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तमिलनाडु

पीएम मोदी का आश्वासन: तमिलनाडु को केंद्र से पूर्ण सहायता मिलेगी

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चेन्नई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को तमिलनाडु और राज्य के अन्य हिस्सों में भारी बारिश और बाढ के कारण पैदा हुई स्थिति से निपटने के लिए केंद्र से पूर्ण सहायता का आश्वासन दिया।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक ट्वीट में कहा कि चेन्नई पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चेन्नई व अन्य इलाकों में भारी बारिश और बाढ़ से उपजी स्थिति पर मुख्यमंत्री (के.पलानीस्वामी) और उप मुख्यमंत्री (ओ.पन्नीरसेल्वम) के साथ चर्चा की। ट्वीट के अनुसार कि उन्होंने केंद्र से हर प्रकार की सहायता का आश्वासन दिया है। राज्य में पिछले सप्ताह भारी बारिश से 14 लोगों की मौत हो गई थी।

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आखिरकार जिन्दगी की जंग हार गया सुजीत, तीन दिन बाद बोरवेल से निकाला गया शव

–परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव जे. राधाकृष्णन ने कहा कि बच्चे का शरीर अब गलने की स्थिति में है। हमने उसे बचाने की पूरी कोशिश की लेकिन यह दुखद है कि उसे बचाया नहीं जा सका

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चेन्नई/ नई दिल्ली,(नसीब सैनी)।

तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली जिले में एक बोरवेल में गिरे दो साल के मासूम सुजीत विल्सन की आखिरकार मौत हो गई। करीब तीन दिन बाद सोमवार को बोरवेल से सुजीत को बाहर निकाला गया। उसे  तत्काल मानाप्पराई के सरकारी अस्पताल में लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उसके बाद उसका शव घर ले जाएगा।

सुजीत विल्सन की सलामती के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व कांग्रेस के नेता राहुल गांधी के अलावा तमाम कई बड़ी हस्तियों ने दुआएं मांगी थी। लेकिन इन सब दुआओं के बावजूद बच्चे को जिन्दा नहीं बचाया जा सका।

परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव जे. राधाकृष्णन ने कहा कि बच्चे का शरीर अब गलने की स्थिति में है। हमने उसे बचाने की पूरी कोशिश की लेकिन यह दुखद है कि उसे बचाया नहीं जा सका। 

उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को तिरुचिरापल्ली जिले के नादुकट्टुपट्टी में  सुजीत विल्सन नामक एक बच्चा बोरवेल में गिर गया था। सूचना मिलते ही बचाव दल तत्काल मौके पर पहुंचकर उसे बचाने के लिए बोरवेल के पास एक सुरंग खोदने लगा। सुजीत पहले 30 फीट की गहराई में था। लेकिन धीरे-धीरे नीचे सकरते हुए 100 फीट में जाकर फंस गया। बच्चे को बचाने के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, राज्य पुलिस और स्थानीय प्रशासन की कई टीमें घटनास्थल पर जुटी हुईं थी। इसके अलावा राज्य के कई बड़े अधिकारी व मंत्री भी मौजूद थे।

नसीब सैनी

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एससी-एसटी एक्ट में तुरंत होगी गिरफ्तारी, दो जजों की बेंच का फैसला निरस्त

—सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने अपने फैसले में माना था कि एससी-एसटी एक्ट में तुरंत गिरफ्तारी से कई बार बेकसूरों को जेल जाना पड़ता है

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नई दिल्ली,(नसीब सैनी)।

सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने एससी-एसटी एक्ट में गिरफ्तारी के प्रावधानों को हल्का करने के पिछले साल दिये गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मामले में दो जजों की बेंच के फैसले को निरस्त कर दिया है। पिछले साल दो जजों की बेंच ने अपने फैसले में माना था कि एससी-एसटी एक्ट में तुरंत गिरफ्तारी की व्यवस्था के चलते कई बार बेकसूर लोगों को जेल जाना पड़ता है। कोर्ट ने तुरंत गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी। इसके खिलाफ सरकार ने पुनर्विचार अर्जी दायर की थी। कोर्ट ने पिछले 18 सितम्बर को फैसला सुरक्षित रख लिया था।

पिछले साल दिए इस फैसले में कोर्ट ने माना था कि एससी-एसटी एक्ट में तुरंत गिरफ्तारी की व्यवस्था के चलते कई बार बेकसूर लोगों को जेल जाना पड़ता है। कोर्ट ने फैसले में तुरंत गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी। बाद में केंद्र सरकार ने रद्द किए गए प्रावधानों को दोबारा जोड़ दिया था।
पिछले 24 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट में सरकार की ओर से किये गए बदलाव के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार की ओर से किये गए संशोधन पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में एससी-एसटी एक्ट के मामलों में तुरंत गिरफ्तारी के प्रावधान का विरोध किया गया है। याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस एक्ट में तुरंत गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी लेकिन सरकार ने बदलाव कर रद्द किए गए प्रावधानों को फिर से जोड़ दिया।

नसीब सैनी

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पांच राज्यों में अवैध रेत खनन का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

अदालत ने केंद्र सरकार, मध्यप्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश और महाराष्ट्र सरकार को जारी किया नोटिस

नई दिल्ली,(नसीब सैनी)।

देश के पांच राज्यों में अवैध रेत खनन का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, मध्यप्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश और महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया है।

याचिका एम अलगरस्वामी ने दायर किया है। याचिका में अवैध रेत खनन को रोकने और उसकी सीबीआई जांच की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि इन राज्यों में बिना पर्यवारण की मंजूरी के बालू का खनन हो रहा है।

याचिका में कहा गया है कि अधिकारियों की मिलीभगत से बालू का अवैध खनन हो रहा है। इससे पर्यावरण और राजस्व का नुकसान हो रहा है।

नसीब सैनी

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