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कंप्यूटर प्रोफशनल की हड़ताल से कैथल के सरकारी दफ्तरों में ऑनलाइन सेवा ढप।

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कैथल।

कैथल में कंप्यूटर प्रोफेशनल की हड़ताल से डिजीटल इंडिया का सपना चकनाचूर होता दिखाई दे रहा है। ऑनलाइन सेवाएं बन्द होने से प्रदेश के कंप्यूटर प्रोफेशनल की विभिन्न मांगों को लेकर की गई प्रदेश स्तरीय हड़ताल के चलते ई-दिशा केंद्र, तहसील कार्यालय और एसडीएम कार्यालयों में अपने काम के लिए आए आमजन को सोमवार से ही परेशानी का सामना करना पड़ा। 10 वर्ष से अधिक समय से कार्य कर रहे प्रोफेशनल की नियमित करने की मांग अब सरकार द्वारा दी जा रही दर्जनों ऑनलाइन सेवाएं पर पूरी तरह भारी दिखाई दे रही है। अब तक मिले आकड़ो से प्रदेश में इस हड़ताल से कुल मिलाकर 15 करोड़ रूपये का नुकसान सरकार को हो चुका है और प्रदेश के लाखों लोगों को खाली हाथ ही लौटना पड़ा है। कंप्यूटर प्रोफेशनल की हड़ताल के चलते लगभग प्रदेश के लगभग 18 जिलों के ई-दिशा केंद्र, तहसील कार्यालय व उप तहसील कार्यालय में बने कंप्यूटर रूम में दी जा रही जरूरी सेवाएं पूरी तरह बाधित रही, तो डीसी कार्यालय, एसडीएम कार्यालय व राजस्व विभाग समेत कई विभागों में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों की हड़ताल का असर सरकारी काम पर साफ दिखाई दिया। कार्य में पारदर्शिता लाने के लिए ऑनलाइन सेवाएं दे कर डिजीटल इडिंया का सपना दिखाने वाली प्रदेश सरकार आज कंप्यूटर प्रोफेशनल की हड़ताल के चलते पूरी तरह बैकफुट पर नजर आई। कंप्यूटर प्रोफेशनल की हड़ताल के एक फाइल तक आगे ना बढ़ सकी और ऑनलाइन सेवाएं देने के लिए प्रयोग में ला जा रहे कंप्यूटरों पर धूल जमा हो रह गई। आलम यह रहा कि पिछले पंाच दिनों से ना कोई वाहन पंजीकरण हुआ ओर ना ही कोई ड्राईविंग लाइसेंस बना। इसके साथ ही तहसील कार्यालय व उप तहसील कार्यालय में दी जाने वाले सेवाएं जैसे जमाबन्दी नकल, रोजनामर्चा, इंतकाल, आधार सेवा, रजिस्टरी, प्रमाण पत्र, सीएम विंडो, आर्म लाइसेंस व एफेडिवट लेने आए हजारों लोगों को खाली हाथ ही वापिस लौटना पड़ा। कंप्यूटर प्रोफेशनल संघ  ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की नोटिफिकेशन है कि कच्चे कर्मचारियों को समान काम के बदले समान वेतन दिया जाए, लेकिन हकीकत में ऐसा हो नहीं रहा। संघ के हवा सिंह तंवर ने कहा कि प्रदेश के कई जिलों में अनिश्चित हड़ताल को सफल बनाने के लिए शनिवार व रविवार को प्रदेश कार्यकरिणी के सदस्य जाकर मीटिंग करेगी। अब संघ आने वाले इस सोमवार से 22 जिलों को इस हड़ताल में शामिल करने पर फोकस करेगा। उन्होंने कहा कि सरकार अभी भी मांगों को माने के बजाय कर्मचरियों पर गलत नीतियां अपना डरा रही है और नौकरी से हटा रही है। ऐसे में आने वाले सप्ताह में आन्दोलन ओर तेज कर दिया जाऐगा।  उन्होंने साफ जाहिर किया कि वे अब सरकार के शोषण से पूरी तरह तंग आ चुके है। कंप्यूटर ऑपरेटरों के हड़ताल पर जाने के पीछे सरकार पूरी तरह जिम्मेदार है। उन्होंने बताया कि अगर सरकार जरा सा ध्यान इन कंप्यूटर प्रोफेशनल्सों की जायज मांगों पर देती तो आज प्रदेश के लाखों लोगों के काम ना रूकते। कंप्यूटर प्रोफेशनल्स पीछे कई सालों से आमजन का हरसंभव काम निपटाने का प्रयास कर रहे है।उन्होंने कहा कि अब प्रदेश के तहसील कार्यालय का काम हड़ताल से पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। लोगों को परेशानी हो रही है। जिसके पीछे प्रदेश सरकार द्वारा कंप्यूटर प्रोफेशनल्स संघ से किए जा रहे झूठे आश्वासन पूरी तरह जिम्मेदार है। उन्होंने बताया कि सरकार भूल गई है कि सरकारी विभागों में कंप्यूटर प्रोफेशनल्स का सबसे बड़ा संगठन है। कंप्यूटर प्रोफेशनल्स आईटी क्षेत्र में रचनामत्क कार्यों को बढ़ावा देने के लिए पिछले 12 सालों से पूरी तत्परता और ईमानदारी से कार्य कर रहे हैं और शांतपूर्ण रवैय से कंप्यूटर प्रोफेशनल्स अपनी मांगों को लेकर कई बार अपनी जायज मांगों का ज्ञापन सीएम को भेज चुके है। लेकिन सरकार कंप्यूटर प्रोफेशनल्स की लगातार अनदेखी करती आई हैं। कर्मचारियों की मांगों पर कोई गंभीरता बरती नहीं जा रही है। जिससे कर्मचारी अनिश्चित हड़ताल पर बैठने को मजबूर हो गए हैं और प्रदेश के लोग काम करवाने के लिए भटक रहे है। संघ के राज्य महासचिव जितेंद्र कादयान ने कहा कि वे प्रदेश के सभी सरकारी विभागों, राजस्व विभाग के क्षेत्रीय कार्यालयों, डीसी आफिस, एसडीएम आफिस व तहसील में तैनात हैं। आज तक जिला आईटी सोसायटी के जरिए प्रदेश के ई-दिशा केंद्रों से लेकर डीसी आफिस में लगे कर्मचारियों के नाम पर बजट का कोई प्रावधान नहीं है।उन्होंने बताया कि राजस्व के रुप में करोड़ों रुपए एकत्र कर सरकार को देते हैं। जिसके बाद भी उनकी तरफ कोई ध्यान नही दिया गया। उन्होंने बताया कि मांगों को लेकर सीएम के नाम सकैड़ो भेजे ज्ञापन में चेतावनी देते हुए 8 अप्रैल को ही सरकार को बता दिया था। उन्होंने  बताया कि  15 अप्रैल तक उनकी मांगों को नहीं पूरा किया जाता तो वे बेमियादी हड़ताल पर चले जाएंगे। इसके बाद भी सरकार ने उनकी मांग को कोई कदम नहीं उठा और वे 15 अप्रैल से मजबूरन हड़ताल पर चल रहे हैं। सरकारी की इस अनदेखी से प्रदेश के लाखों लोगों के काम रूक गए है और सरकार अभी भी कर्मचरियों को डरा धमका रही है। 

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चौटाला की जल्द रिहाई की अर्जी पर नए सिरे से विचार करे दिल्ली सरकारः हाई कोर्ट

—अमित साहनी ने कहा था कि चौटाला को भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत दस साल की सजा मिली है। उन्होंने कहा कि चौटाला की उम्र 83 वर्ष हो चुकी है और वे अप्रैल 2013 तक 60 फीसदी स्थायी दिव्यांगता है

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नई दिल्ली,(नसीब सैनी)।

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वो जेबीटी भर्ती घोटाले में 10 साल की सजा काट रहे हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला की जल्द रिहाई की मांग करने वाली अर्जी पर नए सिरे से विचार करे। हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार के पहले के उस आदेश को निरस्त कर दिया जिसमें उसने चौटाला की समय पूर्व रिहाई की मांग को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने इस मामले पर पिछले 26 नवंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था।

चौटाला ने उम्र और ख़राब सेहत का हवाला दे कर समय से पहले रिहाई की गुहार लगाई थी।चौटाला ने केंद्र सरकार के उस नोटिफिकेशन का हवाला दिया था जिसमें 60 वर्ष के ऊपर के पुरुष कैदियों की रिहाई की बात कही गई है।

चौटाला की ओर से कहा गया था कि केंद्र सरकार के विशेष माफी संबंधी नोटिफिकेशन के तहत 60 साल के ऊपर के पुरुष कैदियों, 55 साल के ऊपर की महिला और ट्रांसजेंडर कैदियों की रिहाई की बात कही गई है जिन्होंने अपनी सजा की आधी अवधि पूरी कर ली है। इस नोटिफिकेशन में कहा गया है कि 70 फीसदी से ज्यादा उन दिव्यांगों की भी रिहाई की जा सकती है जिन्होंने अपनी सजा की आधी अवधि पूरी कर ली है।

अमित साहनी ने कहा था कि चौटाला को भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत दस साल की सजा मिली है। उन्होंने कहा कि चौटाला की उम्र 83 वर्ष हो चुकी है और वे अप्रैल 2013 तक 60 फीसदी स्थायी दिव्यांगता है। उसके बाद जून 2013 में उन्हें पेसमेकर लगाया गया जिसके बाद वे 70 फीसदी दिव्यांगता के शिकार हैं। इसलिए नोटिफिकेशन के मुताबिक वे दो वर्गों में रिहाई के हकदार हैं।

चौटाला जूनियर बेसिक ट्रेनिंग टीचर्स की भर्ती के घोटाले में दोषी करार दिए जाने के बाद दस साल की कैद की सजा काट रहे हैं । उनके साथ ही उनके पुत्र अजय चौटाला और तीन अन्य दोषी भी दस साल कैद की सजा काट रहे हैं ।

नसीब सैनी

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करनाल : भ्रष्टाचार के आरोप में तहसीलदार सहित चार अधिकारी निलंबित

-मुख्यमंत्री ने करनाल तहसील का औचक निरीक्षण कर दिए आदेश

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चंडीगढ़,(नसीब सैनी)।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सोमवार को करनाल तहसील कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार के आरोप में तहसीलदार, नायब तहसीलदार, रजिस्टरी क्लर्क एवं पटरवारी को निलंबित करने के आदेश दिए।

सोमवार दोपहर बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने तहसील कार्यालय में भ्रष्टाचार की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए निरीक्षण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री को कार्यालय में काफी खामियां मिलीं। खासकर तहसीलदार, नायब तहसीलदार व रजिस्टरी क्लर्क द्वारा रजिस्टरी की एवज में पैसे मांगने की शिकायत पर मुख्यमंत्री ने कड़ा संज्ञान लिया। निरीक्षण के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि 27 नवम्बर की रजिस्टरी भी आरसी की टेबल पर ही पड़ी थी, जबकि ई-रजिस्ट्रेशन के चलते उसी दिन रजिस्टरी की प्रक्रिया पूरी होती है। इसको देखकर मुख्यमंत्री ने तुरंत तहसीलदार कारण पूछा लेकिन तहसीलदार कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए। बताया जा रहा है कि निगम पार्षद रामंचद्र व एक अन्य से तहसील कार्यालय में रजिस्टरी की एवज में पैसे की डिमांड की गई थी। भ्रष्टाचार व रजिस्टरी कार्य में अनियमितताएं पाए जाने पर मुख्यमंत्री ने तहसीलदार रविंद्र, नायब तहसीलदार हवा सिंह, रजिस्टरी क्लर्क राजबीर व पटवारी सलमा को निलंबित करने के आदेश दिए।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि तहसील कार्यालयों में भ्रष्टाचार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए सरकार की ओर से ई-रजिस्ट्रेशन की सुविधा शुरू की गई है। शाम पांच बजे के बाद रजिस्टरी किए जाने को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि दिनभर में 90 टोकन दिए जाते हैं। 90 टोकनों की उसी दिन रजिस्टरी करना अनिवार्य है, चाहे वह पांच बजे तो या फिर नौ बजे तक। प्रति रजिस्टरी एक प्रतिशत तहसीलदार की फीस पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह भ्रष्टाचार की श्रेणी में है, इस पर जल्द संज्ञान लिया जाएगा।
तहसीलदार रविंद्र ने कहा कि पंजीकृत रजिस्टरी की डिलीवरी हो चुकी थी। सर्वर डाउन होने के कारण यह वह रजिस्टरी नहीं निकल पाई। उनके कार्यालय की ओर से कोई लापरवाही नहीं बरती गई है। निलंबित होने के सवाल पर तहसीलदार ने कहा कि वे मुख्यमंत्री से मिलेंगे और अपना पक्ष रखेंगे।

नसीब सैनी

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हरियाणा ने किया निर्भया फण्ड का 32 प्रतिसत यूज

–इस सिलसिले में, देशभर में निर्भया फंड के इस्तेमाल का आंकड़ा सिर्फ 11 फीसदी है, जबकि हरियाणा ने 32 फीसदी फंड का उपयोग किया है।

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पंचकूला,(नसीब सैनी)।

हरियाणा पुलिस ने महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित परियोजनाओं को लागू करने के लिए गृह मंत्रालय द्वारा आवंटित किए गए निर्भया फंड के इस्तेमाल में शीर्ष पांच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अपनी जगह बनाई है। देशभर में निर्भया फंड के इस्तेमाल का आंकड़ा सिर्फ 11 फीसदी है, जबकि हरियाणा ने 32 फीसदी फंड का उपयोग किया है। मिजोरम (50 प्रतिशत), छत्तीसगढ़ (43 प्रतिशत) और नागालैंड (39 प्रतिशत) के पास हरियाणा की तुलना में बेहतर उपयोग के आंकडे हैं।

हरियाणा पुलिस के प्रवक्ता ने शुक्रवार को पंचकूला में यह जानकारी देते हुए बताया कि हरियाणा पुलिस को आवंटित किए गए कुल 13 करोड़ 66 लाख रुपये में से 4 करोड़ 46 लाख रुपये की राशि का इस्तेमाल महिला सुरक्षा को बढ़ावा देने संबंधी विभिन्न परियोजनाओं को लागू करने के लिए किया गया है।   उन्होनें बताया कि 9 करोड़ 20 लाख रुपये की शेष राशि हरियाणा की डायल 100 योजना के एक भाग के रूप में महिलाओं के लिए ‘एमरजैंसी रिस्पोंस स्र्पोट स्कीम‘ को लागू करने के लिए निर्धारित की गई है। इस राशि का उपयोग चालू वर्ष के दौरान डायल 100 योजना के क्रियान्वयन के दौरान किया जाना प्रस्तावित है।

इस सिलसिले में, देशभर में निर्भया फंड के इस्तेमाल का आंकड़ा सिर्फ 11 फीसदी है, जबकि हरियाणा ने 32 फीसदी फंड का उपयोग किया है।

निर्भया फंड को लेकर केवल उत्तराखंड और मिजोरम (50 प्रतिशत), छत्तीसगढ़ (43 प्रतिशत) और नागालैंड (39 प्रतिशत) के पास हरियाणा की तुलना में बेहतर उपयोग के आंकडे हैं। प्रवक्ता ने बताया कि हरियाणा पुलिस महिला सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और जल्द ही सार्वजनिक स्थानों, सार्वजनिक परिवहन और कार्यस्थलों पर महिलाओं के लिए एक सुरक्षित माहौल बनाने के उद्देश्य से कई पहल और परियोजनाएं लेकर आएगी।

नसीब सैनी

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