिए बयान को एकतरफा और पूर्वाग्रह से ग्रसित बताया है। मंत्रालय का कहना है कि अमेरिका सहित हर देश को अपने नागरिकों की पहचान करने का अधिकार है।

उल्लेखनीय है कि यूएससीआईआरएफ ने नागरिकता संशोधन विधेयक को गलत दिशा में उठाया कदम बताया है और राज्यसभा में विधेयक के पारित होने के बाद अमित शाह पर प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने इस पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि यूएससीआईआरएफ पहले भी इस तरह के बयान देता रहा है और इस बयान में कुछ भी आश्चर्यजनक नहीं है। आयोग का अधूरी जानकारी के साथ कार्यक्षेत्र से बाहर के विषयों पर टांग अड़ाते हुए एकतरफा और पूर्वाग्रह से ग्रसित बयान देना अफसोसजनक है।

उन्होंने कहा कि अमेरिकी आयोग द्वारा नागरिकता (संशोधन) विधेयक पर दिया गया बयान गैर-जरूरी और तथ्यों से परे है। यह विधेयक भारत में पहले से रह रहे कुछ देशों में धार्मिक उत्पीड़न के शिकार अल्पसंख्यकों को शीघ्रता से भारतीय नागरिकता दिए जाने पर विचार करने से जुड़ा प्रावधान है।

उन्होंने कहा, “विधेयक उत्पीड़न के शिकार लोगों की वर्तमान कठिनाइयों को दूर करने और उन्हें बुनियादी मानवाधिकार देने से जुड़ा प्रयास है। इस तरह की पहल का स्वागत किया जाना चाहिए न कि धार्मिक स्वतंत्रता के लिए प्रतिबद्ध लोगों द्वारा इसकी आलोचना की जानी चाहिए।”

रवीश ने कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक किसी भी समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता लेने से नहीं रोकता है। भारत का इस संबंध में रिकॉर्ड पूरी तरह से निष्पक्ष है। उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) किसी भी समुदाय से जुड़े किसी भी भारतीय से उसकी नागरिकता छीनने नहीं जा रहा है।

नसीब सैनी

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भारत से जुड़ेगा थाईलैंड का रानोंग बन्दरगाह: थाई राजदूत

– वायु, सड़क व समुद्र परिवहन से ——–भारत-म्यांमार का विश्व में दखल बढ़ेगा- थाई राजकुमारी की भारत यात्रा से भारत-थाई सम्बंध और प्रगाढ़ होंगे

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कुशीनगर,(नसीब सैनी)।

इंडो-थाई के मध्य व्यापार को और विकसित करने के लिए दोनों देश समुद्र के रास्ते से भी जुड़ेंगे। थाईलैंड के रानोंग बंदरगाह व भारत के चेन्नई व अंडमान बन्दरगाह को समुद्र मार्ग से जोड़ने की योजना पर दोनों देश कार्य कर रहे हैं। 

नई दिल्ली स्थित थाईलैंड के राजदूत शूतिनथोन खोंगसक ने मंगलवार को कुशीनगर में पत्रकारों से बातचीत में यह जानकारी दी। राजदूत थाई राजकुमारी के फरवरी 2020 में कुशीनगर आगमन के मद्देनजर तैयारियों का जायजा लेने आए हुए हैं। थाई राजदूत ने बताया कि भारत और थाईलैंड पहले से ही वायुसेवा से जुड़े हुए हैं। दोनों देशों के मध्य सड़क निर्माण का कार्य तेजी से पूर्ण होने की कगार पर है। वायु, सड़क व समुद्र परिवहन की सेवाएं जब एक साथ परिचालन में आएंगी, तब उद्योग व्यापार के क्षेत्र में भारत-म्यांमार का विश्व में दखल बढ़ेगा। 

थाईलैंड ट्राइलैटरल हाई-वे की प्रगति की जानकारी देते हुए राजदूत ने बताया कि भारत के सहयोग से निर्माण चल रहा है। ट्राइलैटरल हाइवे से वियतनाम को भी जोड़ने की योजना है। 1400 किमी ट्राइलैटरल हाइवे का निर्माण भारत के सहयोग से 2016 से निर्माणाधीन है। यह भारत के मोरे से म्यांमार के तामूर नगर होते हुए थाईलैंड के मेई सेत जिले के ताक तक जाएगा। यह भारत को जमीन के रास्ते दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने की योजना है। इन परियोजनाओं के पूर्ण हो जाने के बाद पर्यटन, व्यापार में बढ़ोत्तरी के साथ-साथ सम्बंधित देशों के मध्य मैत्री सम्बंध और गहरे होंगे। 

राजदूत बोले कि कंबोडिया, लाओस व मलेशिया से थाईलैंड का सर्वाधिक बॉर्डर ट्रेड है। सड़क मार्ग से जुड़ जाने से भारत से भी बॉर्डर ट्रेड बढ़ जाएगा। राजदूत बोले कि आसियान देशों को भी सड़क व वायुमार्ग से जोड़ने की योजना है। राजदूत ने विश्वास जताया कि थाई राजकुमारी की भारत भ्रमण यात्रा से हजारों वर्ष से चले आ रहे भारत-थाई सम्बंध और प्रगाढ़ होंगे।

नसीब सैनी

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