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स्त्रियों का सबसे बड़ा आभूषण उनका वस्त्र है,अपने प्राचीन पहनावे को न भूले भारतीय महिलाएँ

……. विज्ञान के अनुसार 4 तरह के नशो में एक नशा अश्लीलता भी है,इसलिए पूरे समाज का संस्कारित होना अति आवश्यक है

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नसीब सैनी

प्राचीन काल से ही भारत देश को अपनी संस्कृति के नाम से ही जाना जाता है। देश में पुरषो और महिलाओं के रहन सहन काफी कुछ दर्शाते थे। जो समय के साथ इतना बदलाव आ गया है। अब भारत में विदेशी पहनावे को अपनाने लगे है जो भारतीय संस्कृति को खत्म नष्ट क्र रहे है। भारत देश प्राचीन काल से ही अपनी सांस्कृति को बनाये रखे हुए है जिसको विश्व के अन्य देश भी मानते है,लेकिन अब कुछ 10 सालो में जिस प्रकार के पहनावे को देश में अपनाया जा रहा है। उसको देख के नहीं लगता है की ये भारत है बल्कि ऐसा लगता है की हम फॉरन में है। पुरषो के पहनावे के साथ औरतो के पहनावे में बिल्कुल बदलाव देखने को मिल रहा है।

भारत देश प्राचीन काल से ही अपनी सांस्कृति को बनाये रखे हुए है जिसको विश्व के अन्य देश भी मानते है,लेकिन अब कुछ 10 सालो में जिस प्रकार के पहनावे को देश में अपनाया जा रहा है। उसको देख के नहीं लगता है की ये भारत है बल्कि ऐसा लगता है की हम फॉरन देश में जिंदगी जी रहे है। पुरषो के पहनावे के साथ औरतो के पहनावे में बिल्कुल बदलाव देखने को मिल रहा है।

बात करे सन 1980 तक लड़कियाँ कालेज में साड़ी पहनती थी या फिर सलवार सूट। इसके बाद साड़ी पूरी तरह गायब हुई और सलवार सूट के साथ जीन्स आ गया। 2005 के बाद सलवार सूट लगभग गायब हो गया और इसकी जगह Skin Tight काले सफेद स्लैक्स आ गए। फिर 2010 तंक लगभग पारदर्शी स्लैक्स आ गए जिसमे आंतरिक वस्त्र पूरी तरह स्प्ष्ट दिखते हैं। फिर सूट, जोकि पहले घुटने या जांघो के पास से 2 भाग मे कटा होता था, वो 2012 के बाद कमर से 2 भागों में बंट गया और फिर 2015 के बाद यह सूट लगभग ऊपर नाभि के पास से 2 भागो मे बंट गया जिससे कि लड़की या महिला के नितंब पूरी तरह स्प्ष्ट दिखाई पड़ते हैं और 2 पहिया गाड़ी चलाती या पीछे बैठी महिला अत्यंत विचित्र सी दिखाई देती है।

आश्चर्य की बात यह है कि यह पहनावा कालेज से लेकर 40 वर्ष या ऊपर उम्र की महिलाओ में अब भी दिख रहा है। बड़ी उम्र की महिलायें छोटी लड़कियों को अच्छा सिखाने की बजाए उनसे बराबरी की होड़ लगाने लगी है। अब कुछ नया हो रहा 2018 मे, स्लैक्स ही कुछ Printed या रंग बिरंगा सा हो गया और सूट अब कमर तक आकर समाप्त हो गया।

साथ ही कालेजी लड़कियों या बड़ी महिलाओ मे एक नया ट्रेंड और आ गया, स्लैक्स अब पिंडलियों तंक पहुच गया, कट गया है नीचे से, इस्लाममिक पायजामे की तरह है ( हिन्दू पुरुषों की वेशभूषा में पिछले 40 वर्ष मे कोई उल्लेखनीय परिवर्तन नही हुआ ) जबकि इसके उलट मुस्लिम लड़कियाँ तो अब Mall जाती है, बड़े होटलों में, सामाजिक पार्टियों में जाती है, तो पूरा ढका हुआ बुर्का या सिर में चारो तरफ लिपटे कपड़े के साथ दिखाई पड़ती है।

लड़कियो के अधनग्न घूमने पर जो लोग या स्त्रिया ये कहते है की कपडे नहीं सोच बदलो उन लोगो से कुछ प्रश्न है !

1) सोच बदलने की नौबत आखिर आ ही क्यों रही है?
2) लड़कियो की सोच का आकलन क्यों नहीं करते? कि उन्होंने क्या सोचकर ऐसे कपडे पहने कि उसके पीठ जांघे इत्यादि सब दिखाई दे रहा है. इन कपड़ो के पीछे उसकी सोच क्या थी? एक निर्लज्ज लड़की चाहती है की पूरा पुरुष समाज उसे देखे,वही दूसरी तरफ एक सभ्य लड़की बिलकुल पसंद नहीं करेगी की कोई उसे इस तरह से देखे।

सत्य यह है की अश्लीलता को किसी भी दृष्टिकोण से सही नहीं ठहराया जा सकता। ये कम उम्र के बच्चों को यौन अपराधो की तरफ ले जाने वाली एक नशे की दुकान है। मष्तिष्क विज्ञान के अनुसार 4 तरह के नशो में एक नशा अश्लीलता भी है। गली-गली और हर मोहल्ले में जिस तरह शराब की दुकान खोल देने पर बच्चों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है उसी तरह अश्लीलता समाज में यौन अपराधो को जन्म देती है।

जितने श्रिंगार की वस्तुयें हैं, वे स्त्रियों के लिए हैं। पुरुष को श्रिंगार की जरुरत नहीं होती। स्त्रियों का सबसे बड़ा आभूषण उनका वस्त्र है। स्त्री कितनी भी खूबसूरत क्यों न हो पर बिना वस्त्र, कल्पना करें, केवल काम वासना ही सही ठहरा सकती है। भोजन अपनी रुचि और दूसरे के रुचि के श्रिंगार का उल्लेख शास्त्रों में है।

समाज को स्वस्थ एवं चरित्रवान बनाने का दायित्व स्त्री-पुरुष, दोनो, का है, नग्नता, अर्ध नग्नता की समस्या महिला समुदाय, खासकर वरिष्ठ माताओं/दादियोंको, को गंभीरता से लेना चाहिए और अपने स्तर से देखना चाहिए कि बच्चियों/लड़कियों/युवतियों के लिए कौन सा पहनावा शालीन और दूसरों के लिए रुचिकर होगा। इसलिए पूरे समाज का संस्कारित होना अति आवश्यक है।

….. नसीब सैनी

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राज्य सरकार की तरफ से गांवों में किया जा रहा है शहरों की तर्ज पर विकास:सुधा

निवर्तमान अध्यक्षा उमा सुधा ने किया वाल्मीकि जयंती पर गांव खेड़ी रामनगर में किया वाल्मीकि चौपाल व भवन निर्माण कार्य का शिलान्यास, विकास कार्यो पर खर्च होगा 10 लाख का बजट

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कुरुक्षेत्र । नगर परिषद की निवर्तमान अध्यक्षा उमा सुधा ने कहा कि राज्य सरकार की तरफ से गांवों का शहरों की तर्ज पर विकास किया जा रहा है। इस सरकार ने गांवों में 24 घंटे बिजली, पीने का पानी हर घर तक पहुंचाने के लिए हर घर तक नल योजना को अमलीजामा पहनाने का काम किया है। वे बुधवार को गांव खेड़ी रामनगर में वाल्मीकि जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रही थी। इससे पहले निवर्तमान अध्यक्षा उमा सुधा ने 5 लाख रुपए की लागत हरिजन चौपाल की चारदीवारी व 5 लाख रुपए की लागत से बनने वाली वाल्मीकि चौपाल की चारदीवारी के कार्य का शिलान्यास किया। इस दौरान निवर्तमान अध्यक्षा उमा सुधा ने गांव के लोगों को भगवान वाल्मीकि जयंती की शुभकामनाएं दी है। निवर्तमान अध्यक्षा उमा सुधा ने कहा कि आज समाज के लोगों को भगवान वाल्मीकि के दिखाएं मार्ग पर चलने की जरूरत है। इन महान लोगों के आर्दशों को जीवन में धारण करके अपने जीवन को सफल बनाया जा सकता है। समाज के लोगों को हमेशा एक जुट होकर रहना चाहिए। इस मौके पर गांव के मौजिज लोग मौजूद थे।

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अफसरों के डिजिटल सिग्नेचर कर रिलीज कराए पीएफ के 2.74 करोड़ रिटायर्ड कर्मचारियों के जीवनभर की पूंजी, आईपीएल सट्टा में हार गया क्लर्क

जनस्वास्थ्य विभाग से रिटायर्ड कर्मचारियों की जमा पूंजी के पौने तीन करोड़ रुपये स्थापना शाखा क्लर्क सुनील कुमार आईपीएल में सट्टा लगाकर हार गया।

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जनस्वास्थ्य विभाग से रिटायर्ड कर्मचारियों की जमा पूंजी के पौने तीन करोड़ रुपये स्थापना शाखा क्लर्क सुनील कुमार आईपीएल में सट्टा लगाकर हार गया। इसके बाद एक महीने से फरार क्लर्क को पुलिस ने सोमवार को बस स्टैंड नजदीक से दबोच लिया। आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए एक महीने से फरीदाबाद किराये का मकान लेकर रह रहा था। पुलिस ने मंगलवार सुबह आरोपी को न्यायालय में पेश कर कार्रवाई शुरू कर दी है।

आरोपी क्लर्क सुनील कुमार।

रिटायर्ड कर्मियों की जगह ट्रेजरी में दिए पत्नी-साले के अकाउंट नंबर……जनस्वास्थ्य विभाग में अधिकारियों के डिजिटल सिग्नेचर ऑनलाइन डोंगल से होते हैं। इसी का क्लर्क सुनील कुमार ने फायदा उठाया। जो कर्मचारी पिछले वर्ष रिटायर हुए थे, उन सब के पीएफ में जमा पूंजी निकलवाने के लिए सुनील ने डोंगल से अधिकारियों के डिजिटल सिग्नेचर फार्म पर कर लिए। इसके बाद यह फाइल उसने खजाना कार्यालय में जमा करवा दी। इसके बाद यह रुपये खजाना कार्यालय से रिलीज करवा कर बैंक में डलवा लिए। जहां आरोपी क्लर्क ने रिटायर्ड कर्मचारियों के बैंक अकाउंट की जगह दूसरे बैंक अकाउंट में यह राशि डलवा कर निकाल ली।

2.42 करोड़ रुपये पत्नी और 32 लाख साले के खाते में डलवाए थे, बाद में दोनों खातों से निकाली रकम….पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि क्लर्क सुनील कुमार ने रिटायर्ड कर्मचारियों के 2 करोड़ 74 लाख रुपये अपनी पत्नी व साले के अकाउंट में डलवाए थे। पत्नी और साले का अकाउंट रेवाड़ी जिले के मीरपुर स्थित बैंक में खुलवाया हुआ था। इनमें पत्नी सोनम के खाते में 2 करोड़ 42 लाख रुपये और साले तनुज के खाते में 32 लाख रुपये डलवाए। इसके बाद सुनील ने दोनों खातों से रुपये निकाल लिए।

तत्कालीन एक्सईएन ने जांच के बाद दी थी आरोपी के खिलाफ शिकायत…..जनस्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन एक्सईएन दलबीर सिंह दलाल ने रिटायर्ड कर्मचारियों की शिकायत पर मामले की जांच करवाई थी। इसके लिए तीन अधिकारियों की कमेटी बनाई गई थी। इसके बाद मामले का खुलासा हुआ तो एक्सईएन ने खुद क्लर्क के खिलाफ पुलिस को शिकायत दी थी। 21 सितंबर को सिटी थाना पुलिस ने क्लर्क सुनील कुमार पर केस दर्ज कर लिया था।

शातिर ने बैंक खाते फ्रीज करवाने से पहले निकाल लिए थे सारे रुपये…. रिटायर्ड कर्मचारियों के 2 करोड़ 74 लाख रुपये क्लर्क सुनील कुमार ने अपनी पत्नी व साला के बैंक अकाउंट में डलवाई थी। ऐसे में मामले को खुलासा होते ही जनस्वास्थ्य विभाग अधिकारी ने इन दोनों अकाउंट सहित क्लर्क के अकाउंट को भी फ्रीज करवा दिया था। मगर इससे पहले आरोपी क्लर्क अपने तीनों अकाउंट से रुपये निकाल चुका था।

उम्रभर की बचत लेकर हो गया था चंपत…. जनस्वास्थ्य विभाग से रिटायर्ड कर्मचारी जोगेंद्र सिंह, रविंद्र सिंह व नूरहसन ने बताया कि वह पिछले वर्ष अगस्त और दिसंबर में रिटायर हुए थे। अक्सर वह कार्यालय की स्थापना शाखा क्लर्क सुनील कुमार के चक्कर लगाकर पीएफ के रुपये निकलवाने का आग्रह कर रहे थे। इस दौरान वह उन्हें जल्द रुपये दिलाने की बात कहकर टरका देता था। इसके बाद उन्होंने एक्सईएन को शिकायत देकर जांच की मांग उठाई थी। इसके बाद जाकर मामले का खुलासा हुआ। कर्मचारियों ने बताया कि पिछले वर्ष कई कर्मचारी रिटायर हुए थे, जिनके रुपये अभी तक नहीं मिले हैं।

आरोपी सट्‌टे में हार चुका पूंजी: आईओ…. आरोपी क्लर्क को गिरफ्तार कर लिया गया है। न्यायालय में पेश कर आरोपी को पांच दिन के पुलिस रिमांड पर लिया है। पूछताछ में आरोपी क्लर्क ने बताया है कि उसने रिटायर्ड कर्मचारियों के रुपये निकाल कर आईपीएल मैचों में सट्टा लगाया था, जो वह हार गया। पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है।” – भीम सिंह, एएसआई, सिटी थाना।

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अनोखा ऑफर: चंडीगढ़ के ऑटो ड्राइवर अनिल बोले- भारत-पाक मैच में टीम इंडिया की जीत के बाद सवारियों को फ्री में घुमाएंगे शहर

अनिल कुमार नाम के ऑटो चालक ने पाकिस्तान का साथ मैच में टीम इंडिया के जीतने पर अगले दिन यानि 25 अक्टूबर को पूरा दिन सवारियों को फ्री सफर कराने का ऐलान किया

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टी- 20 वर्ल्ड कप शुरू हो चुका है। भारत अपना पहला मुकाबला 24 अक्टूबर रविवार को पाकिस्तान के खिलाफ खेलेगा। इस मैच का लोकर बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस बीच चंडीगढ़ में एक ऑटो चालक में भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर अनोखे ऑफर की घोषणा की है। अनिल कुमार नाम के ऑटो चालक ने पाकिस्तान का साथ मैच में टीम इंडिया के जीतने पर अगले दिन यानि 25 अक्टूबर को पूरा दिन सवारियों को फ्री सफर कराने का ऐलान किया। इसके लिए अनिल कुमार ने अपने ऑटो पर फ्री राइड का एक पोस्टर भी चिपका लिया है।

ऑटो ड्राइवर अनिल

सवारियों इस सुविधा का फायदा 25 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे उठा सकती हैं। अनिल ने बताया कि भारत की जीत के अगले दिन 25 अक्टूबर को उनके ऑटो में कोई भी सवारी चंडीगढ़ के किसी भी कोने तक फ्री जा सकती है। उनका प्रयास भारतीय किक्रेट टीम के मनोबल को बढ़ाना और ज्यादा से ज्यादा लोगों को उससे जोड़ना है। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के क्रिकेट मैच को देखने के लिए दुनिया भर के लोग उत्साहित रहते हैं। ऐसे में मेरा यह प्रयास अपनी टीम को सपोर्ट करने के लिए है। शहर में भी किक्रेट के प्रति खासा क्रेज रहता है। ऐसे बड़े मुकाबले के लिए शहर में बड़ी-बड़ी स्क्रीनें तक लगाई जाती हैं। लंबे समय के बाद भारत-पाकिस्तान एक मैदान में दिखेंगे। ऐसे में पूरे भारत को टीम इंडिया को प्रोत्साहित करना चाहिए।

अनोखा ऑफर

ओलिंपिक में गोल्ड मेडल मिलने पर भी दी थी फ्री राइड
टोक्यो ओलिंपिक 2020 में देश के लिए नीरज चोपड़ा ने जेवलिन में स्वर्ण पदक जीता था। उससे अगले दिन भी अनिल ने फ्री राइड का ऑफर दिया था। उस दिन शहर में यूपीएससी का एग्जाम था, जिसके चलते अनिल ने 150 से ज्यादा स्टूडेंट्स को बस स्टैंड सेक्टर-17 से फ्री सफर करवाते हुए सेक्टर-11, सेक्टर-16, सेक्टर-23 में बने परीक्षा केंद्र तक छोड़ा था।

सैनिक और गर्भवती महिलाओं को करवाते हैं फ्री सफर
अनिल शहर का ऐसा पहला ऑटो ड्राइवर है, जोकि भारतीय सैनिक और गर्भवती महिलाओं से ऑटो में सफर करने के कोई पैसे नहीं लेता। इसके अलावा उन्होंने कोरोना काल में मेडिकल स्टाफ को भी फ्री सफर करवाया था।

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