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शिमला में भारी बर्फ़बारी, हसनवैली में फंसे 100 पर्यटकों को सुरक्षित निकाला

—बाहरी राज्यों से शिमला घूमने गए 100 पर्यटक पिछली रात हुई भारी बर्फबारी के कारण ढली व छराबड़ा के बीच हसनवैली में फंस गए

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शिमला,(नसीब सैनी)।

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में शुक्रवार की रात हुई बर्फ़बारी का जहां एक तरफ पर्यटक लुत्फ उठा रहे हैं वहीं दूसरी तरफ इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बर्फबारी का यातायात पर काफी असर पड़ा है। शनिवार की सुबह पूरा शहर बर्फ की सफेद चादर में लिपटा नज़र आ रहा है तथा सड़कों पर बर्फ जमी होने के कारण कई सम्पर्क सड़कें बंद हैं। अप्पर शिमला का तो राज्य मुख्यालय से संपर्क ही कट गया है। उपनगर ढली से अप्पर शिमला को जाने वाली सभी मुख्य सड़कें बाधित हैं। 

A man walks pasts snow covered cars after heavy snowfall in the northern Indian city of Shimla January 8, 2012. REUTERS/Amit Kanwar (INDIA – Tags: ENVIRONMENT SOCIETY TRANSPORT)

बाहरी राज्यों से शिमला घूमने गए 100 पर्यटक पिछली रात हुई भारी बर्फबारी के कारण ढली व छराबड़ा के बीच हसनवैली में फंस गए। ये पर्यटक टूरिस्ट बसों में कुफरी घूमने जा रहे थे, लेकिन भारी बर्फ़बारी में बसें फंस गईं। जिला प्रशासन, पुलिस व लोकनिर्माण विभाग की संयुक्त टीमों ने रात भर बचाव अभियान चलाया और सैलानियों को शनिवार तड़के सुरक्षित निकाला। 
जिला उपायुक्त शिमला अमित कश्यप के मुताबिक बर्फ में फंसे इन पर्यटकों की तादाद 100 के क़रीब है और इनमें महिला पर्यटक भी हैं। इन्हें बर्फ से सुरक्षित निकालकर शिमला में गुरुद्वारा और ट्राइबल भवन में ठहराया गया, जहां इनके खाने-पीने और रहने का प्रबंध किया गया। सड़क से बर्फ हटाने के बाद इन्हें अपने-अपने गंतव्य की ओर भेज दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि शनिवार को राजधानी का मौसम साफ है तथा बर्फ के कारण बंद रास्तों को खोलने के लिए बर्फ का काटने वाली मशीनें और जेसीबी लगाई गई हैं। अप्पर शिमला के सभी पहाड़ी इलाकों में बर्फ के कारण बंद सड़कों को बहाल करने में समय लग सकता है।
इस बीच मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक मनमोहन सिंह ने बताया कि शिमला में 8 सेंटीमीटर ताज़ा हिमपात हुआ है। यहां न्यूनतम तापमान -0.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। उन्होंने अगले 24 घण्टों के दौरान शिमला व पर्वतीय इलाकों में हल्की बर्फ़बारी की संभावना जताई है।

नसीब सैनी

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हरियाणा में दंपती सहित 6 की सड़क हादसे में हुई मौत: कैथल में बारात से लौट रही कार दूसरी कार से टकराई, मरने वालों में 4 बाराती

हादसा इतना जबरदस्त था कि दोनों कारें पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। दो की मौके पर मौत हुई, जबकि अन्य को अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। चार घायलों का अस्पताल में इलाज चल रहा है।

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कैथल के पाई गांव में दो कारों में भीषण टक्कर के बाद कार के परखच्चे उड़ गए।

हरियाणा के कैथल जिले के गांव पाई में मंगलवार सुबह दो कारों की आमने-सामने टक्कर हो गई। हादसे में 4 बारातियों समेत 6 की मौत हो गई। मृतकों में एक दंपती शामिल है। हादसा इतना जबरदस्त था कि दोनों कारें पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। दो की मौके पर मौत हुई, जबकि अन्य को अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। चार घायलों का अस्पताल में इलाज चल रहा है।

पुंडरी से जींद गई थी बारात
कैथल के पुंडरी निवासी राहुल की बारात जींद की सैनी धर्मशाला में गई थी। एक कार में सवार बाराती घर लौट रहे थे। उनकी कार जब गांव पाई के पास पहुंची तो दूसरी कार से सामने टक्कर हो गई। दूसरी कार में सवार लोग कुरुक्षेत्र के दाबखेड़ी गांव से जींद के मलार गांव में जा रहे थे। ये अपनी बीमार मां से मिलकर गांव लौट रहे थे।

मृतक विनोद और उसकी पत्नी बाला का फाइल फोटो।

मरने वालों में पति-पत्नी भी
पाई गांव के पास दोनों कारों की आमने-सामने हुई टक्कर में जींद की तरफ जा रही कार में विनोद, बाला, सोनिया और विराज सवार थे। विनोद और उसकी पत्नी बाला की मौत हो गई। जबकि विराज और सोनिया घायल हैं। दूसरी तरफ बारात से लौट रही कार के ड्राइवर बरेली निवासी सत्यम, सैनी मोहल्ला पुंडरी निवासी रमेश, नरवाना निवासी अनिल, हिसार निवासी शिवम की मौत हो गई। दो बाराती सतीश और बलराज घायल हैं।

जींद के अपराही मोहल्ला में भी मातम
जींद के अपराही मोहल्ला में स्वर्गीय रामधारी नंबरदार के छोटे भाई नरेश नंबरदार की बेटी निशु की शादी थी। बारात पुंडरी से जींद की सफीदों गेट सैनी धर्मशाला में आई थी। बारात की एक कार पुंडरी लौटते समय कैथल के गांव पाई के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे की सूचना जींद में करीब साढ़े 9 बजे पहुंची। वहां भी मातम पसर गया।

सुबह 6 बजे निकली डोली
निशु, जिसकी शादी थी, के पिता नरेश नंबरदार की जींद सब्जी मंडी में आढ़ती है। मंडी में इनकी 34 नंबर दुकान है। कुछ बाराती अपने-अपने वाहनों में अल सुबह 2 से 3 बजे ही निकल गए थे। डोली सुबह करीब 6 बजे गई थी। कुछ बाराती इसके साथ ही निकले थे। डोली के साथ निकलने वाले रिश्तेदार आमतौर पर काफी करीबी ही होते हैं।

हादसे के बाद शवों को दोनों कारों से निकाला गया।

तीन दिन पहले ही पड़ोस में हुई थी मौत
नरेश नंबरदार के पड़ोस में तीन दिन पहले गली में ही बलजीत नामक व्यक्ति की अचानक ही मौत हो गई थी। उनकी मौत से भी गली में मातम था। इसको देखते हुए निशु की शादी बड़े सादे ढंग की गई।

पुलिस से पहले ग्रामीणों ने शुरू कर दिया था बचाव कार्य
पाई गांव के पास हादसे की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। इससे पहले ग्रामीणों की भीड़ लग गई थी, जो बचाव कार्य में लगे थे। हादसे के बाद एक कार पेड़ से टकरा गई थी। घटनास्थल पर क्षतिग्रस्त कारों का सामान बिखरा पड़ा था। शव गाड़ियों में ही फंसे थे। पुलिस ने घायलों और दो शवों को अस्पताल पहुंचाया। मरने वालों की संख्या 6 हो गई।

कैथल में हुए हादसे को लेकर कार्रवाई करती पुलिस।

नव वधु के स्वागत की थी तैयारी, हादसे की सूचना पहुंची
बारात की गाड़ी और दूसरी कार की टक्कर से 4 बारातियों की मौत की सूचना पुंडरी पहुंची तो शादी वाले घर में मातम पसर गया। जिस घर में नव वधु के स्वागत की तैयारी चल रही थी, वहां शवों की सूचना पहुंची। नाच गाना रुक गया। दूसरी तरफ विनोद और बाला की मौत से उनकी बीमार मां की हालत और बिगड़ गई।

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चंडीगढ़ के ‘लंगर बाबा’ जगदीश अहूजा का निधन,पी.जी.आई के बाहर 21 सालों से लगा रहे थे लंगर…

जगदीश आहूजा भारत-पाकिसतान के बंटवारे के महज 12 साल की उम्र में पंजाब के मानसा शहर आए थे. जिंदा रहने के लिए रेलवे स्टेशन पर उन्हें नमकीन दाल बेचनी पड़ी, ताकि उन पैसों से खाना खाया जा सके और गुजारा हो सके. कुछ समय बाद वह पटियाला चले गए और गुड़ और फल बेचकर जिंदगी चलाने लगे और फिर 1950 के बाद करीब 21 साल की उम्र में आहूजा चंडीगढ़ आ गए थे.

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चंडीगढ़ के लंगर बाबा का निधन

पीजीआई के बाहर पिछले 21 सालों से लंगर लगाने वाले जगदीश अहूजा का सोमवार को निधन हो गया. जगदीश अहूजा लंगर बाबा के नाम से जाने जाते थे. जगदीश अहूजा करीब पिछले 21 सालों से पी.जी.आई के बाहर लंगर लगा रहे थे. उन्हें 2020 में राष्ट्रपति से पद्मश्री अवार्ड भी मिला था. वो रोजाना करीब 4 से 5000 लोगों को लंगर खिलाते थे.

बता दें कि पीजीआई चंडीगढ़ के सामने जगदीश आहूजा लगातार लंगर लगाते आ रहे थे. इसके लिए उन्होंने अपनी कई प्रॉपर्टी तक बेच दी थी. उनका कहना है कि लंगर सेवा करके उन्हें काफी सुकून मिलता है. पटियाला में उन्होंने गुड़ और फल बेचकर अपना जीवनयापन शुरू किया था. 1956 में लगभग 21 साल की उम्र में चंडीगढ़ आ गए. उस समय चंडीगढ़ को देश का पहला योजनाबद्ध शहर बनाया जा रहा था. यहां आकर उन्होंने एक फल की रेहड़ी किराए पर लेकर केले बेचना शुरू किया.

चंडीगढ़ में एक रेहड़ी से शुरुआत करने वाले लंगर बाबा के जीवन का सफर आसान नहीं रहा. पीजीआई के बाहर लगने वाले पूरे लंगर की देखरेख खुद करते थे. कैंसर होने से पहले वह खुद गाड़ी में दो से तीन हजार लोगों को खाना खिलाते रहे. आहूजा ने कड़े संघर्ष से चंडीगढ़ और आसपास काफी प्रॉपर्टी बनाई, लेकिन लंगर के लिए अपनी कोठी तक बेच दी.

कोरोना काल में भी प्रशासन के निर्देशों के कारण सिर्फ सात दिन पीजीआइ के बाहर लंगर को रोकना पड़ा था, आहूजा की इच्छा थी कि वह चंडीगढ़ में जरुरतमंदों के लिए एक सराय का निर्माण करवा सकें, जिसके लिए उन्होंने चंडीगढ़ प्रशासन से जमीन देने की मांग की हुई थी.

लंगर वाले बाबा ने एक बार बताया था कि जब वो लोगों को भूखे पेट सड़क पर देखता हैं तो बैचेनी होने लगती थी. अपने बेटे के आठवें जन्मदिन पर मैंने 100 से 150 बच्चों को खाना खिलाना शुरू किया. लगभग 18 साल तक सेक्टर-23 में घर के पास लंगर चलाया. उसके बाद 2001 से पीजीआई के बाहर हर दिन लंगर लगाना शुरू कर दिया था.

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बिजली निगम की लापरवाही से कर्मी की मौत; पानीपत में ट्रांसफार्मर पर कर रहा था काम, अचानक से बिजली सप्लाई बहाल, परमिट लेकर चढ़ा था ऊपर….

सोमवार को बिजली ट्रांसफार्मर पर काम करते समय बिजली ठेका कर्मचारी करंट की चपेट में आ गया। झ़ुलसने से मौके पर ही उसकी मौत हो गई। जानकारी मिलते ही बिजली निगम के एसडीओ और थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे। मामले में छानबीन हो रही है।

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सनौली खुर्द में ट्रांसफर पर लटकता बिजली कर्मी का शव।

हरियाणा के पानीपत में सोमवार को बिजली ट्रांसफार्मर पर काम करते समय बिजली ठेका कर्मचारी करंट की चपेट में आ गया। झ़ुलसने से मौके पर ही उसकी मौत हो गई। जानकारी मिलते ही बिजली निगम के एसडीओ और थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे। मामले में छानबीन हो रही है।

पानीपत के गांव सनौली खुर्द में बस स्टैंड के पास लगे ट्रांसफार्मर में कुछ गड़बड़ी आ गई थी। शिकायत के बाद बिजली निगम की एक टीम वहां पहुंची। परमिट लेकर बिजली की सप्लाई बंद करवाकर ट्रांसफार्मर पर काम शुरू किया गया। इसी बीच अचानक से बिजली सप्लाई बहाल हो गई। इससे ट्रांसफार्मर पर चढ़े कर्मी सुरेंद्र (32) को करंट की चपेट में आ गया। साथी कर्मी सप्लाई बंद करते इससे पहले ही उसकी मौत हो गई।

मृतक बिजली कर्मचारी के परिजन पोस्टमार्टम के इंतजार में।

दो महीने से कर रहा था काम
गांव खौजकीपुर निवासी सुरेंद्र सिंह पिछले दो महीने से ही बिजली निगम में ठेका कर्मचारी के तौर पर काम कर रहा था। सोमवार को वह काम पर आया तो हादसा हो गया। पूरा परिवार गमगीन है। उसके पिता सुभाष ने बताया कि बेटे की शादी हो चुकी थी। उसके एक बच्चा था। पत्नी गर्भवती है और वह कुछ माह बाद दूसरे बच्चे का पिता बनता। बिजली निगम की लापरवाही ने उसके बेटे को छीन लिया है

एक घंटे तक लटकता रहा शव
सनौली खुर्द में बिजली का करंट लगने से मौत के मुंह में समाया सुरेंद्र सिंह बिजली निगम में आउटसोर्स कर्मचारी था। हादसे के बाद उसका शव करीब एक घंटे तक ट्रांसफार्मर पर ही लटकता रहा। साथी कर्मियों ने हादसे की सूचना बिजली अधिकारियों को दी। इसके बाद निगम के एसडीओ नरेंद्र जागलान मौके पर पहुंचे। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को उतारने की कार्रवाई की।

मृतक सुरेंद्र के पोस्टमार्टम के लिए कागजात तैयार करते पुलिस कर्मी।

आखिर मौत का जिम्मेदार कौन
बिजली कर्मी सुरेंद्र की मौत सरासर लापरवाही का नतीजा बताई जा रही है। ट्रांसफार्मर पर काम करने से पहले बिजली कर्मियों ने बिजली की सप्लाई को बंद करवा दिया था। बावजूद इसके बिना कर्मियों से पूछे बिजली की सप्लाई बहाल कर दी गई। सुरेंद्र को संभलने का मौका ही नहीं मिला। ठेकेदार की ओर से बिना सुरक्षा उपकरण के ही उसे ट्रांसफार्मर पर चढ़ा दिया गया।

पुलिस छानबीन शुरू
सनौली पुलिस थाना प्रभारी रामनिवास ने बताया कि करंट से बिजली कर्मी की मौत की सूचना मिली है। पुलिस ने मृतक के परिजनों से शिकायत ली है। साथी कर्मियों से भी जानकारी ली गई। पुलिस जांच चल रही है। जिसकी भी लापरवाही मिलेगी, उसके खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा।

पिता बोले- निगम की गलती
मृतक सुरेंद्र के शव को पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए नागरिक अस्पताल भेजा है। यहां पहुंचे उसके पिता सुभाष ने कहा कि बिजली निगम के कर्मियों की लापरवाही से उसके बेटे की जान गई है। जिम्मेदार निगम अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए।

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