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सोशल मीडिया पर अंकुश जरूरी

—तमाम निजी टीवी न्यूज चैनल वायरल वीडियो को हवा देने लगे हैं। यह खतरनाक है। बेशक, हमें संविधान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्राप्त है

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रामकृष्ण जायसवाल

मीडिया सूचनाओं तथा आंकड़ों को संरक्षित तथा संप्रेषित करने का उपकरण है। मीडिया का कार्य सूचनाओं का एकत्रीकरण करना तथा उससे आमलोगों को पारदर्शिता के साथ अवगत कराना है। सरकारी क्रियाकलापों तथा सामाजिक क्रियाकलापों को उजागर करना भी मीडिया का कार्य है। लोकतंत्र में मीडिया का सबसे बड़ा रोल होता है। वह समाज में घटित प्रत्येक घटना पर रोशनी डालती है। उसका काम टॉर्च दिखाना होता है। इसीलिए मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है।

पहले पत्रकार खबरें जुटाने के लिए गांव-गांव, गली-गली की खाक छानते थे। राजनेता और जनप्रतिनिधि उनसे अपने इलाके की फीडबैक लिया करते थे। अखबारों में छपी खबरों पर सरकार तुरंत संज्ञान लेती थी। नेता और अफसर मीडिया के लोगों का लिहाज करते थे। वे डरते थे कि पत्रकार कहीं उनकी पोल न खोल दें। पत्रकारों को वेतन भले ही कम मिलता था लेकिन समाज में उनकी उपस्थिति गरिमामयी मानी जाती थी। उन्हें असीम इज्जत मिलती थी। पत्रकार भी उत्साहपूर्वक कार्य करते थे। उन्हें लगता था कि वे समाज के शिल्पी हैं। लेकिन समय के साथ स्थिति बदल गई। मीडिया में तकनीक का चलन बढ़ गया। मिशन की पत्रकारिता प्रोफेशन बन गई।

उद्योगपतियों ने सरकार और प्रशासन पर रसूख जताने के लिए अखबार निकाल लिए। पत्रकार भी सुविधाभोगी हो गया। अखबारों के मालिक पत्रकारों से धौंस दिलाकर अपना उल्लू सीधा करने लगे। अपना अन्य कारोबार बढ़ाने लगे। दिन दूनी-रात चौगुनी तरक्की करने लगे। नतीजतन पत्रकार दलाल बन गया। देश में कई जगहों पर गलत आचरण के कारण पत्रकारों पर उंगलियां उठने लगी। कहना गलत नहीं होगा कि तकनीक की पत्रकारिता ने इस पेशे की आत्मा निगल ली। विदेशों की देखादेखी अपने देश में भी इलेक्ट्रानिक चैनल आने लगे। समाज की अच्छाइयों की कम, बुराइयों की चर्चा ज्यादा होने लगी। मीडिया को टीआरपी रेप आदि की खबरों से ज्यादा मिलने लगी। चैनलों पर वही दिखाया जाने लगा। स्टिंग की आड़ में वसूली होने लगी। मीडिया का रुतबा कम होने लगा। फिर समय ने पलटा खाया। सोशल मीडिया का उदय हुआ।

फेसबुक, व्हाट्सएप, टि्वटर, यू-ट्यूब, इंस्टाग्राम इत्यादि चलन में आ गए। शुरू में तो लोग उनके माध्यम से एक-दूसरे को मित्र बनाते गए। बाद में इसके लती हो गए और समाज या सरकार के मामले में सही-गलत का फैसला करने लगे। इसका लत लोगों में इस कदर लग जाता है कि फिर वो चाहे बच्चा हो अथवा बूढ़ा या जवान, सभी उसमे इस कदर चिपके होते हैं जैसे गुड़ में मक्खियां चिपकी होती हैं। आज उनका उपयोग व्यक्ति की अभिव्यक्ति की आजादी से कहीं ऊपर जा रहा है। जो समाज के लिए खतरा बन चुका है। सोशल मीडिया से मित्रता करते-करते लोग उस पराकाष्ठा को भी पार कर गए हैं जो एक-दूसरे की प्राण तक लेने से नहीं कतराते हैं। सोशल मीडिया अब शोषण मीडिया बन चुकी है। सोशल मीडिया लोगों का न केवल मानसिक शोषण कर रहा है बल्कि धन आदि की लालच की वजह से शारीरिक शोषण भी करने लगा है। आज लोगों के उत्पीड़न का अभिकरण सोशल मीडिया ही है। फिर चाहे बलात्कार की घटनाएं हो या फिर अवैध धन की मांग हो। आज देशभर में लगभग 116 करोड़ मोबाइल हैंडसेट उपलब्ध हैं।

भारत की 1.30 अरब की जनसंख्या में लगभग 70  करोड़ लोगों के पास स्मार्टफोन हैं। इनमें से आधी जनसंख्या फेसबुक और व्हाट्सएप पर सक्रिय है। राजनीतिक दल भी सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी राजनीतिक जमीन तैयार कर रहे हैं। आज चुनाव जीतने के लिए सोशल मीडिया सबसे उत्तम भूमिका निभा रहा है। सभी राजनीतिक दलों की साइबर सेल सक्रिय रहती है जो दलों के प्रचार का कार्य करती है तथा उनके झूठे मुद्दों को भी फैलाती रहती है। इससे जनता गुमराह होती है। सोशल मीडिया सनसनी फैलाने का माध्यम बन गया है।

तमाम निजी टीवी न्यूज चैनल वायरल वीडियो को हवा देने लगे हैं। यह खतरनाक है। बेशक, हमें संविधान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्राप्त है। लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में इतनी छूट नहीं दी जा सकती, जिसमें लोगों के जानमाल का नुकसान होता हो। सोशल मीडिया दोधारी तलवार है, जो दोनों ओर से वार करती है। सोशल मीडिया पर फैलते अफवाहों से सरकार भी परेशान है। वह उस पर अंकुश लगाने के दावे तो तमाम करती है लेकिन हकीकत में कुछ कर नहीं पाती। अब सारी जिम्मेदारी अदालत पर आ टिकी है। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से सोशल मीडिया पर अंकुश लगाने का ब्ल्यूप्रिंट मांगा है। देखना दिलचस्प होगा कि सोशल मीडिया पर अंकुश कब तक लगता है, लग पाता भी है या नहीं।

(लेखक अध्यापक हैं।)

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राज्य सरकार की तरफ से गांवों में किया जा रहा है शहरों की तर्ज पर विकास:सुधा

निवर्तमान अध्यक्षा उमा सुधा ने किया वाल्मीकि जयंती पर गांव खेड़ी रामनगर में किया वाल्मीकि चौपाल व भवन निर्माण कार्य का शिलान्यास, विकास कार्यो पर खर्च होगा 10 लाख का बजट

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कुरुक्षेत्र । नगर परिषद की निवर्तमान अध्यक्षा उमा सुधा ने कहा कि राज्य सरकार की तरफ से गांवों का शहरों की तर्ज पर विकास किया जा रहा है। इस सरकार ने गांवों में 24 घंटे बिजली, पीने का पानी हर घर तक पहुंचाने के लिए हर घर तक नल योजना को अमलीजामा पहनाने का काम किया है। वे बुधवार को गांव खेड़ी रामनगर में वाल्मीकि जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रही थी। इससे पहले निवर्तमान अध्यक्षा उमा सुधा ने 5 लाख रुपए की लागत हरिजन चौपाल की चारदीवारी व 5 लाख रुपए की लागत से बनने वाली वाल्मीकि चौपाल की चारदीवारी के कार्य का शिलान्यास किया। इस दौरान निवर्तमान अध्यक्षा उमा सुधा ने गांव के लोगों को भगवान वाल्मीकि जयंती की शुभकामनाएं दी है। निवर्तमान अध्यक्षा उमा सुधा ने कहा कि आज समाज के लोगों को भगवान वाल्मीकि के दिखाएं मार्ग पर चलने की जरूरत है। इन महान लोगों के आर्दशों को जीवन में धारण करके अपने जीवन को सफल बनाया जा सकता है। समाज के लोगों को हमेशा एक जुट होकर रहना चाहिए। इस मौके पर गांव के मौजिज लोग मौजूद थे।

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अफसरों के डिजिटल सिग्नेचर कर रिलीज कराए पीएफ के 2.74 करोड़ रिटायर्ड कर्मचारियों के जीवनभर की पूंजी, आईपीएल सट्टा में हार गया क्लर्क

जनस्वास्थ्य विभाग से रिटायर्ड कर्मचारियों की जमा पूंजी के पौने तीन करोड़ रुपये स्थापना शाखा क्लर्क सुनील कुमार आईपीएल में सट्टा लगाकर हार गया।

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जनस्वास्थ्य विभाग से रिटायर्ड कर्मचारियों की जमा पूंजी के पौने तीन करोड़ रुपये स्थापना शाखा क्लर्क सुनील कुमार आईपीएल में सट्टा लगाकर हार गया। इसके बाद एक महीने से फरार क्लर्क को पुलिस ने सोमवार को बस स्टैंड नजदीक से दबोच लिया। आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए एक महीने से फरीदाबाद किराये का मकान लेकर रह रहा था। पुलिस ने मंगलवार सुबह आरोपी को न्यायालय में पेश कर कार्रवाई शुरू कर दी है।

आरोपी क्लर्क सुनील कुमार।

रिटायर्ड कर्मियों की जगह ट्रेजरी में दिए पत्नी-साले के अकाउंट नंबर……जनस्वास्थ्य विभाग में अधिकारियों के डिजिटल सिग्नेचर ऑनलाइन डोंगल से होते हैं। इसी का क्लर्क सुनील कुमार ने फायदा उठाया। जो कर्मचारी पिछले वर्ष रिटायर हुए थे, उन सब के पीएफ में जमा पूंजी निकलवाने के लिए सुनील ने डोंगल से अधिकारियों के डिजिटल सिग्नेचर फार्म पर कर लिए। इसके बाद यह फाइल उसने खजाना कार्यालय में जमा करवा दी। इसके बाद यह रुपये खजाना कार्यालय से रिलीज करवा कर बैंक में डलवा लिए। जहां आरोपी क्लर्क ने रिटायर्ड कर्मचारियों के बैंक अकाउंट की जगह दूसरे बैंक अकाउंट में यह राशि डलवा कर निकाल ली।

2.42 करोड़ रुपये पत्नी और 32 लाख साले के खाते में डलवाए थे, बाद में दोनों खातों से निकाली रकम….पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि क्लर्क सुनील कुमार ने रिटायर्ड कर्मचारियों के 2 करोड़ 74 लाख रुपये अपनी पत्नी व साले के अकाउंट में डलवाए थे। पत्नी और साले का अकाउंट रेवाड़ी जिले के मीरपुर स्थित बैंक में खुलवाया हुआ था। इनमें पत्नी सोनम के खाते में 2 करोड़ 42 लाख रुपये और साले तनुज के खाते में 32 लाख रुपये डलवाए। इसके बाद सुनील ने दोनों खातों से रुपये निकाल लिए।

तत्कालीन एक्सईएन ने जांच के बाद दी थी आरोपी के खिलाफ शिकायत…..जनस्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन एक्सईएन दलबीर सिंह दलाल ने रिटायर्ड कर्मचारियों की शिकायत पर मामले की जांच करवाई थी। इसके लिए तीन अधिकारियों की कमेटी बनाई गई थी। इसके बाद मामले का खुलासा हुआ तो एक्सईएन ने खुद क्लर्क के खिलाफ पुलिस को शिकायत दी थी। 21 सितंबर को सिटी थाना पुलिस ने क्लर्क सुनील कुमार पर केस दर्ज कर लिया था।

शातिर ने बैंक खाते फ्रीज करवाने से पहले निकाल लिए थे सारे रुपये…. रिटायर्ड कर्मचारियों के 2 करोड़ 74 लाख रुपये क्लर्क सुनील कुमार ने अपनी पत्नी व साला के बैंक अकाउंट में डलवाई थी। ऐसे में मामले को खुलासा होते ही जनस्वास्थ्य विभाग अधिकारी ने इन दोनों अकाउंट सहित क्लर्क के अकाउंट को भी फ्रीज करवा दिया था। मगर इससे पहले आरोपी क्लर्क अपने तीनों अकाउंट से रुपये निकाल चुका था।

उम्रभर की बचत लेकर हो गया था चंपत…. जनस्वास्थ्य विभाग से रिटायर्ड कर्मचारी जोगेंद्र सिंह, रविंद्र सिंह व नूरहसन ने बताया कि वह पिछले वर्ष अगस्त और दिसंबर में रिटायर हुए थे। अक्सर वह कार्यालय की स्थापना शाखा क्लर्क सुनील कुमार के चक्कर लगाकर पीएफ के रुपये निकलवाने का आग्रह कर रहे थे। इस दौरान वह उन्हें जल्द रुपये दिलाने की बात कहकर टरका देता था। इसके बाद उन्होंने एक्सईएन को शिकायत देकर जांच की मांग उठाई थी। इसके बाद जाकर मामले का खुलासा हुआ। कर्मचारियों ने बताया कि पिछले वर्ष कई कर्मचारी रिटायर हुए थे, जिनके रुपये अभी तक नहीं मिले हैं।

आरोपी सट्‌टे में हार चुका पूंजी: आईओ…. आरोपी क्लर्क को गिरफ्तार कर लिया गया है। न्यायालय में पेश कर आरोपी को पांच दिन के पुलिस रिमांड पर लिया है। पूछताछ में आरोपी क्लर्क ने बताया है कि उसने रिटायर्ड कर्मचारियों के रुपये निकाल कर आईपीएल मैचों में सट्टा लगाया था, जो वह हार गया। पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है।” – भीम सिंह, एएसआई, सिटी थाना।

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अनोखा ऑफर: चंडीगढ़ के ऑटो ड्राइवर अनिल बोले- भारत-पाक मैच में टीम इंडिया की जीत के बाद सवारियों को फ्री में घुमाएंगे शहर

अनिल कुमार नाम के ऑटो चालक ने पाकिस्तान का साथ मैच में टीम इंडिया के जीतने पर अगले दिन यानि 25 अक्टूबर को पूरा दिन सवारियों को फ्री सफर कराने का ऐलान किया

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टी- 20 वर्ल्ड कप शुरू हो चुका है। भारत अपना पहला मुकाबला 24 अक्टूबर रविवार को पाकिस्तान के खिलाफ खेलेगा। इस मैच का लोकर बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस बीच चंडीगढ़ में एक ऑटो चालक में भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर अनोखे ऑफर की घोषणा की है। अनिल कुमार नाम के ऑटो चालक ने पाकिस्तान का साथ मैच में टीम इंडिया के जीतने पर अगले दिन यानि 25 अक्टूबर को पूरा दिन सवारियों को फ्री सफर कराने का ऐलान किया। इसके लिए अनिल कुमार ने अपने ऑटो पर फ्री राइड का एक पोस्टर भी चिपका लिया है।

ऑटो ड्राइवर अनिल

सवारियों इस सुविधा का फायदा 25 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे उठा सकती हैं। अनिल ने बताया कि भारत की जीत के अगले दिन 25 अक्टूबर को उनके ऑटो में कोई भी सवारी चंडीगढ़ के किसी भी कोने तक फ्री जा सकती है। उनका प्रयास भारतीय किक्रेट टीम के मनोबल को बढ़ाना और ज्यादा से ज्यादा लोगों को उससे जोड़ना है। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के क्रिकेट मैच को देखने के लिए दुनिया भर के लोग उत्साहित रहते हैं। ऐसे में मेरा यह प्रयास अपनी टीम को सपोर्ट करने के लिए है। शहर में भी किक्रेट के प्रति खासा क्रेज रहता है। ऐसे बड़े मुकाबले के लिए शहर में बड़ी-बड़ी स्क्रीनें तक लगाई जाती हैं। लंबे समय के बाद भारत-पाकिस्तान एक मैदान में दिखेंगे। ऐसे में पूरे भारत को टीम इंडिया को प्रोत्साहित करना चाहिए।

अनोखा ऑफर

ओलिंपिक में गोल्ड मेडल मिलने पर भी दी थी फ्री राइड
टोक्यो ओलिंपिक 2020 में देश के लिए नीरज चोपड़ा ने जेवलिन में स्वर्ण पदक जीता था। उससे अगले दिन भी अनिल ने फ्री राइड का ऑफर दिया था। उस दिन शहर में यूपीएससी का एग्जाम था, जिसके चलते अनिल ने 150 से ज्यादा स्टूडेंट्स को बस स्टैंड सेक्टर-17 से फ्री सफर करवाते हुए सेक्टर-11, सेक्टर-16, सेक्टर-23 में बने परीक्षा केंद्र तक छोड़ा था।

सैनिक और गर्भवती महिलाओं को करवाते हैं फ्री सफर
अनिल शहर का ऐसा पहला ऑटो ड्राइवर है, जोकि भारतीय सैनिक और गर्भवती महिलाओं से ऑटो में सफर करने के कोई पैसे नहीं लेता। इसके अलावा उन्होंने कोरोना काल में मेडिकल स्टाफ को भी फ्री सफर करवाया था।

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