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असम : विरोध प्रदर्शन के बीच कर्फ्यू में 15 घंटे की ढील, सामान्य हो रहे हालात

—नये कानून के विरूद्ध सुप्रीम कोर्ट में आसू समेत कुल 15 याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिन पर 18 दिसम्बर को सुनवाई होगी

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गुवाहाटी,(नसीब सैनी)।

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर राज्य में बुधवार से जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच सोमवार को सड़कों पर काफी चहल-पहल देखी जा रही है। हालात तेजी से सामान्य होते नजर आ रहे हैं। कर्फ्यू वाले इलाकों में प्रशासन ने दिन के समय ढील दी है। सोमवार को भी गुवाहाटी में सुबह 06 से रात 09 बजे तथा डिब्रूगढ़ में सुबह 06 से शाम 08 बजे तक कर्फ्यू में ढील दी गई है। साथ ही शाम 03 बजे तक आंदोलन की अनुमति दी गई है।

हालांकि राज्य के विभिन्न इलाकों में स्थिति अभी भी तनावपूर्ण देखी जा रही है। गुवाहाटी, डिब्रूगढ़, जोरहाट, तिनसुकिया, तेजपुर आदि जिलों में आंदोलनकारियों के हिंसक प्रदर्शन के मद्देनजर बुधवार की शाम और गुरुवार को क्रमवार कर्फ्यू लगाया गया था। जिसकी वजह से आम जनजीवन पूरी तरह से प्रभावित हो गया।

सोमवार को लगातार तीसरे दिन गुवाहाटी में हालात पूरी तरह से सामान्य दिखाई दे रहे हैं। सरकारी कार्यालय, पेट्रोल पंप, रसोई गैस की एजेंसियां, डाक घर आदि खुल गए हैं। बाजारों में रौनक दिखाई दे रही है। सब्जी व मछली बाजारों में खरीददारों की भारी भीड़ देखी जा रही है। हालांकि सामानों के दाम दो से तीन गुना बढ़ गया है। खरीददार बढ़ी हुई कीमतों पर सामान खरीदने से परहेज नहीं कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि बिक्रेता बड़ी मेहनत के बाद बाजारों तक सामान पहुंचाए हैं, तो थोड़ी अधिक कीमत देने में कोई दिक्कत नहीं है। सड़कों पर निजी वाहन के साथ ही सार्वजनिक वाहनों की आवाजाही भी सामान्य हो गई है।

कामरूप (मेट्रो) जिला प्रशासन ने गुवाहाटी में सोमवार की सुबह 06 से रात 09 बजे तक लगभग 15 घंटे की कर्फ्यू में ढील दिया है। हिंसा प्रभावित डिब्रूगढ़ जिले में कर्फ्यू में सुबह 06 से रात 08 बजे तक की रियायत दी गई है। शनिवार से आमतौर पर राज्य के सभी हिस्सों में हालात सामान्य हैं। हालांकि विभिन्न संगठनों के लोग नागरिकता संशोधन कानून का शांतिपूर्ण विरोध कर रहे हैं।

ऑल असम छात्र संस्था (आसू) के आह्वान पर नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में आरंभ हुए आंदोलन में कई संगठन हिस्सा ले रहे हैं। यह भी आरोप लगा है कि कुछ शरारती तत्व आंदोलन को हिंसक बनाने के लिए जिम्मेदार हैं। इसमें कितनी सच्चाई है, यह जांच का विषय है।

नये कानून के विरूद्ध सुप्रीम कोर्ट में आसू समेत कुल 15 याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिन पर 18 दिसम्बर को सुनवाई होगी। स्कूल और कॉलेजों को आगामी 22 दिसम्बर तक बंद रखा गया है। जबकि, सरकारी कामकाज अभी सामान्य नहीं हो पाया है। इस बीच असम कर्मचारी परिषद ने 18 दिसम्बर को एक दिन के लिए कामकाज बंदकर आंदोलन को अपना समर्थन देने की घोषणा की है।

कानून व्यवस्था को संभालने के लिए पुलिस विभाग में भी काफी फेरबदल किया गया है। केंद्रीय अर्धसैनिक बल व कुछ इलाकों में सेना के जवानों को भी तैनात किया गया है। कामरूप (मेट्रो) जिला प्रशासन ने बताया है कि हालात तेजी से सामान्य हो रहे हैं। अगर स्थिति यही बनी रही तो बहुत जल्द कर्फ्यू को हटा लिया जाएगा। हालांकि सोमवार को एक बार फिर से मोबाइल-इंटरनेट सेवा अगले 24 घंटे तक यानी मंगलवार की शाम 07 बजे तक बंद किया गया है। गत बुधवार से ही मोबाइल-इंटरनेट सेवा बंद है। पहले 24 घंटा, उसके बाद 48 घंटा, फिर 48 घंटा व पुनः 24 घंटा के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद की गई है। इसकी वजह से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इंटरनेट के बंद होने से मीडिया को भी काफी दिक्कतें हो रही हैं। प्रशासन ने कई संगठनों के बड़े नेताओं को गिरफ्तार भी किया है।

नसीब सैनी

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डस्टबिन में भ्रष्टाचार:एजेंसी ने हेल्थ ब्रांच स्टाफ के साथ मिलीभगत कर तैयार कराए थे कम वजन के डस्टबिन, स्पेसिफिक जांच कमेटी ने पकड़ा मामला, 500 के बजाय 420 किलाे मिले

डस्टबिन में भ्रष्टाचार:एजेंसी ने हेल्थ ब्रांच स्टाफ के साथ मिलीभगत कर तैयार कराए थे कम वजन के डस्टबिन, स्पेसिफिक जांच कमेटी ने पकड़ा मामला, 500 के बजाय 420 किलाे मिले

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हिसार । नगर निगम के डस्टबिन टेंडर में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। टेंडर लेने वाली एजेंसी ने हेल्थ ब्रांच के स्टाफ के साथ मिलीभगत कर कम वजन के डस्टबिन तैयार करवा दिए। हालांकि मामला पकड़ में अा गया। स्पेसिफिक जांच करने के लिए गठित कमेटी ने मामले का पटापेक्ष कर दिया।

आजाद नगर स्थित दमकल केंद्र में रखे गए 3 क्यूब के डस्टबिन

दरअसल, मामला कुरूक्षेत्र की एजेंसी का है। एजेंसी ने 500 किलोग्राम के लाेहे के 30 बड़े डस्टबिन बनाने का टेंडर लिया था। इसमें स्पेसिफिकेशन रखी थी कि एक डस्टबिन का वजन 500 किलाेग्राम हाेना चाहिए। एजेंसी ने टेंडर तैयार कर नगर निगम कार्यालय के अधीन डस्टबिन भिजवा दिये। एक डस्टबिन की कीमत करीब 45 से 50 हजार रुपये के बीच रखी थी। निगम ने ये डस्टबिन आजाद नगर स्थित दमकल केंद्र में रखवा दिए।

पढ़िए… कैसे आई मिलीभगत सामने और कैसे पकड़ में आया मामला

जिस एजेंसी काे नगर निगम ने 30 बड़े डस्टिबन बनाने का वर्क ऑर्डर दिया था उस एजेंसी ने जब डस्टबिन तैयार करवाकर रखवाए ताे पेमेंट जारी करने से पहले सामान की स्पेसिफिक वेरिफिकेशन के लिए गठित कमेटी काे जांच के लिए भेजा गया। कमेटी इंचार्ज डीएमसी प्रदीप हुड्डा थे।

उन्हाेंने स्पेसिफिक के हिसाब से सामान जांच लिया मगर वजन नहीं कराया। उन्हाेंने सीएसआई व क्लर्क काे इसका वजन कराने की बात कही। मगर सीएसआई व क्लर्क ने दमकल केंद्र में ही कहा कि साहब वजन कैसे हाे पाएगा। वजन ताे पूरा ही मिलेगा। इस पर डीएमसी काे शक हाे गया।

उन्हाेंने कहा कि बिना वजन यह कैसे तय हाे पाएगा कि स्पेसिफिकेशन सही है। उन्हाेंने गाड़ी में डस्टबिन लाेड करवाकर कहा कि यह उस धर्मकांटा पर ले जाना जहां कंप्यूटराइज पर्ची निकलती हाे। यानी जाे धर्मकांटा मैनुअल पर्ची देगा उसकी मान्य नहीं हाेगी। सीएसआई और काॅन्ट्रेक्ट के क्लर्क ने शहर में आने के बाद डीएमसी काे काॅल की कि साहब सभी मैनुअल वाले ही हैं काेई कंप्यूटराइज पर्ची देने वाला धर्मकांटा नहीं है। 2 घंटे इंतजार के बाद कमिश्नर ने कहा कि आप लाेकेशन बताओ हम वहीं पहुंच रहे।

डीएमसी ने किसी अन्य कर्मचारी से पूछा कि ऐसा काेई धर्मकांटा बताओ। कर्मचारी ने कहा कि साहब निगम कार्यालय के सामने ही है। डीएमसी ने ये डस्टबिन वहीं मंगवा लिये। जब वजन किया गया ताे 420 किलाे प्रति डस्टबिन निकला। डीएमसी ने इस मामले में सीएसआई व क्लर्क काे फटकार लगाई और एजेंसी काे लिखा कि जब तक स्पेसिफिकेशन पूरी नहीं हाेती डस्टबिन नहीं रखवाए जाएंगे।

जानिए… अब एजेंसी काे लिखा बिना स्पेसिफिकेशन पूरी किए निगम नहीं करेगा सामान की पेमेंट

अब नगर निगम ने कुरुक्षेत्र की एजेंसी काे लिखा है कि जाे डस्टबिन भेजे गए थे वे स्पेसिफिकेशन के हिसाब से सही नहीं है। ऐसे में नगर निगम इसकी पेमेंट जारी नहीं करेगा। अधिकारियाें का कहना है कि अगर टेंडर के अनुरूप स्पेसिफिकेशन पूरी की जाएगी ताे ही डस्टबिन रखवाए जाएंगे वरना एजेंसी अपने डस्टबिन वापस ले जा सकती है।

3 क्यूब के बड़े डस्टबिन बनवाए गए थे। स्पेसिफिकेशन वेरिफिकेशन के लिए कमेटी ने जब इनका वजन कराया ताे इनमें 500 किलोग्राम के बजाय 420 किलाेग्राम वजन मिला। इस मामले में सीएसआई व क्लर्क की भूमिका संदिग्ध मिली थी।” -प्रदीप हुड्डा, डिप्टी म्युनिसिपल कमिश्नर, नगर निगम।

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राज्य सरकार की तरफ से गांवों में किया जा रहा है शहरों की तर्ज पर विकास:सुधा

निवर्तमान अध्यक्षा उमा सुधा ने किया वाल्मीकि जयंती पर गांव खेड़ी रामनगर में किया वाल्मीकि चौपाल व भवन निर्माण कार्य का शिलान्यास, विकास कार्यो पर खर्च होगा 10 लाख का बजट

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कुरुक्षेत्र । नगर परिषद की निवर्तमान अध्यक्षा उमा सुधा ने कहा कि राज्य सरकार की तरफ से गांवों का शहरों की तर्ज पर विकास किया जा रहा है। इस सरकार ने गांवों में 24 घंटे बिजली, पीने का पानी हर घर तक पहुंचाने के लिए हर घर तक नल योजना को अमलीजामा पहनाने का काम किया है। वे बुधवार को गांव खेड़ी रामनगर में वाल्मीकि जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रही थी। इससे पहले निवर्तमान अध्यक्षा उमा सुधा ने 5 लाख रुपए की लागत हरिजन चौपाल की चारदीवारी व 5 लाख रुपए की लागत से बनने वाली वाल्मीकि चौपाल की चारदीवारी के कार्य का शिलान्यास किया। इस दौरान निवर्तमान अध्यक्षा उमा सुधा ने गांव के लोगों को भगवान वाल्मीकि जयंती की शुभकामनाएं दी है। निवर्तमान अध्यक्षा उमा सुधा ने कहा कि आज समाज के लोगों को भगवान वाल्मीकि के दिखाएं मार्ग पर चलने की जरूरत है। इन महान लोगों के आर्दशों को जीवन में धारण करके अपने जीवन को सफल बनाया जा सकता है। समाज के लोगों को हमेशा एक जुट होकर रहना चाहिए। इस मौके पर गांव के मौजिज लोग मौजूद थे।

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अफसरों के डिजिटल सिग्नेचर कर रिलीज कराए पीएफ के 2.74 करोड़ रिटायर्ड कर्मचारियों के जीवनभर की पूंजी, आईपीएल सट्टा में हार गया क्लर्क

जनस्वास्थ्य विभाग से रिटायर्ड कर्मचारियों की जमा पूंजी के पौने तीन करोड़ रुपये स्थापना शाखा क्लर्क सुनील कुमार आईपीएल में सट्टा लगाकर हार गया।

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जनस्वास्थ्य विभाग से रिटायर्ड कर्मचारियों की जमा पूंजी के पौने तीन करोड़ रुपये स्थापना शाखा क्लर्क सुनील कुमार आईपीएल में सट्टा लगाकर हार गया। इसके बाद एक महीने से फरार क्लर्क को पुलिस ने सोमवार को बस स्टैंड नजदीक से दबोच लिया। आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए एक महीने से फरीदाबाद किराये का मकान लेकर रह रहा था। पुलिस ने मंगलवार सुबह आरोपी को न्यायालय में पेश कर कार्रवाई शुरू कर दी है।

आरोपी क्लर्क सुनील कुमार।

रिटायर्ड कर्मियों की जगह ट्रेजरी में दिए पत्नी-साले के अकाउंट नंबर……जनस्वास्थ्य विभाग में अधिकारियों के डिजिटल सिग्नेचर ऑनलाइन डोंगल से होते हैं। इसी का क्लर्क सुनील कुमार ने फायदा उठाया। जो कर्मचारी पिछले वर्ष रिटायर हुए थे, उन सब के पीएफ में जमा पूंजी निकलवाने के लिए सुनील ने डोंगल से अधिकारियों के डिजिटल सिग्नेचर फार्म पर कर लिए। इसके बाद यह फाइल उसने खजाना कार्यालय में जमा करवा दी। इसके बाद यह रुपये खजाना कार्यालय से रिलीज करवा कर बैंक में डलवा लिए। जहां आरोपी क्लर्क ने रिटायर्ड कर्मचारियों के बैंक अकाउंट की जगह दूसरे बैंक अकाउंट में यह राशि डलवा कर निकाल ली।

2.42 करोड़ रुपये पत्नी और 32 लाख साले के खाते में डलवाए थे, बाद में दोनों खातों से निकाली रकम….पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि क्लर्क सुनील कुमार ने रिटायर्ड कर्मचारियों के 2 करोड़ 74 लाख रुपये अपनी पत्नी व साले के अकाउंट में डलवाए थे। पत्नी और साले का अकाउंट रेवाड़ी जिले के मीरपुर स्थित बैंक में खुलवाया हुआ था। इनमें पत्नी सोनम के खाते में 2 करोड़ 42 लाख रुपये और साले तनुज के खाते में 32 लाख रुपये डलवाए। इसके बाद सुनील ने दोनों खातों से रुपये निकाल लिए।

तत्कालीन एक्सईएन ने जांच के बाद दी थी आरोपी के खिलाफ शिकायत…..जनस्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन एक्सईएन दलबीर सिंह दलाल ने रिटायर्ड कर्मचारियों की शिकायत पर मामले की जांच करवाई थी। इसके लिए तीन अधिकारियों की कमेटी बनाई गई थी। इसके बाद मामले का खुलासा हुआ तो एक्सईएन ने खुद क्लर्क के खिलाफ पुलिस को शिकायत दी थी। 21 सितंबर को सिटी थाना पुलिस ने क्लर्क सुनील कुमार पर केस दर्ज कर लिया था।

शातिर ने बैंक खाते फ्रीज करवाने से पहले निकाल लिए थे सारे रुपये…. रिटायर्ड कर्मचारियों के 2 करोड़ 74 लाख रुपये क्लर्क सुनील कुमार ने अपनी पत्नी व साला के बैंक अकाउंट में डलवाई थी। ऐसे में मामले को खुलासा होते ही जनस्वास्थ्य विभाग अधिकारी ने इन दोनों अकाउंट सहित क्लर्क के अकाउंट को भी फ्रीज करवा दिया था। मगर इससे पहले आरोपी क्लर्क अपने तीनों अकाउंट से रुपये निकाल चुका था।

उम्रभर की बचत लेकर हो गया था चंपत…. जनस्वास्थ्य विभाग से रिटायर्ड कर्मचारी जोगेंद्र सिंह, रविंद्र सिंह व नूरहसन ने बताया कि वह पिछले वर्ष अगस्त और दिसंबर में रिटायर हुए थे। अक्सर वह कार्यालय की स्थापना शाखा क्लर्क सुनील कुमार के चक्कर लगाकर पीएफ के रुपये निकलवाने का आग्रह कर रहे थे। इस दौरान वह उन्हें जल्द रुपये दिलाने की बात कहकर टरका देता था। इसके बाद उन्होंने एक्सईएन को शिकायत देकर जांच की मांग उठाई थी। इसके बाद जाकर मामले का खुलासा हुआ। कर्मचारियों ने बताया कि पिछले वर्ष कई कर्मचारी रिटायर हुए थे, जिनके रुपये अभी तक नहीं मिले हैं।

आरोपी सट्‌टे में हार चुका पूंजी: आईओ…. आरोपी क्लर्क को गिरफ्तार कर लिया गया है। न्यायालय में पेश कर आरोपी को पांच दिन के पुलिस रिमांड पर लिया है। पूछताछ में आरोपी क्लर्क ने बताया है कि उसने रिटायर्ड कर्मचारियों के रुपये निकाल कर आईपीएल मैचों में सट्टा लगाया था, जो वह हार गया। पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है।” – भीम सिंह, एएसआई, सिटी थाना।

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