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तेलंगाना

तेलंगाना : बस की एक ट्रक से टक्कर में 5 की मौत, 14 घायल

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हैदराबाद। तेलंगाना के सूर्यापेट जिले में रविवार को एक बस की एक ट्रक से टक्कर होने के कारण पांच लोगों की मौत हो गई और 14 अन्य घायल हो गए। यह हादसा हैदराबाद से लगभग 150 किलोमीटर दूर मुदुलाचेरुवु के निकट तडक़े करीब बजे हुआ। आंध्र प्रदेश स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (एपीएसआरटीसी) की यह बस विजयवाड़ा से हैदराबाद जा रही थी।

प्रत्यादर्शियों ने बताया कि चालक बस को दूसरी बस से आगे जाने की कोशिश कर रहा था। इसी कोशिश में बस की ट्रक से भिडं़त हो गई। बस में 36 यात्री सवार थे। घायलों को कोडाद और सूर्यापेट के अस्पतालों में भर्ती करा दिया गया है। इनमें से चार की हालत गंभीर है।
-आईएएनएस

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हैदराबाद एनकाउंटर की जांच करेगा तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग

–सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज वीएस सिरपुरकर की अध्यक्षता वाले आयोग को 6 माह में देनी होगी रिपोर्ट
—सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाईकोर्ट में की जा रही सुनवाई पर रोक लगाई

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नई दिल्ली,(नसीब सैनी)।

चीफ जस्टिस एसए बोब्डे की अध्यक्षता वाली बेंच ने हैदराबाद एनकाउंटर की न्यायिक जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज वीएस सिरपुरकर की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय आयोग का गठन किया है। आयोग के दो अन्य सदस्यों में बांबे हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज रेखा बलदोता और पूर्व सीबीआई प्रमुख डीआर कार्तिकेयन हैं। सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को छह महीने के भीतर जांच पूरी करके रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, तेलंगाना हाईकोर्ट और अन्य किसी भी अदालत में इस मामले में की जा रही सुनवाई पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी द्वारा अब तक की गई जांच रिपोर्ट भी तलब की है।

सुनवाई के दौरान तेलंगाना सरकार के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि आरोपितों ने पुलिस की पिस्टल छीन कर फायर किया, तब पुलिस को गोली चलानी पड़ी। इस पर चीफ जस्टिस ने पूछा कि कोई पुलिस वाला घायल नहीं हुआ? तब रोहतगी ने कहा कि दो पुलिस वाले घायल हुए। चीफ जस्टिस ने पूछा कि क्या वे गोली से घायल हुए ? तब रोहतगी ने कहा कि नहीं पत्थर से। हर आरोपित के पास पिस्टल नहीं थी। तब चीफ जस्टिस ने कहा कि हमारा मत है कि आप जांच होने दीजिए, वहां सारी बातें आप रख सकते हैं। रोहतगी ने कहा कि पीयूसीएल केस में फैसला था कि दूसरे थाने की टीम जांच करेगी। एनकाउंटर टीम के अफसर से ऊंचे रैंक का अफसर जांच टीम का अध्यक्ष होगा। हमने इस आधार पर एसआईटी बनाई है। 

चीफ जस्टिस ने पूछा कि एसआईटी का हेड कौन है? रोहतगी ने कहा कि कमिश्नर रैंक के अधिकारी हैं। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि क्या आप उन पर मुकदमा चलाएंगे। अगर हां, तो हमारे आदेश देने जैसा कुछ नहीं। अगर आप उनको निर्दोष मानते हैं, मुकदमा नहीं चलाएंगे तो फिर हमें जांच से मत रोकिए। लोगों को सच जानने का हक है। तब रोहतगी ने कहा कि हम चीजें कोर्ट में रखेंगे। जज तय करेगा। तब चीफ जस्टिस ने कहा कि मतलब आप अपनी तरफ से मांग नहीं करेंगे। तब रोहतगी ने कहा कि पुलिस की एफआईआर के मुताबिक पुलिस ने आत्मरक्षा में गोली चलाई। तब चीफ जस्टिस ने कहा कि इसका मतलब कि पुलिस की जान को खतरा था? हमें नहीं लगता कि यह मुकदमा कभी चलेगा। कोई गवाह सामने लाया जाएगा। कोई बयान देगा। आप खुल कर क्यों नहीं कहते हैं। 

चीफ जस्टिस ने कहा कि जो लोग मारे गए हैं, उनका वकील कौन होगा? पुलिस के गवाहों से सवाल कौन करेगा? यह मुकदमा होगा या मज़ाक? तब रोहतगी ने कहा कि अगर आप किसी को नियुक्त करें तो राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और हाईकोर्ट की कार्रवाई रोक दें। हम कहां-कहां जवाब दें। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता और वकील मनोहर लाल शर्मा ने मारे गए आरोपितों के परिवार के लिए मुआवजे की मांग की। तब चीफ जस्टिस ने कहा कि हम जांच करवा रहे हैं। इसका मतलब यह नहीं कि उन लोगों पर जो आरोप थे, उनसे हमने आंख बंद कर ली है। पिछले 11 दिसम्बर को सुनवाई के दौरान तेलंगाना सरकार ने कहा था कि कोई भी आदेश देने से पहले सुन लीजिए, हमने अब तक क्या कदम उठाए हैं। याचिका में मुठभेड़ में शामिल पुलिसवालों और कमिश्नर वीसी सज्जनार पर एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। याचिका में पुलिस की कार्रवाई को संदिग्ध और तय नियमों के खिलाफ बताया गया है। 

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में तीन याचिकाएं दायर की गई हैं। तीनों याचिकाएं वकीलों ने ही दायर की है। सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रदीप कुमार यादव, जीएस मणि और वकील मनोहरलाल शर्मा ने याचिका दायर की है। याचिका में पूरे मामले की जांच की मांग की गई है साथ ही दोषी पुलिसवालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। वकील मनोहरलाल शर्मा ने याचिका दायर कर मांग की है कि राज्यसभा सांसद संजय सिंह, जया बच्चन और दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल के बयानों से एनकाउंटर की कार्रवाई को बल मिला है। मनोहरलाल शर्मा ने मांग की है कि रेप के आरोपित को जब तक दोषी नहीं ठहरा दिया जाता तब तक टीवी चैनल्स पर कोई कार्यक्रम या बहस चलाने पर रोक लगाने के लिए दिशानिर्देश जारी किया जाए। वकील जीएस मणि और प्रदीप कुमार यादव ने अपनी याचिका में कहा है कि हैदराबाद एनकाउंटर में सुप्रीम कोर्ट के 2014 के आदेशों का अनुपालन नहीं किया गया। याचिका में हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर वी सी सज्जनार के खिलाफ जांच की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि पुलिस की कार्रवाई तय नियमों के खिलाफ है। याचिका में कहा गया है कि एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच की जरूरत है।

उल्लेखनीय है कि हैदराबाद के दिशा गैंगरेप एवं हत्याकांड के चारों आरोपितों की 6 दिसम्बर की सुबह पुलिस एनकाउंटर में मौत हो गई थी। हैदराबाद पुलिस के मुताबिक चारों आरोपितों को सीन रिक्रिएट करने के लिए घटनास्थल पर ले जाया गया था, जहां से चारों ने भागने की कोशिश की। हैदराबाद पुलिस के मुताबिक उसने आत्मरक्षा में चारों आरोपितों को मार गिराया।

नसीब सैनी

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मेरठ : आजाद भारत में पहली बार होगी चार दोषियों को फांसी

—पहली बार चार लोगों को होगी फांसी

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मेरठ,(नसीब सैनी)।

निर्भया केस के दोषियों को फांसी की सजा देने की तिहाड़ जेल में तैयारियां चल रही है। पवन जल्लाद की मानें तो आजाद भारत के इतिहास में पहली बार चार लोगों को एक साथ फांसी पर लटकाया जाएगा। मेरठ जिला कारागार का जल्लाद पवन इन दोषियों को फांसी पर लटकाने के लिए बेकरार है।

 उसका कहना है कि फांसी की यह सजा समाज के दुश्मनों के लिए एक सबक होगी। दिल्ली के चर्चित निर्भया केस के चार दोषी इस समय तिहाड़ जेल में बंद है। इन सभी को फांसी की सजा पर मुहर लग चुकी है। अब केवल तारीख का इंतजार किया जा रहा है। तिहाड़ जेल प्रशासन इन दोषियों को फांसी देने की तैयारियों में जुटा है। देश में अब केवल दो जल्लाद यूपी के लखनऊ और मेरठ जेल में मौजूद है। लखनऊ का जल्लाद इलियास इस समय बीमार चल रहा है। ऐसे में मेरठ जेल के पवन जल्लाद द्वारा ही इन चारों को फांसी देने की संभावना बन गई है।

पहली बार चार लोगों को होगी फांसी
मेरठ की कांशीराम आवासीय काॅलोनी में रहने वाले पवन जल्लाद का कहना है कि आजाद भारत में चार लोगों को एक साथ पहली बार फांसी होगी। इस प्रकार से यह लम्हा देश के इतिहास में दर्ज हो जाएगा। इससे पहले दो-दो लोगों को एक साथ फांसी दी जा चुकी है। वह खुद अपने हाथों से निर्भया के दोषियों को फांसी देना चाहता है। अगर उसे बुलाया गया तो इससे ज्यादा खुशी की कोई बात नहीं होगी।

दादा से सीखा फांसी का ककहरा
आधुनिक समय में जल्लाद बनने के लिए कोई युवा तैयार नहीं है। पवन जल्लाद की अगली पीढ़ी भी जल्लाद बनने को राजी नहीं है। पवन ने फांसी लगाने का जज्बा अपने दादा कल्लू जल्लाद से सीखा। पवन बताते हैं कि उसके दादा कल्लू जल्लाद देश की विभिन्न जेलों में जाकर फांसी देते थे। उन्होंने इंदिरा गांधी के हत्यारों और मशहूर रंगा-बिल्ला को फांसी दी थी। उनसे ही सीखकर पवन ने भी जल्लाद बनने की ठानी। अपने दादा के साथ वह पांच लोगों को फांसी दिलवा चुके हैं।

पहली फांसी का इंतजार कर रहे पवन
भले ही यूपी में केवल दो जल्लाद ही रह गए हो, लेकिन अब फांसी की सजा कम होने के कारण पवन जल्लाद अपनी पहली फांसी का इंतजार कर रहे हैं। पवन का कहना है कि अपने दादा के सहायक के तौर पर तो वह पांच फांसी देने में शामिल रहे, लेकिन स्वतंत्र तौर पर वह पहली फांसी का इंतजार कर रहे हैं। वह दुआ कर रहे हैं कि निर्भया के दोषियों को फांसी देने के लिए उन्हें बुलाया जाए।

आर्थिक तौर पर कर रहे संघर्ष
पवन जल्लाद को सरकार से केवल पांच हजार रुपए प्रतिमाह का वेतन प्राप्त होता है। इतनी छोटी से रकम में वह गुजारा नहीं कर पाते। पांच बेटियों और दो बेटों के पिता पवन का कहना है कि आर्थिक संकट से निपटने के लिए उसका वेतन बढ़ाकर 20 हजार रुपए किया जाना चाहिए। पेट भरने के लिए उसे कपड़ा बेचने का काम करना पड़ रहा है। उसके पिता मम्मू जल्लाद और परदादा लक्ष्मण सिंह भी मशहूर जल्लाद रह चुके हैं।

नसीब सैनी

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डॉ. प्रियंका रेड्डी की हत्या के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर लाठीचार्ज

—अभी भी पुलिस थाना के बाहर कोर्ट जाने के रास्ते पर हजारों लोगों का जमावड़ा लगा हुआ है

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हैदराबाद (तेलंगाना),(नसीब सैनी)।

वेटनरी डॉक्टर प्रियंका रेड्डी की हत्या में पुलिस की लापरवाही को लेकर शादनगर थाना के सामने प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस ने लाठी चार्ज किया है।

पुलिस के लाठीचार्ज मेंं कई लोग घायल हुए हैं। पुलिस की इस कार्रवाई को लेकर लोगों में आक्रोश है। अभी भी पुलिस थाना के बाहर कोर्ट जाने के रास्ते पर हजारों लोगों का जमावड़ा लगा हुआ है। बार एसोसिएशन ने आरोपितों की कोई मदद करने से इनकार का दिया है।

नसीब सैनी

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