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आजादी की मूल भावना को समझें

आजादी के इस पावन पर्व पर सभी देशवासियों को इस तरह के परिवेश पर सच्चे मन से मंथन कर सही दिशा में संकल्प लेने की भावना जागृत करनी होगी ……………

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(स्वतंत्रता दिवस, 15 अगस्त पर विशेष) 

योगेश कुमार गोयल

हर वर्ष की भांति 15 अगस्त का दिन कैलेंडर की घूमती तारीख की तरह एक बार फिर सामने है। जहां सरेआम लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाने वाले कुछ जनप्रतिनिधि हर साल स्वतंत्रता के प्रतीक तिरंगे के नीचे खड़े होकर देश की रक्षा एवं प्रगति का संकल्प लेते हैं। देश को आजाद हुए सात दशक से भी अधिक हो चुके हैं। लेकिन आजादी के इन 72 वर्षों में लोकतंत्र के पवित्र स्थल संसद एवं विधानसभाओं के हालात किस कदर बदले हैं, किसी से छिपा नहीं है। जहां अभद्रता की सीमा पार करते हमारे जनप्रतिनिधि गाली-गलौच, उठापटक से लेकर कुर्ता फाड़ की राजनीति तक उतर आते हैं। राजनीति की भाषा का स्तर दिन-ब-दिन इतना घिनौना होता जा रहा है, जिसकी बदसूरत तस्वीर पिछले सात दशकों में भी देखने को नहीं मिली थी।हालांकि इस बार के स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाने से चंद दिनों पहले जिस प्रकार मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर को सही मायनों में आजादी दिलाई है, वह अपने आप में बेमिसाल कदम है। साथ ही जम्मू कश्मीर में आजादी की मांग के नारे लगाने वाले अलगाववादियों के गाल पर करारा तमाचा भी है। जो कश्मीर की भारत से आजादी की मांग के नाम पर कश्मीरी युवाओं को भड़काते और गुमराह करते थे।

देश की सूरत और सीरत बदलने के लिए आज देश में ऐसे ही कठोर कदमों और दृढ़ संकल्पों की जरूरत है। साथ ही जरूरत है ऐसे लोगों पर नकेल कसने की, जो देश का माहौल बिगाड़ते हैं और विकास की गति को बाधित करते हैं। आतंक के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक हो या जम्मू कश्मीर के मसले पर उठाया गया दिलेरी भरा कदम, कुछ राजनीतिक दलों के नेताओं को राष्ट्र की अस्मिता तथा एकता और अखण्डता से जुड़े ऐसे तमाम मसलों पर भी जब घृणित राजनीति करते देखा जाता है तो उनकी ऐसी हरकतों पर सिर शर्म से झुक जाता है। यह वही लोग हैं जो देश से गरीबी हटाओ का नारा देकर अकूत संपदा के स्वामी हो गए। आज देश के लगभग हर राजनीतिक दल में ऐसे नेताओं की भरमार है, जिनकी भूमिका प्रायः राजनीति के नाम पर अपने स्वार्थ की रोटियां सेंकने तक ही सीमित रहती है। वर्षों की गुलामी के बाद मिली आजादी को हम किस रूप में संजोकर रख पाए हैं, सभी के सामने है।

आजादी के दीवानों ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि जिस देश को आजाद कराने हेतु वे इतनी कुर्बानियां दे रहे हैं, उसकी यह दुर्दशा होगी। नेता भ्रष्ट हो जाएंगे और आजादी की तस्वीर ऐसी होगी। अपराधों की बढ़ती सीमा को देख बुजुर्ग तो अब कहने भी लगे हैं कि गुलामी के दिन तो आज की आजादी से कहीं बेहतर थे। तब अपराधियों के मन में कानून का खौफ होता था। अब कड़े कानून बना दिए जाने के बावजूद अपराधियों के मन में किसी तरह का भय नहीं दिखता। देश के कोने-कोने से बच्चियों व महिलाओं के साथ हो रहे अपराधों के बढ़ते मामले आजादी की बड़ी शर्मनाक तस्वीर पेश कर रहे हैं। देश में महंगाई सुरसा की तरह बढ़ती जा रही है।

आतंकवाद की घटनाएं पैर पसार रही हैं। आरक्षण की आग देश को जला रही है। इस तरह के हालात निश्चित तौर पर देश के विकास के मार्ग में बाधक बने हैं। अगर कभी आतंक के खिलाफ कड़े कदम उठाने की पहल होती है तो उन कदमों का सत्ता के ही गलियारों में कुछ लोगों द्वारा पुरजोर विरोध किया जाने लगता है। हर कोई सत्ता के इर्द-गिर्द राजनीतिक रोटियां सेंकता नजर आ रहा है। देशभर में कोई सत्ता बचाने में लगा है तो कोई गिराने में। ऐसे बदरंग हालातों में यह सवाल रह-रहकर सिर उठाने लगता है कि आखिर कैसी है ये आजादी?आजादी का अर्थ क्या है? इस प्रश्न का उत्तर तब तक नहीं दिया जा सकता, जब तक कि यह न जान लिया जाए कि स्वतंत्र होना किसे कहते हैं। देश को, व्यक्ति को, समाज को, यह जान लेना अत्यंत जरूरी है कि क्या कुछ बुनियादी मानवाधिकारों से वंचित व्यक्ति, समाज या देश को स्वतंत्र कहा जा सकता है? क्या भोजन, कपड़ा व रहने की व्यवस्था, बीमारी से बचाव, भय, आतंक, शोषण व असुरक्षा से छुटकारा, साक्षर एवं शिक्षित होने के पर्याप्त अवसर मिलना और अन्य ऐसी ही कई बातें मानव के बुनियादी अधिकार नहीं हैं? क्या शोषण व उत्पीड़न से मुक्ति के संघर्ष को मानव का बुनियादी अधिकार नहीं माना जाना चाहिए? सामाजिक एवं आर्थिक आधार पर देश में कमजोर तबके का स्तर सुधारने की नीयत से लागू आरक्षण ने देश को उस चौराहे पर खड़ा कर दिया है, जहां समूचा देश रह-रहकर जातीय संघर्ष के बीच उलझता दिखाई देता है।

स्वार्थपूर्ण राजनीति ने माहौल को इस कदर विकृत कर दिया है, जहां से निकल पाना संभव ही नहीं दिखता। राजस्थान हो या उत्तर प्रदेश, हरियाणा हो या गुजरात अथवा महाराष्ट्र आरक्षण के नाम पर उठते विध्वंसक आन्दोलनों की आग में समय-समय पर झुलसते रहे हैं।आजादी के सात दशकों बाद भी भ्रष्टाचार एवं अपराधों का आलम यह है कि आम आदमी का जीना दूभर हो गया है। सरकारी दफ्तरों में बगैर लेन-देन के कोई काम कराना मुश्किल होता है। बड़े नेताओं की कौन कहे, छुटभैया नेताओं की भी चांदी हो चली है। आजादी के बाद लोकतंत्र के इस बदलते स्वरूप ने आजादी की मूल भावना को बुरी तरह तहस-नहस कर डाला है। यह आजादी का एक शर्मनाक पहलू है कि हत्या, भ्रष्टाचार, बलात्कार जैसे संगीन अपराधों का आरोप झेल रहे जनप्रतिनिधि सम्मानित जिंदगी जीते रहते हैं। देश के ये बदले हालात आजादी के कौन-से स्वरूप को उजागर कर रहे हैं? विचारणीय है।

लोकतंत्र के हाशिये पर खड़ी जनता को इस दिशा में फिर से मंथन करना आवश्यक हो गया है कि वह किस तरह की आजादी की पक्षधर है? आज की आजादी, जहां तन के साथ-साथ मन भी आजाद है। सब कुछ करने के लिए, चाहे वह वतन के लिए अहितकारी ही क्यों न हो। या उस तरह की आजादी, जहां वतन के लिए अहितकारी हर कदम पर बंदिश हो। जहां स्वहित राष्ट्रहित से सर्वोपरि होकर देशप्रेम की भावना को लीलता जा रहा है, या वह आजादी, जहां राष्ट्रहित की भावना सर्वोपरि स्वरूप धारण करते हुए देश को आजाद कराने में गुमनाम लाखों शहीदों के मन में उपजे देशप्रेम का जज्बा सभी में फिर से जागृत कर सके।

आजादी के इस पावन पर्व पर सभी देशवासियों को इस तरह के परिवेश पर सच्चे मन से मंथन कर सही दिशा में संकल्प लेने की भावना जागृत करनी होगी। तभी आजादी के वास्तविक स्वरूप को परिलक्षित किया जा सकेगा। सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर मामले में उठाए गए साहसिक कदमों की ही भांति अगर राष्ट्र की बेहतरी के लिए भविष्य में भी ऐसे ही कुछ कड़े कदम उठाए जाते हैं तो हमें उनमें मीन-मेख निकालने की बजाय खुले दिल से उनका स्वागत करना चाहिए। हमें अब आजादी की मूल भावना को समझते हुए स्वयं ही यह तय करना होगा कि हम आखिर किस प्रकार की आजादी के पक्षधर हैं?

(लेखक राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

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ITBP सब इंस्पेक्टर के खाते से 2.59 लाख उड़ाए: हिमाचल से लौटते समय बस में चोरी हुआ ATM कार्ड और मोबाइल; एक चूक से पकड़ा गया बदमाश

सब इंस्पेक्टर हिमाचल के रहने वाले है और रेवाड़ी के जाटूसाना स्थित आईटीबीपी के कैंप में तैनात है। रेवाड़ी बस स्टैंड चौकी पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।

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बस स्टैंड चौकी पुलिस ने एक नामजद शख्स के खिलाफ केस दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।

हरियाणा के रेवाड़ी में ITBP में तैनात सब इंस्पेक्टर का मोबाइल फोन व ATM कार्ड चोरी कर उनके खाते से 2 लाख 59 हजार रुपए साफ कर दिए। सब इंस्पेक्टर हिमाचल के रहने वाले है और रेवाड़ी के जाटूसाना स्थित आईटीबीपी के कैंप में तैनात है। रेवाड़ी बस स्टैंड चौकी पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।

मिली जानकारी के अनुसार, हिमाचल के अवैरी बैजनाथ निवासी रमेश चंद ITBP में रेवाड़ी के जाटूसाना स्थित कैंप में सब इंस्पेक्टर के पद पर तैनात है। रमेश चंद ने बताया कि कुछ समय पहले वह छुट्‌टी पर घर गए थे। छुट्टी खत्म होने के बाद वह ड्यूटी ज्वॉइन करने के लिए 28 दिसंबर को रेवाड़ी बस स्टैंड पहुंचे थे। बस स्टैंड से जाटूसाना जाने के लिए बस में सवार होते समय किसी ने भीड़ में उनका एटीएम व मोबाइल चोरी कर लिया। उसके बाद मोबाइल व एटीएम के जरिए ही खाते से 259000 हजार रुपए निकाल लिए।

जांच करने पर आरोपी की पहचान जाटव मोहल्ला रामपुरा निवासी लोकेश पालिया के रूप में हुई। जिसमें 20200 रुपए अपने अकाउंट में ड्रांसफर किए जबकि एक लाख रुपए खाते से निकाले गए। बाकी लेनदेन पेटीएम से किया गया। पूरी जानकारी हासिल करने के बाद रमेश चंद ने इसकी शिकायत बस स्टैंड चौकी पुलिस को दी। पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपी लोकेश पालिया की तलाश शुरू कर दी है। गुरुवार को पुलिस ने लोकेश के घर दबिश भी दी, लेकिन वह नहीं मिला। बस स्टैंड चौकी पुलिस के अनुसार जल्द ही आरोपी को पकड़ लिया जाएगा।

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पानीपत में रोका बाल विवाह: लड़का और लड़की दोनों थे नाबालिग, शपथ पत्र लेकर फिलहाल रोकी गई शादी

लड़का व लड़की दोनों के स्कूली दस्तावेजों की जांच की गई तो लड़की की उम्र 16 साल व लड़के की उम्र 19 साल पाई गई। दोनों ही अभी शादी के योग्य नहीं थे। परिवार वालों से शपथ पत्र लेकर फिलहाल इस शादी को रोक दिया गया है।

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मामले की पूछताछ करती बाल विवाह निषेध अधिकारी रजनी गुप्ता।

हरियाणा के पानीपत जिले के एक गांव में बाल विवाह निषेध अधिकारी रजनी गुप्ता ने बाल विवाह रुकवाया है। अधिकारी ने सूचना के आधार पर इस कार्रवाई को किया। लड़का व लड़की दोनों के स्कूली दस्तावेजों की जांच की गई। जिसमें लड़की की उम्र 16 साल व लड़के की उम्र 19 साल पाई गई। दोनों ही अभी शादी के योग्य नहीं थे। परिवार वालों से शपथ पत्र लेकर फिलहाल इस शादी को रोक दिया गया है। दोनों पक्षों से शपथ पत्र लेकर फिलहाल शादी पर रोक लगा दी है। वहीं 4 जनवरी को कोर्ट खुलने के बाद मामला कोट के संज्ञान में लाकर आगामी कार्रवाई की जाएगी।

बाल विवाह निषेध अधिकारी रजनी गुप्ता के अनुसार

जानकारी देते हुए बाल विवाह निषेध अधिकारी रजनी गुप्ता ने बताया कि उन्हें सूचना प्राप्त हुई की गांव नवादा पार में एक नाबालिग लड़की की शादी होनी है। सूचना मिलने पर वह टीम के साथ मौके पर पहुंचे और वहां जाकर लड़की पक्ष से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान लड़की के सभी दस्तावेज चेक किए गए। लड़की के स्कूल के दस्तावेजों में उसकी जन्मतिथि मार्च 2005 की मिली। यानी दस्तावेजों के आधार पर लड़की अभी महज 16 साल की थी। इसके बाद लड़के पक्ष को फोन पर बात कर अपने कार्यालय बुलाया। जहां लड़का पक्ष मौजूद हुआ और लड़के के दस्तावेजों को चेक किया गया, जिसमें लड़का भी नाबालिग पाया गया। लड़के की उम्र दस्तावेजों के आधार पर 19 साल थी।

इन कारणों से हो रही थी बाल विवाह
लड़की के पिता ने बताया कि वह पेशे से श्रमिक हैं। यह अपनी बेटी की शादी गरीबी और अज्ञानता के चलते कर रहे थे। साथ ही वह खुद हार्ट पेशेंट है, उनकी तमन्ना थी कि उनके जीते जी उनकी बेटी की शादी हो जाए। वही लड़के पक्ष से लड़के का कहना है कि उसकी चार बड़ी बहने हैं, जो कि चारों विवाहित हैं। तीन भाई व एक छोटी बहन है। अब घर में कोई रोटी बनाने वाला नहीं था, क्योंकि मां की तबीयत सही नहीं रहती है। इसी के चलते वह शादी कर रहा था।

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बालिग हूं, मेरी मर्जी जहां जाऊं: थाने में युवक संग जाने को अड़ी 19 वर्षीय छात्रा, दो दिन पहले गई थी साथ

युवती ने पुलिस से साफ कह दिया कि वह युवक के साथ ही जाएगी। पुलिस और परिजनों के सामझाने पर वह नहीं मानी। छात्रा ने परिजनों की सब दलीलों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मैं बालिग हूं, मेरी मर्जी जहां जाऊं।

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मामले में थाना लाखन माजरा पुलिस कर रही जांच

हरियाणा के रोहतक के जिले में कॉलेज से दो दिन पहले एक युवक संग गई युवती को पुलिस ने बरामद कर लिया। हालांकि युवती ने पुलिस से साफ कह दिया कि वह युवक के साथ ही जाएगी। पुलिस और परिजनों के सामझाने पर वह नहीं मानी। छात्रा ने परिजनों की सब दलीलों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मैं बालिग हूं, मेरी मर्जी जहां जाऊं।

कॉलेज गई थी प्रवेश पत्र लेने
लाखन माजरा थाना क्षेत्र के एक गांव से छात्रा मंगलवार सुबह कॉलेज के लिए यह कहकर निकली थी कि आगामी परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र लेने जा रही हूं। उसके वापस न लौटने पर परिजनों ने काफी खोज खबर की।रातभर छात्रा की खोज-खबर करने के बाद बुधवार सुबह पुलिस को सूचना दी। छात्रा के पिता ने थाना लाखन माजरा में बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने छात्रा व युवक को वीरवार दोपहर गिरफ्तार कर लिया। दोनों को थाना लाया गया। यहां छात्रा ने युवक संग जाने की रट लगा दी।

कोर्ट में होंगे पेश
मामले में थाना लाखन माजरा एसएचओ अब्दुल्ला खान का कहना है कि छात्रा बालिग है। छात्रा व युवक को कोर्ट में पेश किया जाएगा। वहां उनके बयानों के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। युवक व छात्रा को कोर्ट ले जाने की तैयारी की जा रही है।

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