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तारीखों के आईने में श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन

—इस मुद्दे पर विवाद 1885 में तब शुरू हुआ था जब महंत रघुबीर दास ने फैजाबाद जिला अदालत में याचिका दायर कर विवादित ढांचे के बाहर शामियाना तानने की अनुमति मांगी लेकिन अदालत ने यह याचिका खारिज कर दी

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अयोध्या,(नसीब सैनी)।

आखिरकार अयोध्या में भगवान श्रीराम मंदिर विवाद बनने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने आज रास्ता साफ़ कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने 16 अक्टूबर 2019 को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित कर लिया था। इस मुद्दे पर विवाद 1885 में तब शुरू हुआ था जब महंत रघुबीर दास ने फैजाबाद जिला अदालत में याचिका दायर कर विवादित ढांचे के बाहर शामियाना तानने की अनुमति मांगी लेकिन अदालत ने यह याचिका खारिज कर दी। 

यह है कालक्रम

1528 : मुगल बादशाह बाबर के कमांडर मीर बाकी ने बाबरी मस्जिद का निर्माण कराया।

1885: महंत रघुबीर दास ने फैजाबाद जिला अदालत में याचिका दायर कर विवादित ढांचे के बाहर शामियाना तानने की अनुमति मांगी। अदालत ने याचिका खारिज कर दी।

1949: विवादित ढांचे के बाहर केंद्रीय गुंबद में रामलला की मूर्तियां स्थापित की गईं।

1950: रामलला की मूर्तियों की पूजा का अधिकार हासिल करने के लिए गोपाल सिमला विशारद ने फैजाबाद जिला अदालत में याचिका दायर की।

1950: परमहंस रामचंद्र दास ने पूजा जारी रखने और मूर्तियां रखने के लिए याचिका दायर की।

1959: निर्मोही अखाड़ा ने जमीन पर अधिकार दिए जाने के लिए याचिका दायर की।

1981: उत्तरप्रदेश सुन्नी केंद्रीय वक्फ बोर्ड ने स्थल पर अधिकार के लिए याचिका दायर की।

01 फरवरी 1986: स्थानीय अदालत ने सरकार को पूजा के मकसद से हिंदू श्रद्धालुओं के लिए स्थान खोलने का आदेश दिया।

14 अगस्त 1986: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने विवादित ढांचे के लिए यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया।

06 दिसम्बर 1992: रामजन्मभूमि – बाबरी मस्जिद ढांचे को ढहाया गया।

03 अप्रैल 1993: विवादित स्थल में जमीन अधिग्रहण के लिए केंद्र ने ‘अयोध्या में निश्चित क्षेत्र अधिग्रहण कानून’ पारित किया। अधिनियम के विभिन्न पहलुओं को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में कई रिट याचिकाएं दायर की गईं। इनमें इस्माइल फारूकी की याचिका भी शामिल। उच्चतम न्यायालय ने अनुच्छेद 139ए के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर रिट याचिकाओं को स्थानांतरित कर दिया जो उच्च न्यायालय में लंबित थीं।

24 अक्टूबर 1994: उच्चतम न्यायालय ने ऐतिहासिक इस्माइल फारूकी मामले में कहा कि मस्जिद इस्लाम से जुड़ी हुई नहीं है।

अप्रैल 2002: उच्च न्यायालय में विवादित स्थल के मालिकाना हक को लेकर सुनवाई शुरू।

13 मार्च 2003: उच्चतम न्यायालय ने असलम उर्फ भूरे मामले में कहा, अधिग्रहीत स्थल पर किसी भी तरह की धार्मिक गतिविधि की अनुमति नहीं है।

30 सितम्बर 2010: उच्चतम न्यायालय ने 2:1 बहुमत से विवादित क्षेत्र को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला के बीच तीन हिस्सों में बांटने का आदेश दिया।

09 मई 2011: उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या जमीन विवाद में उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगाई।

26 फरवरी 2016: सुब्रमण्यम स्वामी ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर विवादित स्थल पर राम मंदिर बनाए जाने की मांग की।

21 मार्च 2017: CJI जे एस खेहर ने संबंधित पक्षों के बीच अदालत के बाहर समाधान का सुझाव दिया।

07 अगस्त: उच्चतम न्यायालय ने तीन सदस्यीय पीठ का गठन किया जो 1994 के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।

08 अगस्त: उत्तरप्रदेश शिया केंद्रीय वक्फ बोर्ड ने उच्चतम न्यायालय से कहा कि विवादित स्थल से उचित दूरी पर मुस्लिम बहुल इलाके में मस्जिद बनाई जा सकती है।

11 सितम्बर: उच्चतम न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को निर्देश दिया कि दस दिनों के अंदर दो अतिरिक्त जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति करें जो विवादिस्त स्थल की यथास्थिति की निगरानी करे।

20 नवम्बर: यूपी शिया केंद्रीय वक्फ बोर्ड ने उच्चतम न्यायालय से कहा कि मंदिर का निर्माण अयोध्या में किया जा सकता है और मस्जिद का लखनऊ में।

08 फरवरी 2018: सिविल याचिकाओं पर उच्चतम न्यायालय ने सुनवाई शुरू की।

14 मार्च: उच्चतम न्यायालय ने स्वामी की याचिका सहित सभी अंतरिम याचिकाओं को खारिज किया।

06 अप्रैल: राजीव धवन ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर 1994 के फैसले की टिप्पणियों पर पुनर्विचार के मुद्दे को बड़े पीठ के पास भेजने का आग्रह किया।

06 जुलाई: यूपी सरकार ने उच्चतम न्यायालय में कहा कि कुछ मुस्लिम समूह 1994 के फैसले की टिप्पणियों पर पुनर्विचार की मांग कर सुनवाई में विलंब करना चाहते हैं।

20 जुलाई: उच्चतम न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रखा।

27 सितम्बर: उच्चतम न्यायालय ने मामले को पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष भेजने से इंकार किया। मामले की सुनवाई 29 अक्टूबर को तीन सदस्यीय नयी पीठ द्वारा किए जाने की बात कही।

29 अक्टूबर: उच्चतम न्यायालय ने मामले की सुनवाई उचित पीठ के समक्ष जनवरी के पहले हफ्ते में तय की जो सुनवाई के समय पर निर्णय करेगी।

12 नवम्बर: अखिल भारत हिंदू महासभा की याचिकाओं पर जल्द सुनवाई से उच्चतम न्यायालय का इंकार।

04 जनवरी 2019: उच्चतम न्यायालय ने कहा कि मालिकाना हक मामले में सुनवाई की तारीख तय करने के लिए उसके द्वारा गठित उपयुक्त पीठ दस जनवरी को फैसला सुनाएगी।

08 जनवरी: उच्चतम न्यायालय ने मामले की सुनवाई के लिए पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ का गठन किया जिसकी अध्यक्षता प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई करेंगे और इसमें न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति एन वी रमन्ना, न्यायमूर्ति यू यू ललित और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ शामिल होंगे।

10 जनवरी : न्यायमूर्ति यू यू ललित ने मामले से खुद को अलग किया जिसके बाद उच्चतम न्यायालय ने मामले की सुनवाई 29 जनवरी को नयी पीठ के समक्ष तय की।

25 जनवरी: उच्चतम न्यायालय ने मामले की सुनवाई के लिए पांच सदस्यीय संविधान पीठ का पुनर्गठन किया। नयी पीठ में प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस ए नजीर शामिल थे।

26 फरवरी: उच्चतम न्यायालय ने मध्यस्थता का सुझाव दिया और फैसले के लिए पांच मार्च की तारीख तय की जिसमें मामले को अदालत की तरफ से नियुक्त मध्यस्थ के पास भेजा जाए अथवा नहीं इस पर फैसला लिया जाएगा।

08 मार्च: उच्चतम न्यायालय ने मध्यस्थता के लिए विवाद को एक समिति के पास भेज दिया जिसके अध्यक्ष उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एफ एम आई कलीफुल्ला बनाए गए।

09 अप्रैल: निर्मोही अखाड़े ने अयोध्या स्थल के आसपास की अधिग्रहीत जमीन को मालिकों को लौटाने की केन्द्र की याचिका का उच्चतम न्यायालय में विरोध किया।

10 मई: मध्यस्थता प्रक्रिया को पूरा करने के लिए उच्चतम न्यायालय ने 15 अगस्त तक समय बढ़ाई।

11 जुलाई: उच्चतम न्यायालय ने “मध्यस्थता की प्रगति” पर रिपोर्ट मांगी।

18 जुलाई: उच्चतम न्यायालय ने मध्यस्थता प्रक्रिया को जारी रखने की अनुमति देते हुए एक अगस्त तक परिणाम रिपोर्ट देने के लिये कहा।

01 अगस्त: मध्यस्थता की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत को दी गई।

02 अगस्त: उच्चतम न्यायालय ने मध्यस्थता नाकाम होने पर छह अगस्त से रोजाना सुनवाई का फैसला किया।

06 अगस्त: उच्चतम न्यायालय ने रोजाना के आधार पर भूमि विवाद पर सुनवाई शुरू की।

04 अक्टूबर: अदालत ने कहा कि 17 अक्टूबर तक सुनवाई पूरी कर 17 नवम्बर तक फैसला सुनाया जाएगा। उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष को सुरक्षा प्रदान करने के लिये कहा।

16 अक्टूबर: उच्चतम न्यायालय ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा।

09 नवम्बर: उच्चतम न्यायालय ने आज फैसला सुना दिया है ।

नसीब सैनी

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दो दिन बंद रहने के बाद जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय रामार्ग पर यातायात के लिए खुला

—वहीं रविवार दोपहर से लगभग 300 छोटे वाहन रामबन में फंसे हुए थे और अब मंगलवार सुबह इन वाहनों में मार्ग साफ होने के बाद अपने गंतव्य की ओर भेजा जा रहा हैं

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जम्मू,(नसीब सैनी)।

जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग दो दिन बंद रहने के बाद मंगलवार सुबह एक बार फिर यातायात के लिए बहाल कर दिया गया। रविवार दोपहर बाद डिगडोल में भूस्खलन के बाद राजामर्ग दो दिनों के लिए निलंबित कर दिया गया था। भूस्खलन से बंद राजमार्ग के दोनों छोर पर फंसे सैकड़ों वाहन आज सुबह मार्ग पूरी तरहं से यातायात के काबिल बनने के बाद छोड़े गए।   

नेशनल हाइवे यातायात एसएसपी जेएस जौहर के अनुसार उधमपुर और जम्मू के बीच लगभग 8000 ट्रक फंसे हुए थे, उधमपुर और रामबन के बीच 3000 ट्रक तथा 200 लाइट मोटर वाहन उधमपुर में फंसे हुए थे। वहीं रविवार दोपहर से लगभग 300 छोटे वाहन रामबन में फंसे हुए थे और अब मंगलवार सुबह इन वाहनों में मार्ग साफ होने के बाद अपने गंतव्य की ओर भेजा जा रहा हैं। 
वहीं रामबन जिला प्रशासन ने फंसे हुए यात्रियों के रात्रि प्रवास के लिए रामबन, रामसू और बनिहाल में कई आश्रय स्थलों में कंबल और गद्दे उपलब्ध कराए थे। पिछले चार दिनों में यह तीसरी बार है जब एनएच-44 वाहनों के आवागमन के लिए बंद किया गया।

नसीब सैनी

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जम्मू कश्मीर : गांदरबल में एक आतंकी ढेर, मुठभेड़ जारी

—उल्लेखनीय है कि रविवार को बांडीपोरा जिले के लडूरा क्षेत्र में शुरू हुई मुठभेड़ सोमवार सुबह तक चली

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गांदरबल,(नसीब सैनी)।

जिले के गुंड इलाके में मंगलवार की सुबह आतंकियों से हुई एक मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने एक आतंकी मार गिराया है। मुठभेड़ जारी है। माना जा रहा है कि अभी एक-दो आतंकी सुरक्षाबलों के घेरे में हैं।

मंगलवार को जिले के गुंड क्षेत्र में सुरक्षाबलों को आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली थी। सेना, सीआरपीएफ और जम्मू कश्मीर पुलिस के एक संयुक्त दल ने पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया। इस दौरान क्षेत्र में छिपे आतंकियों ने सुरक्षाबलों को पास आते देख गोलीबारी शुरू कर दी। सुरक्षाबलों ने भी मोर्चा संभाल लिया। अभी तक की मुठभेड़ में एक आतंकी मारा गया है। उसकी पहचान नहीं हो पाई है। क्षेत्र में अभी एक-दो और आतंकी छिपे हुए हैं। मुठभेड़ जारी है।

उल्लेखनीय है कि रविवार को बांडीपोरा जिले के लडूरा क्षेत्र में शुरू हुई मुठभेड़ सोमवार सुबह तक चली। सुरक्षाबलों ने लश्कर-ए-तैयबा के एक पाकिस्तानी कमांडर अबु तल्हा सहित दो आतंकियों को मार गिराया है। साथ ही आतंकियों के पास से पाकिस्तान में बने हथियार और गोला-बारूद बरामद हुए हैं।

नसीब सैनी

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पंजाब: लुधियाना अस्पताल की नर्स निकली खालिस्तानी आतंकी, दो गिरफ्तार

—साथी समेत किया गिरफ्तार, कई हिन्दू संगठनों के नेता थे निशाने पर
—जांच में खुलासा, टेरर फंडिंग से जुड़ा है पूरा मामला

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चंडीगढ़,(नसीब सैनी)।

पंजाब पुलिस ने एक महिला समेत दो खालिस्तानी आतंकियों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों की गिरफ्तारी को टेरर फंडिंग के साथ जोड़ा जा रहा है। आरोपित महिला लुधियाना के एक अस्पताल में नर्स की नौकरी कर रही थी। नर्सिंग की आड़ में वह खालिस्तानी गतिविधियों में भी लिप्त थी। दोनों के निशाने पर पंजाब के हिन्दू संगठनों के नेता थे और बहुत जल्द पाकिस्तानी एजेंसी से उनके पास ग्रेनेड व हथियार भेजे जाने थे। 

पंजाब पुलिस के ऑपरेशन सेल ने 2 खालिस्तानी आतंकियों को सोमवार को देर शाम गिरफ्तार किया, जिसमें एक महिला भी शामिल है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि उक्त महिला नर्स की नौकरी करते हुए अपने साथ कई अन्य महिलाओं को जोड़ने का काम कर रही थी जबकि उसका साथी गुरदासपुर से गिरफ्तार किया गया है। 

आरोपित पुरुष दुबई में बतौर ड्राइवर काम कर चुका है। इन दिनों पंजाब आया हुआ था। गिरफ्तार की गई महिला की शिनाख्त सुरिंदर कौर के रूप में हुई है। आरोपित महिला फरीदकोट की रहने वाली है जो लुधियाना के एक निजी अस्पताल में बतौर नर्स काम करती थी। सुरिंदर कौर के साथी की पहचान लखबीर सिंह (23) के रूप में हुई है जो होशियारपुर का रहने वाला है और दुबई में बतौर ड्राइवर काम कर चुका है। दोनों व्हाट्सएप कॉल के जरिए एक-दूसरे से जुड़े हुए थे।

पूछताछ में पता चला है कि उनको जल्द ही पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई की मदद मिलने वाली थी। आईएसआई और विदेशों में बैठे खालिस्तानी आतंकियों के एक हैंड ग्रेनेड की खेप पंजाब में भेजी जानी थी। इस खेप को इन्हें पंजाब में एक्टिव खालिस्तानी आतंकियों और उनके स्लीपर सेलों को डिलीवर करना था। इन दोनों को विदेशों में बैठे खालिस्तानी आतंकियों द्वारा लगातार फंडिंग की जा रही थी। नर्सिंग के काम की आड़ में आतंकी गतिविधि सुरेंद्र कौर की उम्र 33 वर्ष है वो अविवाहित है। वह मूल रूप से पंजाब के फरीदकोट की रहने वाली है। इन दोनों की कॉल डिटेल और बैंक अकाउंट से पुलिस ने ट्रेस किया कि ये दोनों खालिस्तानी समर्थक आतंकी गतिविधियों में शामिल थे।

नसीब सैनी

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