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देश की युवा पीढ़ी में विदेशों के प्रति रुचि बढ़ी

—गांव के लोगों की सोच भी शहरी सोच से प्रभावित हो रही है। खासकर गांव के युवाओं में शहरियों के अनुकरण और शहर को पलायन की प्रवृति लगातार बढ़ रही है

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मनोज ज्वाला

एक मीडिया संस्थान के सर्वेक्षण के अनुसार हमारे देश के पढ़े-लिखे और शहरी नौजवानों में से आधे से अधिक ऐसे हैं, जो अपने देश को पसंद नहीं करते। वे विदेशों में जाकर बस जाना चाहते हैं। लगभग दो साल पहले के उक्त सर्वेक्षण के मुताबिक उनमें से 75 फीसदी युवाओं का कहना था कि वे बे-मन और मजबूरीवश भारत में रह रहे हैं। 62.08 फीसदी युवतियों और 66.01 फीसदी युवाओं का मानना था कि भारत  में उनका भविष्य सुरक्षित नहीं है। क्योंकि, यहां अच्छे दिन आने की संभावना कम है। उनमें से 50 फीसदी का मानना था कि भारत में किसी महापुरुष का अवतरण होगा, तभी हालात सुधर सकते हैं, अन्यथा नहीं।

40 फीसदी युवाओं का मानना था कि उन्हें अगर इस देश का प्रधानमंत्री बना दिया जाए, तो वे पांच साल में इस देश का कायापलट कर देंगे।अखबार का वह सर्वेक्षण आज भी बिल्कुल सही लगता है। अगर व्यापक स्तर पर सर्वेक्षण किया जाता, तो देश छोड़ने को तैयार युवाओं का प्रतिशत और अधिक दिखता। वह सर्वेक्षण तो सिर्फ शहरों तक सीमित था। अपने देश में गांवों पर भी तेजी से शहर छाते जा रहे हैं। गांव के लोगों की सोच भी शहरी सोच से प्रभावित हो रही है। खासकर गांव के युवाओं में शहरियों के अनुकरण और शहर को पलायन की प्रवृति लगातार बढ़ रही है। गौर कीजिए कि देश छोड़ने को तैयार वे युवा पढ़े-लिखे हैं और शहरों में पले-बढ़े हैं। वे किस पद्धति से किस तरह के विद्यालयों में क्या पढ़े-लिखे हैं और किस रीति-रिवाज से कैसे परिवारों में किस तरह से पले-बढ़े हैं, यह ज्यादा गौरतलब है।

विद्यालय सरकारी हों या गैर सरकारी, सभी में शिक्षा की पद्धति एक है और वह है मैकाले की अंग्रेजी शिक्षा पद्धति। भारतीयता विरोधी इसी शिक्षा पद्धति को सरकारी मान्यता प्राप्त है। सरकार का पूरा तंत्र इसी तरह की शिक्षा के विस्तार में लगा हुआ है। वैसे अंग्रेजी माध्यम वाले विद्यालय सबसे अच्छे माने जाते हैं और गैर-सरकारी निजी क्षेत्र के अधिकतर विद्यालय अंग्रेजी माध्यम के ही हैं। शहरों में ऐसे ही विद्यालयों की भरमार है और जिन युवाओं के बीच उक्त मीडिया संस्थान ने उपरोक्त सर्वेक्षण किया उनमें से सर्वाधिक युवा ऐसे ही तथाकथित ‘उत्कृष्ट’ विद्यालयों से पढ़े-लिखे हुए हैं। अब रही बात यह कि इन विद्यालयों में आखिर शिक्षा क्या और कैसी दी जाती है, तो यह इन युवाओं की उपरोक्त सोच से ही स्पष्ट है।

जाहिर है, उन्हें शिक्षा के नाम पर ऐसी-ऐसी डिग्रियां दी जाती हैं, जिनके कारण वे महात्वाकांक्षी, स्वार्थी बनकर असंतोष, अहंकार, खीझ, पलायन एवं हीनता-बोध से ग्रसित हो जाते हैं और कमाने-खाने भर थोड़े-बहुत हुनर हासिल कर स्वभाषा व स्वदेश के प्रति ‘नकार’ भाव से पीड़ित होकर विदेश चले जाते हैं।थॉमस विलिंग्टन मैकाले कोई शिक्षा-शास्त्री नहीं था। वह एक षड्यंत्रकारी था, जिसने भारत पर ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन की जड़ें जमाने की नीयत से भारतीय शिक्षा-पद्धति की जड़ें उखाड़कर मौजूदा शिक्षा-पद्धति को प्रक्षेपित किया था। जो आज भी उसी रूप में कायम है। 20 अक्टूबर 1931 को लंदन के रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ फौरन अफेयर्स के मंच से महात्मा गांधी ने कहा था कि ‘अंग्रेजी शासन से पहले भारत की शिक्षा-व्यवस्था इंग्लैण्ड से भी अच्छी थी।’ उस पूरी व्यवस्था को सुनियोजित तरीके से समूल नष्ट कर देने के पश्चात ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन की जरूरतों के मुताबिक उसके रणनीतिकारों ने लम्बे समय तक बहस-विमर्श कर के मैकाले की योजनानुसार यह शिक्षा-पद्धति लागू की थी।

मैकाले ने ब्रिटिश पार्लियामेंट की शिक्षा समिति के समक्ष कहा था ‘हमें भारत में ऐसा शिक्षित वर्ग तैयार करना चाहिए, जो हमारे और उन करोड़ों भारतवासियों के बीच जिन पर हम शासन करते हैं, उन्हें समझाने-बुझाने का काम कर सके। जो केवल खून और रंग की दृष्टि से भारतीय हों, किन्तु रुचि, भाषा व भावों की दृष्टि से अंग्रेज हों।’ विदेशों में बस जाने को उतावले भारतीय युवाओं ने पूरी मेहनत व तबीयत से मैकाले शिक्षा-पद्धति को आत्मसात किया है, ऐसा समझा जा सकता है। यहां प्रसंगवश मैकाले के बहनोई चार्ल्स ट्रेवेलियन द्वारा ब्रिटिश पार्लियामेंट की एक समिति के समक्ष ‘भारत में भिन्न-भिन्न शिक्षा-पद्धतियों के भिन्न-भिन्न परिणाम’ शीर्षक से प्रस्तुत किये गए एक लेख का यह अंश भी उल्लेखनीय है कि ‘मैकाले शिक्षा-पद्धति का प्रभाव अंग्रेजी राज के लिए हितकर हुए बिना नहीं रह सकता। हमारे पास उपाय केवल यही है कि हम भारतवासियों को यूरोपियन ढंग की उन्नति में लगा दें। इससे हमारे लिए भारत पर अपना साम्राज्य कायम रखना बहुत आसान और असंदिग्ध हो जाएगा।’ ऐसा ही हुआ। बल्कि, मैकाले की योजना तो लक्ष्य से ज्यादा ही सफल रही।

हमारे देश के मैकालेवादी राजनेताओं ने अंग्रेजों के औपनिवेशिक शासन की समाप्ति के बाद भी उनकी अंग्रेजी-मैकाले शिक्षा-पद्धति को न केवल यथावत कायम रखा, बल्कि उसे और ज्यादा अभारतीय रंग-ढंग में ढाल दिया। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष लक्षित प्राचीन भारतीय शिक्षा-पद्धति को अतीत के गर्त में डालकर शिक्षा को उत्पादन-विपणन-मुनाफा-उपभोग-केन्द्रित बना देने और उसे नैतिक सांस्कृतिक मूल्यों से विहीन कर देने तथा राष्ट्रीयता के प्रति उदासीन बना देने का ही परिणाम है कि हमारी यह युवा पीढ़ी महज निजी सुख-स्वार्थ के लिए अपने देश से विमुख हो जाना पसंद कर रही है। उसे विदेशों में ही अपना भविष्य दीख रहा है।

माना कि हमारे देश में तरह-तरह की समस्याएं हैं, किन्तु इनसे जूझने और इन्हें दूर करने की बजाय पलायन कर जाने अथवा कोरा लफ्फाजी करने कि हमें प्रधानमंत्री बना दिया जाए तो हम देश को सुंदर बना देंगे, अति महात्वाकांक्षा-युक्त मानसिक असंतुलन का ही द्योत्तक है। लेकिन आधे से अधिक ये शहरी युवा मानसिक रुप से असंतुलित नहीं हैं, बल्कि असल में वे पश्चिम के प्रति आकर्षित हैं। इसके लिए हमारे देश की चालू शिक्षा-पद्धति का पोषण करने वाले हमारे राजनेता ही जिम्मेवार हैं। यह ‘यूरोपियन ढंग की उन्नति’ के प्रति बढ़ते अनावश्यक आकर्षण का परिणाम है। इस मानसिक पलायन को रोकने के लिए जरूरी है कि हम अपने बच्चों को हमारे राष्ट्र की जड़ों से जोड़ने वाली और संतुलित समग्र मानसिक विकास करने वालीप्राचीन भारतीय पद्धति से भारतीय भाषाओं में समस्त ज्ञान-विज्ञान की शिक्षा देने की सम्पूर्ण व्यवस्था कायम करें।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

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राज्य सरकार की तरफ से गांवों में किया जा रहा है शहरों की तर्ज पर विकास:सुधा

निवर्तमान अध्यक्षा उमा सुधा ने किया वाल्मीकि जयंती पर गांव खेड़ी रामनगर में किया वाल्मीकि चौपाल व भवन निर्माण कार्य का शिलान्यास, विकास कार्यो पर खर्च होगा 10 लाख का बजट

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कुरुक्षेत्र । नगर परिषद की निवर्तमान अध्यक्षा उमा सुधा ने कहा कि राज्य सरकार की तरफ से गांवों का शहरों की तर्ज पर विकास किया जा रहा है। इस सरकार ने गांवों में 24 घंटे बिजली, पीने का पानी हर घर तक पहुंचाने के लिए हर घर तक नल योजना को अमलीजामा पहनाने का काम किया है। वे बुधवार को गांव खेड़ी रामनगर में वाल्मीकि जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रही थी। इससे पहले निवर्तमान अध्यक्षा उमा सुधा ने 5 लाख रुपए की लागत हरिजन चौपाल की चारदीवारी व 5 लाख रुपए की लागत से बनने वाली वाल्मीकि चौपाल की चारदीवारी के कार्य का शिलान्यास किया। इस दौरान निवर्तमान अध्यक्षा उमा सुधा ने गांव के लोगों को भगवान वाल्मीकि जयंती की शुभकामनाएं दी है। निवर्तमान अध्यक्षा उमा सुधा ने कहा कि आज समाज के लोगों को भगवान वाल्मीकि के दिखाएं मार्ग पर चलने की जरूरत है। इन महान लोगों के आर्दशों को जीवन में धारण करके अपने जीवन को सफल बनाया जा सकता है। समाज के लोगों को हमेशा एक जुट होकर रहना चाहिए। इस मौके पर गांव के मौजिज लोग मौजूद थे।

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अफसरों के डिजिटल सिग्नेचर कर रिलीज कराए पीएफ के 2.74 करोड़ रिटायर्ड कर्मचारियों के जीवनभर की पूंजी, आईपीएल सट्टा में हार गया क्लर्क

जनस्वास्थ्य विभाग से रिटायर्ड कर्मचारियों की जमा पूंजी के पौने तीन करोड़ रुपये स्थापना शाखा क्लर्क सुनील कुमार आईपीएल में सट्टा लगाकर हार गया।

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जनस्वास्थ्य विभाग से रिटायर्ड कर्मचारियों की जमा पूंजी के पौने तीन करोड़ रुपये स्थापना शाखा क्लर्क सुनील कुमार आईपीएल में सट्टा लगाकर हार गया। इसके बाद एक महीने से फरार क्लर्क को पुलिस ने सोमवार को बस स्टैंड नजदीक से दबोच लिया। आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए एक महीने से फरीदाबाद किराये का मकान लेकर रह रहा था। पुलिस ने मंगलवार सुबह आरोपी को न्यायालय में पेश कर कार्रवाई शुरू कर दी है।

आरोपी क्लर्क सुनील कुमार।

रिटायर्ड कर्मियों की जगह ट्रेजरी में दिए पत्नी-साले के अकाउंट नंबर……जनस्वास्थ्य विभाग में अधिकारियों के डिजिटल सिग्नेचर ऑनलाइन डोंगल से होते हैं। इसी का क्लर्क सुनील कुमार ने फायदा उठाया। जो कर्मचारी पिछले वर्ष रिटायर हुए थे, उन सब के पीएफ में जमा पूंजी निकलवाने के लिए सुनील ने डोंगल से अधिकारियों के डिजिटल सिग्नेचर फार्म पर कर लिए। इसके बाद यह फाइल उसने खजाना कार्यालय में जमा करवा दी। इसके बाद यह रुपये खजाना कार्यालय से रिलीज करवा कर बैंक में डलवा लिए। जहां आरोपी क्लर्क ने रिटायर्ड कर्मचारियों के बैंक अकाउंट की जगह दूसरे बैंक अकाउंट में यह राशि डलवा कर निकाल ली।

2.42 करोड़ रुपये पत्नी और 32 लाख साले के खाते में डलवाए थे, बाद में दोनों खातों से निकाली रकम….पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि क्लर्क सुनील कुमार ने रिटायर्ड कर्मचारियों के 2 करोड़ 74 लाख रुपये अपनी पत्नी व साले के अकाउंट में डलवाए थे। पत्नी और साले का अकाउंट रेवाड़ी जिले के मीरपुर स्थित बैंक में खुलवाया हुआ था। इनमें पत्नी सोनम के खाते में 2 करोड़ 42 लाख रुपये और साले तनुज के खाते में 32 लाख रुपये डलवाए। इसके बाद सुनील ने दोनों खातों से रुपये निकाल लिए।

तत्कालीन एक्सईएन ने जांच के बाद दी थी आरोपी के खिलाफ शिकायत…..जनस्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन एक्सईएन दलबीर सिंह दलाल ने रिटायर्ड कर्मचारियों की शिकायत पर मामले की जांच करवाई थी। इसके लिए तीन अधिकारियों की कमेटी बनाई गई थी। इसके बाद मामले का खुलासा हुआ तो एक्सईएन ने खुद क्लर्क के खिलाफ पुलिस को शिकायत दी थी। 21 सितंबर को सिटी थाना पुलिस ने क्लर्क सुनील कुमार पर केस दर्ज कर लिया था।

शातिर ने बैंक खाते फ्रीज करवाने से पहले निकाल लिए थे सारे रुपये…. रिटायर्ड कर्मचारियों के 2 करोड़ 74 लाख रुपये क्लर्क सुनील कुमार ने अपनी पत्नी व साला के बैंक अकाउंट में डलवाई थी। ऐसे में मामले को खुलासा होते ही जनस्वास्थ्य विभाग अधिकारी ने इन दोनों अकाउंट सहित क्लर्क के अकाउंट को भी फ्रीज करवा दिया था। मगर इससे पहले आरोपी क्लर्क अपने तीनों अकाउंट से रुपये निकाल चुका था।

उम्रभर की बचत लेकर हो गया था चंपत…. जनस्वास्थ्य विभाग से रिटायर्ड कर्मचारी जोगेंद्र सिंह, रविंद्र सिंह व नूरहसन ने बताया कि वह पिछले वर्ष अगस्त और दिसंबर में रिटायर हुए थे। अक्सर वह कार्यालय की स्थापना शाखा क्लर्क सुनील कुमार के चक्कर लगाकर पीएफ के रुपये निकलवाने का आग्रह कर रहे थे। इस दौरान वह उन्हें जल्द रुपये दिलाने की बात कहकर टरका देता था। इसके बाद उन्होंने एक्सईएन को शिकायत देकर जांच की मांग उठाई थी। इसके बाद जाकर मामले का खुलासा हुआ। कर्मचारियों ने बताया कि पिछले वर्ष कई कर्मचारी रिटायर हुए थे, जिनके रुपये अभी तक नहीं मिले हैं।

आरोपी सट्‌टे में हार चुका पूंजी: आईओ…. आरोपी क्लर्क को गिरफ्तार कर लिया गया है। न्यायालय में पेश कर आरोपी को पांच दिन के पुलिस रिमांड पर लिया है। पूछताछ में आरोपी क्लर्क ने बताया है कि उसने रिटायर्ड कर्मचारियों के रुपये निकाल कर आईपीएल मैचों में सट्टा लगाया था, जो वह हार गया। पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है।” – भीम सिंह, एएसआई, सिटी थाना।

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अनोखा ऑफर: चंडीगढ़ के ऑटो ड्राइवर अनिल बोले- भारत-पाक मैच में टीम इंडिया की जीत के बाद सवारियों को फ्री में घुमाएंगे शहर

अनिल कुमार नाम के ऑटो चालक ने पाकिस्तान का साथ मैच में टीम इंडिया के जीतने पर अगले दिन यानि 25 अक्टूबर को पूरा दिन सवारियों को फ्री सफर कराने का ऐलान किया

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टी- 20 वर्ल्ड कप शुरू हो चुका है। भारत अपना पहला मुकाबला 24 अक्टूबर रविवार को पाकिस्तान के खिलाफ खेलेगा। इस मैच का लोकर बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस बीच चंडीगढ़ में एक ऑटो चालक में भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर अनोखे ऑफर की घोषणा की है। अनिल कुमार नाम के ऑटो चालक ने पाकिस्तान का साथ मैच में टीम इंडिया के जीतने पर अगले दिन यानि 25 अक्टूबर को पूरा दिन सवारियों को फ्री सफर कराने का ऐलान किया। इसके लिए अनिल कुमार ने अपने ऑटो पर फ्री राइड का एक पोस्टर भी चिपका लिया है।

ऑटो ड्राइवर अनिल

सवारियों इस सुविधा का फायदा 25 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे उठा सकती हैं। अनिल ने बताया कि भारत की जीत के अगले दिन 25 अक्टूबर को उनके ऑटो में कोई भी सवारी चंडीगढ़ के किसी भी कोने तक फ्री जा सकती है। उनका प्रयास भारतीय किक्रेट टीम के मनोबल को बढ़ाना और ज्यादा से ज्यादा लोगों को उससे जोड़ना है। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के क्रिकेट मैच को देखने के लिए दुनिया भर के लोग उत्साहित रहते हैं। ऐसे में मेरा यह प्रयास अपनी टीम को सपोर्ट करने के लिए है। शहर में भी किक्रेट के प्रति खासा क्रेज रहता है। ऐसे बड़े मुकाबले के लिए शहर में बड़ी-बड़ी स्क्रीनें तक लगाई जाती हैं। लंबे समय के बाद भारत-पाकिस्तान एक मैदान में दिखेंगे। ऐसे में पूरे भारत को टीम इंडिया को प्रोत्साहित करना चाहिए।

अनोखा ऑफर

ओलिंपिक में गोल्ड मेडल मिलने पर भी दी थी फ्री राइड
टोक्यो ओलिंपिक 2020 में देश के लिए नीरज चोपड़ा ने जेवलिन में स्वर्ण पदक जीता था। उससे अगले दिन भी अनिल ने फ्री राइड का ऑफर दिया था। उस दिन शहर में यूपीएससी का एग्जाम था, जिसके चलते अनिल ने 150 से ज्यादा स्टूडेंट्स को बस स्टैंड सेक्टर-17 से फ्री सफर करवाते हुए सेक्टर-11, सेक्टर-16, सेक्टर-23 में बने परीक्षा केंद्र तक छोड़ा था।

सैनिक और गर्भवती महिलाओं को करवाते हैं फ्री सफर
अनिल शहर का ऐसा पहला ऑटो ड्राइवर है, जोकि भारतीय सैनिक और गर्भवती महिलाओं से ऑटो में सफर करने के कोई पैसे नहीं लेता। इसके अलावा उन्होंने कोरोना काल में मेडिकल स्टाफ को भी फ्री सफर करवाया था।

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